
दून-पांवटा हाईवे पर लापरवाही बनी जानलेवा, लगातार हादसों के बाद प्रबंधक के खिलाफ केस दर्ज
उत्तराखंड में देहरादून और पांवटा साहिब को जोड़ने वाले नए राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा इंतजामों की कमी अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। इस हाईवे पर पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से लगातार सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, उसने निर्माण और प्रबंधन की खामियों को उजागर कर दिया है। स्थिति इतनी खराब हो गई कि महज 10 दिनों के भीतर आठ हादसे हो गए, जिनमें तीन लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए। बार-बार चेतावनी देने के बावजूद सुधार न होने पर पुलिस ने आखिरकार सख्त कदम उठाते हुए संचालन प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

दरअसल, यह राष्ट्रीय राजमार्ग हाल ही में तैयार किया गया है और इसे विशेष रूप से पांवटा साहिब की ओर से आने वाले वाहनों के लिए एकतरफा मार्ग के रूप में विकसित किया गया है। लेकिन इस सड़क की सबसे बड़ी खामी यह है कि यहां बुनियादी यातायात संकेतों का अभाव है। न तो कहीं दिशा बताने वाले साइन बोर्ड लगाए गए हैं और न ही चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर या स्ट्रीट लाइट की पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
इन सुविधाओं के अभाव में वाहन चालकों को यह समझ पाना बेहद मुश्किल हो रहा है कि सड़क किस दिशा में चलने के लिए बनाई गई है। खासतौर पर देहरादून के प्रेमनगर चौक से गोल चौराहे की ओर जाने वाले वाहन चालक अक्सर गलती से इस एकतरफा मार्ग पर चढ़ जाते हैं। उन्हें यह अंदाजा ही नहीं होता कि वे गलत दिशा में वाहन चला रहे हैं।
यह भ्रम करीब चार किलोमीटर तक बना रहता है, क्योंकि रास्ते में कहीं भी उन्हें रोकने या चेताने वाला कोई संकेत नहीं मिलता। जब तक उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है, तब तक वे काफी आगे निकल चुके होते हैं और सामने से आ रहे वाहनों से टक्कर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस मार्ग पर दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, बीते 10 दिनों में इस हाईवे पर आठ गंभीर दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से तीन हादसों में लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि छह से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इन घटनाओं ने न केवल स्थानीय लोगों को डरा दिया है, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
8 अप्रैल को इस मार्ग पर दो वाहनों के बीच जोरदार टक्कर हुई थी, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद 10 अप्रैल को हुए एक अन्य हादसे में एक युवक की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए। इन घटनाओं के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और हादसों का सिलसिला जारी रहा।
प्रेमनगर थाने के एसएचओ नरेश राठौर के अनुसार, पुलिस ने कई बार राष्ट्रीय राजमार्ग के संचालन प्रबंधक को नोटिस जारी कर सड़क पर आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए थे। इन नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि मार्ग पर साइन बोर्ड, चेतावनी संकेतक, रिफ्लेक्टर और लाइट जैसी सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जाएं।
पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संचालन प्रबंधक को मौके पर बुलाकर वास्तविक हालात भी दिखाए थे। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बताया गया था कि यदि जल्द ही सुधार नहीं किए गए तो दुर्घटनाएं और बढ़ सकती हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
लगातार हो रही अनदेखी और बढ़ते हादसों को देखते हुए पुलिस ने सख्त रुख अपनाया और संचालन प्रबंधक लोकेश के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली। अब इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय निवासियों में इस मुद्दे को लेकर काफी आक्रोश है। उनका कहना है कि जब किसी नए हाईवे का निर्माण किया जाता है, तो उसमें सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी होता है। लेकिन यहां तो बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिससे लोगों की जान खतरे में पड़ गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सड़क या हाईवे पर साइन बोर्ड और चेतावनी संकेतक बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ये न केवल वाहन चालकों को सही दिशा दिखाते हैं, बल्कि दुर्घटनाओं को रोकने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा रात के समय रिफ्लेक्टर और स्ट्रीट लाइट की कमी स्थिति को और अधिक खतरनाक बना देती है।
यह मामला यह भी दर्शाता है कि केवल सड़क का निर्माण कर देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सुरक्षा और रखरखाव पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है। यदि समय रहते इस हाईवे पर जरूरी सुधार नहीं किए गए, तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि संबंधित विभाग जल्द ही इस मार्ग की खामियों को दूर करेगा और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। साथ ही इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।



