
एक ही पते पर कई पहचान, लाखों मतदाता लापता—यूपी की वोटर लिस्ट पर उठे गंभीर सवाल
उत्तर प्रदेश में मतदाता पुनरीक्षण अभियान के बीच वोटर लिस्ट की सच्चाई चौंकाने वाली तस्वीर पेश कर रही है। मसौदा मतदाता सूची में ऐसी गड़बड़ियां सामने आई हैं, जो न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करती हैं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करती हैं।

घर एक, नाम कई
रामपुर जिले के मिलक विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले डॉ. चंद्र प्रकाश शर्मा के घर के पते पर उनके परिवार के अलावा पांच अन्य मतदाता दर्ज पाए गए हैं। सूची में शबनम और उसके परिवार के नाम दर्ज हैं, जिनसे डॉ. शर्मा का कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि बिना सत्यापन इस तरह नाम जुड़ना गंभीर चिंता का विषय है।
इसी तरह राजधानी लखनऊ के डालीबाग क्षेत्र में एक ही परिवार के सदस्य तीन अलग-अलग मतदान केंद्रों की सूचियों में दर्ज हैं। परिवार का कहना है कि इससे मतदान के दिन भारी परेशानी होगी।
आयोग का तर्क
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार, एक ही पते पर ज्यादा नाम होना सीधे तौर पर फर्जीवाड़े का प्रमाण नहीं है। कई इलाकों में मकानों के नंबर नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति बनती है। हालांकि, यह जांच जरूरी है कि दर्ज मतदाता वास्तव में उसी क्षेत्र के निवासी हैं या नहीं।
4.46 करोड़ मतदाता कहां गए?
पुनरीक्षण 2025 की प्राथमिक सूची में पंचायत और नगर निकाय चुनावों के कुल मतदाता 17.01 करोड़ बताए गए हैं, जबकि विधानसभा मतदाता सूची में सिर्फ 12.55 करोड़ नाम दर्ज हैं।
यानी 4.46 करोड़ मतदाता रिकॉर्ड से गायब दिखाई दे रहे हैं।
चुनाव आयोग भले ही 3.62 करोड़ नए मतदाताओं को जोड़ने की बात कर रहा हो, लेकिन इसके बाद भी लाखों मतदाताओं का अंतर बना रहेगा।
राजनीति गरमाई
इस मुद्दे पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विधानसभा और पंचायत चुनावों के लिए एक ही समय में, एक ही बीएलओ द्वारा पुनरीक्षण कराया गया, फिर भी दोनों सूचियों में मतदाताओं की संख्या अलग-अलग कैसे हो सकती है?
उनका आरोप है कि विधानसभा मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद प्रदेश में मतदाताओं की संख्या करीब तीन करोड़ घट गई, जो किसी भी हाल में सामान्य नहीं है।
आखिर सवाल क्या है?
क्या यह सिर्फ तकनीकी चूक है या फिर बड़े स्तर पर गड़बड़ी?
क्या आम मतदाता का नाम सुरक्षित है?
और सबसे अहम—क्या समय रहते इन खामियों को सुधारा जा सकेगा?
इन सवालों के जवाब अब चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई तय करेगी।



