
लेह एयरपोर्ट बनेगा भारत का पहला भू-तापीय और सौर ऊर्जा से चलने वाला हवाई अड्डा, जुलाई तक नया टर्मिनल तैयार
लेह स्थित कुशोक बकुला रिनपोछे हवाई अड्डा जल्द ही एक नई पहचान हासिल करने जा रहा है। व्यापक नवीनीकरण के बाद यह देश का पहला ऐसा हवाई अड्डा होगा, जो भू-तापीय (Geothermal) और सौर ऊर्जा दोनों से संचालित होगा। नया घरेलू टर्मिनल जुलाई 2026 तक यात्रियों के लिए खोलने की तैयारी है।

करीब 640 करोड़ रुपये की लागत से चल रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चार नए विमान पार्किंग वे बनाए जा रहे हैं, जिन पर अतिरिक्त 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसे भारत में सतत और पर्यावरण-अनुकूल विमानन की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।
एयरपोर्ट निदेशक एवं महाप्रबंधक ए. उमाशंकर ने बताया कि निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है। नया टर्मिनल देश की सबसे बड़ी भू-तापीय हीटिंग और कूलिंग प्रणाली से लैस होगा, जिससे हीटिंग, कूलिंग और गर्म पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी।
समुद्र तल से लगभग 11,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह हवाई अड्डा भारत के सबसे ऊंचे एयरपोर्ट्स में से एक है। परियोजना की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी, लेकिन लद्दाख की कठिन जलवायु के कारण साल में केवल छह महीने ही निर्माण संभव हो सका। अब तक करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
18,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला नया टर्मिनल एक समय में 2,000 यात्रियों (1,000 आगमन और 1,000 प्रस्थान) को संभालने में सक्षम होगा। टर्मिनल का डिजाइन लद्दाख की पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला से प्रेरित है। निर्माण में स्थानीय सामग्रियों और कारीगरों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है।
परियोजना पूरी होने के बाद विमान पार्किंग वे की संख्या दो से बढ़कर छह हो जाएगी, जिससे प्रतिदिन 54 उड़ानों का संचालन संभव होगा। बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन, रक्षा सेवाओं और स्थानीय यात्रियों को बड़ा लाभ मिलेगा। इस परियोजना का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था और उद्घाटन भी उनके द्वारा किए जाने की संभावना है।



