
रसूलपुर में पानी बना जहर: पाइपलाइन लीकेज से सैकड़ों परिवारों की जिंदगी खतरे में
हरियाणा के पलवल जिले के रसूलपुर गांव में इन दिनों पेयजल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। गांव में जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा बिछाई गई पानी की पाइपलाइन जगह-जगह से लीक हो रही है, जिसके चलते सैकड़ों परिवार दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि गांव के करीब 300 घरों में साफ पानी की जगह गंदा, बदबूदार और अशुद्ध पानी पहुंच रहा है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक, यह पाइपलाइन लगभग तीन साल पहले बिछाई गई थी और इसे गांव की नालियों के किनारे डाला गया था। शुरुआत में पानी की सप्लाई ठीक रही, लेकिन समय के साथ पाइपलाइन में जगह-जगह दरारें आने लगीं। पिछले एक सप्ताह से स्थिति और भी बिगड़ गई, जब पानी की मोटर खराब हो जाने के कारण सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई थी।
करीब सात दिन बाद जब पानी की आपूर्ति दोबारा शुरू हुई, तो लोगों को राहत मिलने के बजाय और बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। नलों से आने वाला पानी साफ नहीं बल्कि गंदगी से भरा हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि पानी में मिट्टी, कचरा और अन्य अशुद्धियां साफ दिखाई देती हैं। इतना ही नहीं, पानी का रंग भी सामान्य नहीं है और उसमें से बदबू आती है।
गांव के कई निवासियों जैसे राजेंद्र, दीपक, विजय, पप्पू, दुष्यंत, जय सिंह, अश्वनी, साहिल, मोहित, रजत, सचिन, वेद प्रकाश, हर्ष, सुभाष, जोगिंद्र और राज कुमार ने बताया कि जब इस पानी को बाल्टी में भरा जाता है, तो उसमें झाग बनने लगते हैं और गंदगी ऊपर तैरती नजर आती है। ऐसे पानी का उपयोग न तो पीने के लिए किया जा सकता है और न ही किसी अन्य घरेलू काम के लिए, लेकिन मजबूरी में लोग इसी पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पाइपलाइन में कई जगह से लीकेज हो रही है और चूंकि यह पाइपलाइन नालियों के पास से गुजरती है, इसलिए गंदा पानी पाइप के अंदर चला जाता है। इसी कारण घरों में दूषित पानी की सप्लाई हो रही है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो गांव में बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
गांव की निवासी बीना ने बताया कि वे साफ पानी की उम्मीद में पानी भरकर रखती हैं, लेकिन कुछ देर बाद उसमें गंदगी दिखाई देने लगती है, जिससे उसे फेंकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के पानी का उपयोग करना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया है।
वहीं, पप्पू नामक ग्रामीण ने बताया कि नलों में आने वाला पानी इतना खराब है कि वह केवल बर्तन धोने के काम ही आ सकता है। उन्होंने कहा कि पीने के लिए यह पानी बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं है, लेकिन कई लोग मजबूरी में इसे पीने को विवश हैं, जिससे उनकी सेहत खराब हो रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि भीषण गर्मी के इस मौसम में पानी की समस्या और भी गंभीर हो जाती है। जहां एक ओर पानी की जरूरत बढ़ जाती है, वहीं दूसरी ओर उन्हें साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। इससे बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर विशेष रूप से खतरा बना हुआ है।
इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनस्वास्थ्य विभाग से कई बार शिकायत करने की कोशिश की है। उन्होंने मांग की है कि किसी सक्षम अधिकारी को मौके पर भेजा जाए, जो पानी की गुणवत्ता की जांच करे और पाइपलाइन की मरम्मत कराए। साथ ही, जब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, तब तक गांव में स्वच्छ पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
इस पूरे मामले पर जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि उन्हें अभी तक इस समस्या की कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी। हालांकि, मीडिया के माध्यम से जानकारी मिलने के बाद विभाग ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही कर्मचारियों को मौके पर भेजा जाएगा और जहां-जहां लीकेज होगी, उसे ठीक कराया जाएगा।
फिलहाल, रसूलपुर गांव के लोग इस उम्मीद में हैं कि प्रशासन जल्द ही इस समस्या का समाधान करेगा। उनका कहना है कि स्वच्छ पेयजल उनका मूल अधिकार है और इसके लिए उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना चाहिए।
कुल मिलाकर, यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को उजागर करता है। स्वच्छ पानी जैसी जरूरी सुविधा की अनदेखी न केवल लोगों के जीवन स्तर को प्रभावित करती है, बल्कि उनके स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन जाती है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक गांव के लोगों को इस समस्या से राहत मिलती है।



