
सीवर में सफाई के दौरान दो मौतों पर मानव अधिकार आयोग सख्त, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
सीवर की सफाई के दौरान दो व्यक्तियों की दर्दनाक मौत के मामले में हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने साफ कहा है कि इस तरह की घटनाएं न केवल कानून का खुला उल्लंघन हैं, बल्कि मानव गरिमा और अधिकारों पर भी गंभीर चोट हैं। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं हो जाती, तब तक इस मामले को किसी भी हाल में दबाया नहीं जाएगा।

मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा तथा सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया की संयुक्त पीठ द्वारा पारित आदेश में कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सीवर और सेप्टिक टैंकों में बिना सुरक्षा उपकरणों के मैनुअल एंट्री कराई जा रही है, जो अत्यंत चिंताजनक है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही ऐसे मामलों में मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख मुआवजा देने का निर्देश दे चुका है।
आयोग ने पुलिस अधीक्षक, हांसी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए पाया कि मामले की जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई है। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार कौन है। जबकि जिला अटॉर्नी की राय के अनुसार प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है। इसके बावजूद जांच में ढिलाई मानव जीवन के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाती है।
आयोग ने यह भी कहा कि एफआईआर नंबर 326, दिनांक 19 अक्टूबर 2025 की जांच अपेक्षित दिशा में आगे नहीं बढ़ी है। खासतौर पर दोषियों की पहचान और उनकी जवाबदेही तय करने में गंभीर कमी पाई गई है। इस पर नाराजगी जताते हुए आयोग ने जांच अधिकारी और उप पुलिस अधीक्षक (अपराध), हांसी को समस्त मूल रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष उपस्थित होने के आदेश दिए हैं।
आयोग के सख्त निर्देश
न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता में आयोग ने संबंधित विभागों को निम्न निर्देश जारी किए हैं:
उपायुक्त, हिसार को छह सप्ताह के भीतर मृतक श्रमिकों के परिजनों को दी गई राहत, मुआवजा, अंतरिम सहायता तथा पुनर्वास से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश।
नगर परिषद, हांसी (या संबंधित ग्राम पंचायत रामपुरा) को घटना की परिस्थितियों, होटल परिसर के लाइसेंस, निरीक्षण तथा मैला ढोने वालों के नियोजन का प्रतिषेध एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013 के उल्लंघन पर रिपोर्ट देने के आदेश।
पुलिस अधीक्षक, हांसी को एफआईआर की स्थिति, लगाई गई धाराओं और जांच की प्रगति से संबंधित रिपोर्ट छह सप्ताह में दाखिल करने के निर्देश।
होटल प्रबंधन को बिना सुरक्षा उपकरण, गैस जांच, रेस्क्यू व्यवस्था, ऑक्सीजन सिलेंडर एवं यंत्रीकरण के किसी भी प्रकार की मैनुअल एंट्री पर तत्काल रोक लगाने और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश।
आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने जानकारी दी कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी विस्तृत कार्यवाही रिपोर्ट अगली सुनवाई की तिथि 15 जनवरी 2026 से एक सप्ताह पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।
हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने दो टूक कहा है कि सीवर और सेप्टिक टैंकों की मैनुअल सफाई कानूनन अपराध है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होने पर संबंधित अधिकारियों और संस्थानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

