
हिमाचल प्रदेश: मैक्लोडगंज में बिना भारतीय वीजा रह रहा चीनी नागरिक गिरफ्तार, पूर्व में चीनी पुलिस से जुड़ाव की जांच तेज
हिमाचल प्रदेश के संवेदनशील पर्यटन और धार्मिक क्षेत्र मैक्लोडगंज में सुरक्षा एजेंसियों ने एक चीनी नागरिक को हिरासत में लेकर बड़ा खुलासा किया है। यह विदेशी नागरिक बीते करीब पांच महीनों से बिना किसी वैध भारतीय वीजा के भारत में रह रहा था। आरोपी के खिलाफ मैक्लोडगंज पुलिस थाने में विदेशी अधिनियम, 1946 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब उसकी गतिविधियों, संपर्कों और भारत में रहने के उद्देश्य की गहन जांच कर रही है।

मामला उस वक्त सामने आया, जब कांगड़ा पुलिस अधीक्षक कार्यालय की सुरक्षा शाखा को मैक्लोडगंज क्षेत्र में एक संदिग्ध विदेशी नागरिक की मौजूदगी की सूचना मिली। सूचना मिलते ही सुरक्षा शाखा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित व्यक्ति को हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए सुरक्षा कार्यालय लाया गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी केवल चीनी भाषा में बातचीत कर रहा था और उसके पास कोई वैध भारतीय पहचान या वीजा दस्तावेज मौजूद नहीं थे।
पूछताछ के दौरान आरोपी हिंदी या अंग्रेजी में संवाद करने में असमर्थ रहा। बाद में उसने अपना पासपोर्ट प्रस्तुत किया, जिससे उसकी पहचान लौ वेननियन के रूप में हुई। पासपोर्ट के अनुसार उसकी जन्मतिथि 10 मई 1965 है। उसका जन्म स्थान सिचुआन बताया गया है, जबकि पासपोर्ट युन्नान प्रांत से जारी हुआ है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के पास नेपाल सरकार द्वारा जारी पर्यटक वीजा था, जिसकी वैधता 29 जून 2025 से 26 सितंबर 2026 तक दर्शाई गई है।
हालांकि, जांच में स्पष्ट हुआ कि यह वीजा भारत में रहने के लिए मान्य नहीं था। पुलिस के अनुसार, आरोपी 26 सितंबर 2025 से लेकर 2 फरवरी 2026 तक लगभग 130 दिनों तक कांगड़ा जिले के मैक्लोडगंज क्षेत्र में बिना किसी वैध भारतीय वीजा के ठहरा रहा। यह कृत्य विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 14 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।
किराये के मकान में रह रहा था आरोपी
पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी मैक्लोडगंज के समीप एक गांव में किराये के मकान में रह रहा था। वह स्थानीय लोगों के संपर्क में सीमित रहता था और अपनी पहचान को लेकर ज्यादा जानकारी साझा नहीं करता था। सुरक्षा एजेंसियों को उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर उस पर नजर रखी गई और अंततः उसे हिरासत में लिया गया।
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। आरोपी के बैंक खाते में लगभग चार लाख चीनी युआन की राशि पाई गई है। इसके अलावा उसके पास से बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि इन उपकरणों में कोई संवेदनशील डेटा, संदिग्ध संपर्क या रिकॉर्ड तो मौजूद नहीं है।
पूर्व में चीनी पुलिस में सेवा देने का दावा
प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी के बारे में यह भी सामने आया है कि वह पूर्व में चीन की पुलिस में अपनी सेवाएं दे चुका है। इस जानकारी के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गई हैं। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उसकी भारत में मौजूदगी किसी खुफिया या जासूसी गतिविधि से जुड़ी है या नहीं, लेकिन सभी पहलुओं से जांच की जा रही है।
कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक अशोक रतन ने बताया कि चीनी नागरिक को हिरासत में लिया गया है और बिना वैध भारतीय वीजा के भारत में रहने के आरोप में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय एजेंसियों की मदद भी ली जाएगी।
संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर सवाल
मैक्लोडगंज और धर्मशाला क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। धर्मशाला में खुफिया ब्यूरो (आईबी) सहित कई केंद्रीय जांच और सुरक्षा एजेंसियों के कार्यालय मौजूद हैं। इसके बावजूद एक विदेशी नागरिक का लंबे समय तक बिना वैध दस्तावेजों के यहां रहना कई सवाल खड़े करता है। हालांकि, हिमाचल पुलिस की सुरक्षा शाखा की सतर्कता से समय रहते मामले का खुलासा हो गया।
मैक्लोडगंज तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा का निवास स्थान है और यहीं निर्वासित तिब्बती सरकार का मुख्यालय भी स्थित है। हर साल यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक, श्रद्धालु और अनुयायी आते हैं। इसी कारण यह क्षेत्र हमेशा सुरक्षा एजेंसियों की नजर में रहता है।
दलाई लामा की सुरक्षा व्यवस्था पहले से मजबूत
14वें दलाई लामा को पूर्व में चीन की ओर से कई बार धमकियों की आशंका जताई जा चुकी है। बीते वर्ष खुफिया इनपुट के आधार पर उनकी सुरक्षा को लेकर खतरे की चेतावनी दी गई थी, जिसके बाद भारत सरकार ने उन्हें देशभर में जेड-प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की। वर्तमान में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ के विशेष प्रशिक्षित कमांडो संभाल रहे हैं।
इसके अलावा 15वें दलाई लामा की घोषणा को लेकर भी चीन लगातार अपनी दावेदारी जताता रहा है। वहीं, गादेन फोडरंग ट्रस्ट और तिब्बती धर्मगुरुओं ने साफ तौर पर कहा है कि इस धार्मिक प्रक्रिया में चीन सरकार के किसी भी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
फिलहाल, हिरासत में लिए गए चीनी नागरिक से जुड़े हर पहलू की गहन जांच जारी है। सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि इस मामले से राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी भी तरह का खतरा न हो और कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाए।



