
पैसे लेकर गवाही बदलने का खेल उजागर: पानीपत में 70 लाख की ठगी में मुख्य गवाह महेंद्र चावला समेत तीन गिरफ्तार
हरियाणा के पानीपत जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें अदालत में गवाही देने के नाम पर लाखों रुपये की कथित ठगी का खुलासा हुआ है। इस मामले में चर्चित धार्मिक गुरुओं से जुड़े एक पुराने केस के मुख्य गवाह रहे महेंद्र चावला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उनके साथ उनके भाई देवेंद्र चावला और भतीजे राम को भी हिरासत में लिया गया है। तीनों पर आरोप है कि उन्होंने गवाही को प्रभावित करने के नाम पर 70 लाख रुपये लिए और बाद में और रकम की मांग कर शिकायतकर्ता को धमकाया।

यह मामला उस समय उजागर हुआ जब सेक्टर-12, पानीपत निवासी भगत सिंह ने थाना चांदनीबाग में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि महेंद्र चावला ने एक चल रहे मुकदमे में गवाही को अपने पक्ष में करने के लिए उनसे भारी रकम मांगी थी। भगत सिंह के अनुसार, महेंद्र चावला ने दावा किया था कि वह सरपंच संजय त्यागी के पक्ष में अदालत में गवाही देंगे और इसके लिए समझौता कराने का भरोसा भी दिलाया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, इस प्रस्ताव के बाद उन्होंने सरपंच संजय त्यागी से बातचीत की और दोनों पक्षों के बीच समझौते की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी दौरान एक अन्य केस, जिसमें सनौली गांव के पूर्व सरपंच सुरेंद्र शर्मा का नाम जुड़ा हुआ था, उसमें भी महेंद्र चावला की गवाही महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। दोनों मामलों में गवाही को लेकर सहमति बनने के बाद, एक मार्च को महेंद्र चावला को 70 लाख रुपये सौंप दिए गए। यह रकम उनके भाई और भतीजे ने उनके घर से ली थी।
लेकिन घटनाक्रम ने उस समय मोड़ लिया जब दो मार्च को अदालत में पेश हुए महेंद्र चावला ने कथित तौर पर अपने ही परिचितों को पहचानने से इनकार कर दिया। इससे साफ हो गया कि उन्होंने पहले किए गए वादे के मुताबिक गवाही नहीं दी। इसके बाद, आरोप है कि उन्होंने और अधिक पैसे ऐंठने की योजना बनाई।
पांच मार्च को जब केस की अगली तारीख थी, तब महेंद्र चावला अदालत में पेश नहीं हुए। इसके बजाय उन्होंने एक कथित फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट जमा कराया और अनुपस्थिति को जायज ठहराने की कोशिश की। इसी दौरान उन्होंने 80 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग रख दी। इस मांग को लेकर पंचायत स्तर पर भी चर्चा हुई और प्रस्ताव पास होने की बात सामने आई, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।
भगत सिंह का आरोप है कि महेंद्र चावला ने उन्हें स्पष्ट रूप से धमकी दी थी कि यदि अतिरिक्त रकम नहीं दी गई, तो वह अदालत में झूठी गवाही देंगे, जिससे केस का फैसला प्रभावित हो सकता है। इस दबाव और धमकी के चलते शिकायतकर्ता ने अंततः पुलिस का सहारा लिया।
थाना चांदनीबाग पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया और शुरुआती जांच के बाद इसे सीआईए टीम को सौंप दिया गया। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की, जिससे आरोपियों की भूमिका की पुष्टि हुई। इसके बाद शनिवार शाम को सीआईए टीम ने कार्रवाई करते हुए महेंद्र चावला, उनके भाई देवेंद्र और भतीजे राम को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और पुलिस को उम्मीद है कि इस मामले में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं। डीएसपी सतीश वत्स ने जानकारी दी कि आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि उनसे गहन पूछताछ की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन शामिल है।
यह मामला इसलिए भी खासा गंभीर है क्योंकि महेंद्र चावला पहले एक चर्चित केस में मुख्य गवाह रह चुके हैं। ऐसे में उन पर लगे आरोप न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करते हैं। गवाह किसी भी मुकदमे की रीढ़ होते हैं, और अगर वही गवाह पैसे के लिए अपने बयान बदलने लगें, तो न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई बेहद जरूरी है, ताकि गवाही को खरीदने-बेचने की प्रवृत्ति पर लगाम लगाई जा सके। अदालत में गवाही देना एक जिम्मेदारी है, न कि सौदेबाजी का जरिया। अगर इस तरह की घटनाओं पर कड़ा रुख नहीं अपनाया गया, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
पुलिस की इस कार्रवाई को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो यह संदेश देती है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। चाहे कोई व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, यदि वह कानून का उल्लंघन करता है, तो उसे उसके परिणाम भुगतने ही होंगे।
फिलहाल, तीनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं और मामले की जांच जारी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस पूरे मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और अदालत इस पर क्या रुख अपनाती है। पानीपत का यह मामला न केवल एक धोखाधड़ी का केस है, बल्कि यह समाज और न्याय व्यवस्था के लिए एक चेतावनी भी है कि गवाही जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होने देना चाहिए।



