
हिसार विवाद: छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और सियासत के बीच बढ़ता टकराव
हरियाणा के हिसार में छात्र संगठन इनसो के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। इस पूरे घटनाक्रम में जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह कार्रवाई न केवल लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि इसमें कानून की प्रक्रियाओं की भी अनदेखी की गई है।

मामले की शुरुआत उस वक्त हुई जब इनसो के छात्र कार्यकर्ता एक विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुंचे। छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय प्रशासन में भ्रष्टाचार और अनियमितताएं हैं, जिनके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। दिन में हुए इस प्रदर्शन के दौरान कुछ गमले टूटने की घटना सामने आई, जिसे आधार बनाकर पुलिस ने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज कर लिया।
हालांकि, इस घटना के बाद जो हुआ, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। आरोप है कि देर रात करीब दो बजे पुलिस की कई टीमें अलग-अलग स्थानों पर पहुंचीं और छात्रों को उनके घरों से हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई को लेकर दुष्यंत चौटाला ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है और इस तरह की कार्रवाई उस अधिकार को दबाने का प्रयास है।
दुष्यंत चौटाला ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने इस दौरान नियमों का पालन नहीं किया। उनके अनुसार, कई घरों में बिना महिला पुलिसकर्मी के तलाशी ली गई और परिवार के सदस्यों, खासकर महिलाओं के साथ अनुचित व्यवहार किया गया। उन्होंने इसे न केवल गैरकानूनी बल्कि अमानवीय बताया।
जब दुष्यंत चौटाला अपने कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर हिसार पहुंचे, तब एक और विवाद खड़ा हो गया। उनका आरोप है कि एसपी से मिलने जाते समय सीआईए स्टाफ ने उनके साथ बदसलूकी की। उन्होंने दावा किया कि उनकी गाड़ी को जबरन रोका गया और उन्हें डराने के लिए हथियार तक दिखाए गए। इस घटना का वीडियो भी उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया, जिससे मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।
इस पूरे मामले को लेकर नायब सैनी की सरकार भी विपक्ष के निशाने पर आ गई है। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि सरकार विपक्ष की बढ़ती सक्रियता से घबराई हुई है और इसी वजह से इस तरह की सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कुछ गमलों के टूटने पर इतनी बड़ी कार्रवाई हो सकती है, तो प्रदेश में बढ़ते अपराधों के खिलाफ इसी तरह की तत्परता क्यों नहीं दिखाई जाती।
उन्होंने आगे कहा कि हरियाणा में कई जगहों पर अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं, धमकियां दे रहे हैं और गंभीर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे मामलों में पुलिस की कार्रवाई उतनी प्रभावी नजर नहीं आती, जितनी इस छात्र आंदोलन के मामले में दिखाई गई। उनके मुताबिक, यदि पुलिस अपराधियों के खिलाफ भी इसी तरह सक्रिय हो जाए, तो कानून-व्यवस्था में सुधार संभव है।
दुष्यंत चौटाला ने विश्वविद्यालयों की मौजूदा स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य ज्ञान और विकास होना चाहिए, लेकिन आज वे राजनीतिक प्रभाव का केंद्र बनते जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विश्वविद्यालयों को अपने हितों के अनुसार इस्तेमाल कर रही है, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में जेजेपी के युवा नेता दिग्विजय चौटाला ने भी खुलकर प्रशासन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह सब एक साजिश के तहत किया जा रहा है ताकि उनके संगठन को कमजोर किया जा सके। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनके कार्यकर्ता डरने वाले नहीं हैं और अगर जरूरत पड़ी तो वे खुद भी गिरफ्तारी देने के लिए तैयार हैं।
दिग्विजय चौटाला ने यह भी कहा कि जिन छात्रों को गिरफ्तार किया गया है, उनका “अपराध” सिर्फ इतना है कि उन्होंने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सभी कार्यकर्ताओं को रिहा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस बीच, जेजेपी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि 27 अप्रैल को प्रस्तावित इनसो का प्रदर्शन रद्द नहीं किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन छात्रों के अधिकारों के लिए है और इसे हर हाल में जारी रखा जाएगा।
पूरे मामले ने हरियाणा की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। एक तरफ विपक्ष सरकार पर दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया है।
हिसार की यह घटना अब केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इसने लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पुलिस की भूमिका को लेकर व्यापक बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है और क्या छात्रों को न्याय मिल पाता है, या फिर यह मामला भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच ही सिमट कर रह जाएगा।



