
करनाल में नकली सोने का गिरोह बेनकाब, पिता-पुत्री गिरफ्तार; 50 मामलों वाला आरोपी फिर पहुंचा जेल
हरियाणा के करनाल जिले में नकली सोने के जरिए ज्वेलरी शोरूम को ठगने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में पुलिस ने पिता और पुत्री को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से नकली सोने को असली बताकर ज्वेलर्स को चूना लगा रहा था। इस घटना ने स्थानीय व्यापारियों के बीच चिंता बढ़ा दी है।

डीएसपी राजीव कुमार ने प्रेसवार्ता के दौरान पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि इस गिरोह में कुल आठ लोगों की संलिप्तता पाई गई है। इनमें से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिनकी पहचान बहादुरगढ़ निवासी सर्वपाल सिंह और उसकी बेटी खुशी अरोड़ा के रूप में हुई है। बाकी छह आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
पुलिस के अनुसार, सर्वपाल सिंह एक आदतन अपराधी है, जिसके खिलाफ पहले से ही लगभग 50 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में हत्या, धोखाधड़ी, जालसाजी और चोरी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि को देखते हुए पुलिस इस केस को बेहद संवेदनशील मानकर जांच कर रही है। सर्वपाल सिंह को पुलिस ने चार दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ की, जिसके बाद उसे अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। वहीं उसकी बेटी खुशी अरोड़ा को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
इस मामले की शुरुआत 7 अप्रैल को हुई, जब एक ज्वेलरी शोरूम के प्रतिनिधि यतिन गोयल ने पुलिस को शिकायत दी। शिकायत में बताया गया कि कुछ लोग बार-बार उनके शोरूम पर आकर सोने के आभूषण बेचते थे और बदले में असली सोना या नकद राशि लेकर चले जाते थे। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन बाद में जब शोरूम में खरीदे गए सोने को पिघलाया गया, तो सच्चाई सामने आई।
जांच में पता चला कि जिन आभूषणों को असली सोना समझकर खरीदा गया था, वे असल में नकली थे। उनके ऊपर केवल सोने की पतली परत चढ़ाई गई थी, जबकि अंदर सस्ती धातु भरी हुई थी। इस तकनीक के कारण मशीनें भी धोखा खा जाती थीं और नकली सोना आसानी से पकड़ा नहीं जाता था।
डीएसपी राजीव कुमार ने बताया कि आरोपी बेहद सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देते थे। वे शोरूम में नकली सोने के आभूषण लेकर आते और उन्हें असली बताकर बेचते थे। उदाहरण के तौर पर आरोपी 12 ग्राम की नकली अंगूठी देकर बदले में करीब 8 ग्राम असली सोना या ज्वेलरी ले लेते थे और साथ ही लगभग 4 ग्राम की कीमत नकद भी वसूल कर लेते थे। इस तरह वे हर सौदे में दोहरा लाभ कमा रहे थे।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने इसी तरीके से चार से पांच बार शोरूम को निशाना बनाया और कुल मिलाकर करीब 66 ग्राम सोने की धोखाधड़ी की। हालांकि पुलिस ने अब तक 56 ग्राम सोना बरामद कर लिया है, जो इस मामले में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
बाकी 10 ग्राम सोने को लेकर यह जानकारी सामने आई है कि उसकी रकम आरोपी द्वारा शोरूम मालिक के खाते में ट्रांसफर की गई थी, लेकिन इस दावे की अभी पुष्टि की जानी बाकी है। पुलिस इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है।
इस मामले में अभी कई अहम सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने अन्य ज्वेलर्स या लोगों को भी इसी तरह ठगा है। फिलहाल इस बारे में कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि गिरोह लंबे समय से इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहा था।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सदस्य आपस में पारिवारिक रूप से जुड़े हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई साधारण अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क है। पुलिस का मानना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे गिरोह की कार्यप्रणाली और भी स्पष्ट हो सकेगी।
इस घटना ने ज्वेलरी कारोबारियों को सतर्क रहने की जरूरत का एहसास कराया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की खरीद-फरोख्त के दौरान केवल मशीनों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसके अलावा अन्य वैज्ञानिक तरीकों से भी जांच करना जरूरी है, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।
फिलहाल करनाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और जल्द ही पूरे गिरोह को पकड़ने का दावा कर रही है। यह मामला न केवल एक बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा है, बल्कि यह भी दिखाता है कि अपराधी किस तरह नई तकनीकों और चालाकी से लोगों को ठगने के तरीके अपना रहे हैं।

