
महाशिवरात्रि की रात बना मातम: हिमाचल के सराज में गहरी खाई में गिरी जीप, तीन दोस्तों की मौत, एक जिंदगी से जंग लड़ रहा
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर जहां देशभर में मंदिरों में घंटे-घड़ियाल बज रहे थे, वहीं हिमालयी प्रदेश से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में रविवार तड़के एक जीप दुर्घटना ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे में तीन युवकों की मौके पर और रास्ते में मौत हो गई, जबकि उनका एक साथी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।

यह हृदयविदारक दुर्घटना सराज क्षेत्र के थुनाग उपमंडल में हुई, जो पहाड़ी सड़कों और खतरनाक मोड़ों के लिए जाना जाता है। जानकारी के अनुसार, चार दोस्त देर रात जीप में सवार होकर किसी काम से निकले थे। सुबह करीब चार बजे जब वे लौट रहे थे, तभी थुनाग–लंबाथाच–कल्हणी मार्ग पर बुनालीधार के पास एक तीखे मोड़ पर वाहन अनियंत्रित हो गया और लगभग डेढ़ सौ मीटर गहरी खाई में जा गिरा।
धमाके की आवाज से खुली ग्रामीण की नींद
सुबह के सन्नाटे को चीरती हुई तेज आवाज ने आसपास के लोगों को जगा दिया। चौड़ा शिल्ह गांव के निवासी गंगा राम ने जब धमाका सुना, तो उन्हें तुरंत किसी अनहोनी का अंदेशा हुआ। उन्होंने बिना देर किए पास के थनूटा गांव में रहने वाले चेत राम और मस्त राम को फोन किया। तीनों ग्रामीण अंधेरे और जोखिम की परवाह किए बिना घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।
खाई में झांककर देखा तो जीप बुरी तरह क्षतिग्रस्त पड़ी थी और भीतर फंसे युवक मदद के लिए पुकार रहे थे। ग्रामीणों ने तत्काल बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस व प्रशासन को सूचना दी। हालांकि तब तक दो युवकों की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। तीसरे युवक को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसने रास्ते में दम तोड़ दिया।
मृतकों की पहचान, एक गंभीर
पुलिस के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान हार्दिक ठाकुर (19), सुनील (17) और ईशान (18) के रूप में हुई है। तीनों अलग-अलग गांवों के रहने वाले थे लेकिन घनिष्ठ मित्र बताए जा रहे हैं।
वहीं उनके साथ जीप में मौजूद कुशाल (18) गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज नेरचौक भेजा गया। हालत नाजुक होने के कारण बाद में उसे एम्स बिलासपुर रेफर कर दिया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
प्रशासन ने दी राहत राशि
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया। थुनाग के एसडीएम ने मृतकों के परिजनों को तत्काल राहत के रूप में 25-25 हजार रुपये और घायल युवक को 5 हजार रुपये देने की घोषणा की। अधिकारियों ने परिवारों को हर संभव सहायता का भरोसा भी दिया है।
जिला पुलिस ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। मंडी के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। वाहन की तकनीकी जांच, सड़क की स्थिति और चालक की स्थिति समेत सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।
क्यों निकले थे रात में?
हादसे को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि चारों दोस्त रात के सन्नाटे में बागाचनोगी की ओर क्यों निकले थे। पुलिस के अनुसार, जहां यह दुर्घटना हुई, वहां उनका कोई परिचित या रिश्तेदार नहीं रहता था। इससे यह रहस्य और गहरा गया है कि आखिर वे उस दिशा में किस काम से गए थे।
बताया जा रहा है कि सुबह चार बजे वापसी के दौरान तेज ढलान और मोड़ के संयोजन ने वाहन का संतुलन बिगाड़ दिया। पहाड़ी मार्गों पर रात के समय कम दृश्यता और तेज रफ्तार अक्सर दुर्घटनाओं की वजह बनती है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि वाहन की गति कितनी थी और चालक ने शराब या थकान की स्थिति में तो वाहन नहीं चलाया।
पहाड़ी सड़कों का खतरा फिर उजागर
यह हादसा एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा गया है। संकरी सड़कें, तीखे मोड़ और गहरी खाइयां अक्सर जरा सी लापरवाही को घातक बना देती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, इसलिए सुरक्षा उपायों की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस सड़क पर सुरक्षा रेलिंग, चेतावनी संकेत और रात में दृश्यता बढ़ाने के उपाय किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
मातम में बदली महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि के दिन जहां मंदिरों में श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर रहे थे, वहीं तीन घरों में चीख-पुकार और मातम का माहौल था। तीन युवा दोस्तों की असमय मौत ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। गांवों में शोक की लहर है और हर कोई यही कह रहा है कि काश वह रात ऐसी न होती।



