उत्तराखंड

देहरादून में गाने को लेकर शुरू हुआ झगड़ा बना जानलेवा, बीटेक छात्र की बेरहमी से हत्या

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक मामूली विवाद ने इतना भयानक रूप ले लिया कि एक होनहार छात्र की जान चली गई। कार में गाना बजाने को लेकर शुरू हुआ झगड़ा धीरे-धीरे दुश्मनी में बदल गया और आखिरकार बीटेक के छात्र दिव्यांशु की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने न केवल शहर को झकझोर दिया है, बल्कि छात्रों के बीच बढ़ती गुटबाजी और हिंसा पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, दिव्यांशु एक विश्वविद्यालय में बीटेक कंप्यूटर साइंस के दूसरे वर्ष का छात्र था और अपने दोस्तों के साथ हॉस्टल में रहता था। करीब दो महीने पहले एक छोटी सी घटना ने इस बड़े हादसे की नींव रख दी थी। बताया जा रहा है कि दिव्यांशु के दोस्तों ने विश्वविद्यालय के गेट के बाहर कार में “छोरा जाट्टा” गाना बजाया था। इस बात को दूसरे गुट के कुछ युवकों ने अपनी प्रतिष्ठा के खिलाफ समझ लिया और यहीं से विवाद की शुरुआत हो गई।

शुरुआत में यह विवाद कहासुनी तक सीमित था, लेकिन समय के साथ यह झड़प और मारपीट में बदल गया। दोनों गुटों के बीच कई बार टकराव हुआ, जिससे माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा। धीरे-धीरे यह विवाद व्यक्तिगत रंजिश में बदल गया और आरोपी गुट दिव्यांशु और उसके दोस्तों से बदला लेने की फिराक में रहने लगा।

बताया जा रहा है कि आरोपी गुट लंबे समय से दिव्यांशु की गतिविधियों पर नजर रख रहा था और सही मौके का इंतजार कर रहा था। आखिरकार उन्हें मौका सोमवार रात को मिला, जब दिव्यांशु प्रेमनगर बाजार में अपने दोस्तों के साथ खाना खाने गया हुआ था।

चश्मदीदों के अनुसार, बाजार में पहले दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। देखते ही देखते यह बहस हिंसक झगड़े में बदल गई। करीब 15 युवकों ने मिलकर दिव्यांशु पर हमला कर दिया। हमलावरों के पास लाठी-डंडे और फावड़े जैसे हथियार थे, जिनसे उन्होंने उसे बेरहमी से पीटा। इतनी बुरी तरह पिटाई की गई कि दिव्यांशु गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़ा।

सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि यह घटना एक व्यस्त बाजार में हुई, जहां आसपास काफी लोग मौजूद थे। इसके बावजूद कोई भी व्यक्ति उसे बचाने के लिए आगे नहीं आया। लोग मूकदर्शक बने रहे और हमलावर बेखौफ होकर वारदात को अंजाम देते रहे। आखिरकार एक साहसी दंपत्ति ने मानवता दिखाते हुए घायल दिव्यांशु को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की।

हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही दिव्यांशु ने दम तोड़ दिया। रास्ते में एक और लापरवाही सामने आई, जब उसे ले जा रही एंबुलेंस खराब हो गई। इसके बाद पुलिस वाहन से उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

इस घटना ने दिव्यांशु के परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। वह अपने माता-पिता का बड़ा बेटा था और परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं। उसका छोटा भाई हाल ही में 12वीं की परीक्षा देकर भविष्य की तैयारी कर रहा है। बेटे की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और उनके सपने एक झटके में टूट गए।

परिजनों का आरोप है कि इस घटना से पहले भी कई बार दोनों गुटों के बीच झगड़े हो चुके थे। करीब 15 दिन पहले भी आरोपियों ने दिव्यांशु के एक साथी के साथ मारपीट की थी और उसकी बाइक को तोड़कर जंगल में फेंक दिया था। इस मामले की शिकायत पुलिस से की गई थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का कहना है कि अगर पुलिस पहले सख्ती दिखाती, तो शायद आज उनका बेटा जिंदा होता।

घटना के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है। इलाके में सख्ती बढ़ा दी गई है और सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस ने 8 हॉस्टल संचालकों पर 80 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा 52 वाहनों का चालान किया गया है और 24 लोगों के खिलाफ पुलिस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।

जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि आरोपी खुद को “बिहार डिफॉल्टर” नाम के गैंग से जोड़ते थे। यह गुट विश्वविद्यालय परिसर में दबंगई दिखाने और कमजोर छात्रों को डराने-धमकाने के लिए कुख्यात था। सूत्रों के अनुसार, इस गैंग में कुछ बाहरी लोग भी शामिल थे, जो छात्रों के बीच माहौल खराब कर रहे थे।

एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने कहा है कि इस मामले में शामिल सभी आरोपियों की पहचान कर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के बीच गुटबाजी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और विश्वविद्यालयों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि समाज और सिस्टम दोनों के लिए एक चेतावनी है। छोटी-छोटी बातों से शुरू होने वाले विवाद कब खतरनाक रूप ले सकते हैं, इसका यह एक बड़ा उदाहरण है। साथ ही यह सवाल भी उठता है कि क्या समय रहते पुलिस और प्रशासन ने सही कदम उठाए होते, तो इस घटना को रोका जा सकता था।

अब जरूरत है कि ऐसे मामलों से सबक लिया जाए और छात्रों के बीच बढ़ती हिंसा और गुटबाजी पर सख्ती से रोक लगाई जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न सहना पड़े।

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on X-twitter Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Back to top button