
सोशल मीडिया पर ‘IPS अफसर’ बनकर रचा जाल, CBI का डर दिखाकर युवती से ₹1.29 लाख की ठगी
बरेली जिले में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक शातिर ठग ने खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर एक युवती से दोस्ती की और फिर उसे झांसे में लेकर लाखों रुपये ऐंठ लिए। आरोपी ने न सिर्फ अपनी पहचान छिपाई, बल्कि लंदन में तैनाती और सीबीआई जांच का डर दिखाकर युवती को मानसिक रूप से दबाव में डाल दिया। इस पूरे मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र की है। पीड़ित पक्ष के एक युवक ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी बहन की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से लक्ष्य पांडेय नाम के एक युवक से हुई थी। शुरुआती बातचीत सामान्य थी, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं। इसी दौरान आरोपी ने खुद को भारतीय पुलिस सेवा का अधिकारी बताते हुए कहा कि वह एक विशेष मिशन पर लंदन में तैनात है।
आरोपी ने अपने झूठ को सच्चा साबित करने के लिए युवती से लगातार संपर्क बनाए रखा और खुद को एक जिम्मेदार और प्रभावशाली अधिकारी के रूप में पेश किया। युवती भी उसकी बातों में आ गई और उस पर भरोसा करने लगी। इसी विश्वास का फायदा उठाते हुए आरोपी ने ठगी की योजना बनाई।
29 मार्च को आरोपी ने व्हाट्सऐप पर युवती से संपर्क किया और बताया कि उस दिन उसका जन्मदिन है। इस खास मौके पर वह युवती को एक महंगा गिफ्ट भेजना चाहता है। उसने यह भी कहा कि वह खुद मिशन में व्यस्त है, इसलिए गिफ्ट अपने एक दोस्त रोहित शर्मा के माध्यम से भेज रहा है। इसके साथ ही उसने रोहित का मोबाइल नंबर भी युवती को दे दिया।
कुछ समय बाद रोहित शर्मा नाम के व्यक्ति ने युवती से संपर्क किया और बताया कि गिफ्ट का पार्सल कस्टम विभाग द्वारा रोक लिया गया है। उसने दावा किया कि पार्सल में आईफोन, हीरे का हार, डॉलर और सोने की अंगूठी जैसे महंगे सामान हैं, जिन्हें छुड़ाने के लिए कस्टम अधिकारियों को पैसे देने होंगे।
युवती को यह सब सुनकर पहले तो संदेह हुआ, लेकिन आरोपी द्वारा पहले से बनाए गए भरोसे के कारण उसने इस बात को सच मान लिया। रोहित ने उसे एक क्यूआर कोड भेजा और 30 हजार रुपये जमा करने को कहा। युवती ने बिना ज्यादा सोचे-समझे बताए गए क्यूआर कोड पर पैसे ट्रांसफर कर दिए।
इसके बाद ठगों ने अपने खेल को और खतरनाक मोड़ दिया। कुछ देर बाद रोहित ने फिर फोन कर बताया कि पार्सल पर युवती का नाम और उसके ‘पति’ के रूप में कथित आईपीएस अधिकारी लक्ष्य पांडेय का नाम होने के कारण मामला अब सीबीआई तक पहुंच गया है। उसने युवती को डराया कि अगर तुरंत पैसे नहीं दिए गए तो उसे और उसके परिवार को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
इस धमकी से युवती घबरा गई और उसने दोबारा पैसे ट्रांसफर कर दिए। रोहित ने उससे अलग-अलग किस्तों में 47,800 रुपये और फिर 73,000 रुपये जमा करवा लिए। इस तरह कुल मिलाकर युवती से ₹1,29,000 की ठगी कर ली गई।
जब लंबे समय तक न तो कोई पार्सल आया और न ही आरोपियों से कोई संतोषजनक जवाब मिला, तब युवती को शक हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुकी है। इसके बाद उसने पूरी घटना अपने परिवार को बताई। परिवार के लोग भी यह सुनकर हैरान रह गए और तुरंत पुलिस से संपर्क किया।
थानाध्यक्ष राजेश बाबू मिश्रा ने बताया कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस साइबर सेल की मदद से आरोपियों की लोकेशन और बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक सुनियोजित साइबर ठगी है, जिसमें पहले भावनात्मक जुड़ाव बनाया जाता है और फिर डर और दबाव का इस्तेमाल कर पैसे वसूले जाते हैं। ऐसे मामलों में ठग अक्सर खुद को सेना, पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों का विश्वास जीतते हैं।
यह घटना आम लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि सोशल मीडिया पर अजनबियों से दोस्ती करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए गिफ्ट या पैसों की मांग पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि कस्टम, सीबीआई या किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम पर फोन या मैसेज के जरिए पैसे मांगना पूरी तरह से फर्जी होता है। ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।
फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा कर रही है। यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।



