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Haryana News: हरियाणा के प्राइमरी स्कूलों में जल्द नियुक्त होंगे संस्कार टीचर, जल्द होगा विज्ञापन जारी

Haryana News:  हिसार। केश कला एवं कौशल विकास बोर्ड के निदेशक नरेश सेलपाड़ ने कहा है कि देश में नई शिक्षा निति के तहत विद्याथिर्यों को शिक्षा के साथ-साथ अपनी सस्कृति एवं गौरव का भी ज्ञान करवाया जाएगा। साथ ही उसे नैतिक संस्कारों के शिक्षा भी प्रदान की जाएगी। इसके लिए बकायदा प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में संस्कार अध्यापक भी नियुक्त होंगे। वो हिसार में एक नई शिक्षा नीति पर आयोजित एक कार्यशाला में भाग ले रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस प्रकार की परियोजनाओं के तहत चयनित अध्यापक का कार्य विद्याथिर्यों में जहां संस्कार विकसित करना होगा, वही वो नैतिक शिक्षा के भी ध्वजवाहक का भी कार्य करेंगे। ये अध्यापक स्कूल एजुकेशन और साक्षरता मिशन भारत सरकार के विशेष प्रोजेक्ट के तहत मिनिस्ट्री आफ कल्चर अफेयर भारत सरकार व देश की एक नामी संस्थान के तत्वावधान में सभी प्राइमरी स्कूलों में नियुक्त किए जाएंगे। इसके लिए बकायदा सिलेबस भी तैयार किया जा रहा है। ये अध्यापक अंशकालिक होंगे, और ये हर रोज दो घंटे ही विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे।
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ये रहेगी शैक्षणिक योग्यता:-
केश कला एवं कौशल विकास बोर्ड के निदेशक नरेश सेलपाड़ के अनुसार इन पदों के लिए न्यूनतम योग्यता 12 वीं कक्षा पास गई है। साथ ही आवेदक की आयु प्रदेश में नियुक्ति नियमों के अनुरुप 18 से 42 वर्ष के मध्य होनी चाहिए। हालांकि एससी, एस.टी. या भूतपूर्व सैनिकों या उनके आश्रितों, स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को इसमें तीन वर्ष की छूट रहेगी। इसके अलावा इसके 33 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे।


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ये रहेगा वेतनमान:-
निदेशक नरेश सेलपाड़ ने बताया कि चयनित प्राइमरी स्कूलों में नियुक्त संस्कार अध्यापकों को महज दो घंटे ही अपनी सेवाएं देनी होगी। जिसके एवज में उन्हें 9240 रुपये के आस-पास वेतनमान दिया जाएगा। यदि एक गांव में एक स्कूल है तो उनकी डयूटी उसी स्कूल में होगी, यदि गांव में दो प्राईमरी स्कूल हैं तो अलग-अलग दिनों या एक-एक घंटा दोनों स्कूलों में सेवाएं देनी होगी। किसी बड़े गांव या कस्बे में दो से अधिक प्राइमरी स्कूल होने पर वहां एक से अधिक अध्यापकों की नियुक्तियां हो सकेगी।
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सात लोगों की बनेगी कमेटी:-
विद्याथिर्यों में भारतीय संस्कृति के प्रति रुचि पैदा करने के लिए सात सदस्यों की एक कमेटी भी बनेगी। इस कमेटी से जुड़ने के लिए 12वीं तक शिक्षित होने के अलावा समाजसेवा से जुड़ा होना अनिवार्य मापदंड बनाया गया है। हालांकि इनका कार्य निगरानी एवं सुझाव देने व कार्य विशेष की योजना को अमलीजामा पहनाना होगा। यह कमेटी पहले से स्कूल में कार्यरत एसएमसी कमेटी से अलग होगी। वैसे एसएमसी कमेटी के सदस्य भी इससे जुड़ सकते हैं, मगर उनकी शिक्षा से संबंधित मांपदंड पूरे करने होंगे, जबकि एसएमसी कमेटी में ऐसा कोई नियम नहीं था।
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हर माता-पिता की इच्छा होती है अपनी संतानों को अच्छी शिक्षा दिलाएं, पढ़ा-लिखाकर उन्हें बड़ा बनाएं, लेकिन सिर्फ किताबी ज्ञान या सामान्य शिक्षा किसी को बड़ा नहीं बना सकती। सफलता के शीर्ष को छूना हो तो शिक्षा के साथ बच्चों को संस्कार देना भी जरूरी हैं। परंतु यह भी तय है कि जब तक संस्कार ज्ञान के साथ नहीं गूंथ दिए जाते, बच्चा सफल होना तो दूर, कामयाबी की दौड़ में शामिल हो पाने के लायक भी नहीं बन सकता। निदेशक, नरेश सेलपाड़

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