
5 महीने की तलाश, 10 हजार किमी का सफर और 500 गांवों की छानबीन: बिना किसी ठोस सुराग पुलिस ने 15 साल के किशोर को दिलाया इंसाफ
न्याय की राह भले लंबी हो, लेकिन जब इरादे मजबूत हों तो अंधेरे में भी सच की रोशनी मिल ही जाती है। बिहार के किशनगंज का रहने वाला एक 15 वर्षीय किशोर इसी का जीता-जागता उदाहरण है, जिसे अपहरण, बंधुआ मजदूरी और अमानवीय यातनाओं का शिकार बनाया गया।

किशोर स्टेशन से लापता हुआ था। बाद में उसे हरियाणा में एक डेयरी संचालक के पास बंधक बनाकर रखा गया, जहां उससे जबरन काम करवाया जाता था। इसी दौरान चारा काटने की मशीन में उसका बायां हाथ कट गया। इलाज कराने के बजाय आरोपी ने उसे हरियाणा के एक हाइवे के पास अधमरी हालत में छोड़ दिया और कटा हुआ हाथ नदी में फेंक दिया।
हाईवे किनारे मिली थी जिंदगी से जूझती हालत
पिछले साल जुलाई में पलवल के बडोली गांव के लोगों को एक नाबालिग लड़का मिला, जो बेहद कमजोर था और उसका एक हाथ नहीं था। उसने बस इतना ही बता पाया कि उसका नाम अनिल है, जो दूध देता था और जिसकी दो बेटियां—रिया और सिया—हैं। इससे ज्यादा कुछ उसे याद नहीं था।
ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस की पीसीआर टीम उसे नूंह के अस्पताल लेकर पहुंची। डॉक्टरों ने सर्जरी की तैयारी शुरू कर दी, लेकिन मानसिक सदमे और डर के कारण किशोर अस्पताल से नंगे पांव भाग गया। असहनीय दर्द के बावजूद वह पहाड़ी रास्तों से गुजरता हुआ नूंह के तौरू क्षेत्र तक पहुंचा और देर रात एक सुनसान बस स्टैंड पर रुक गया।
शिक्षक की नजर ने बदली किस्मत
अगली सुबह वह नूंह की ओर पैदल बढ़ा, जहां एक शिक्षक की नजर उस पर पड़ी। शिक्षक उसे तुरंत स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले गए और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद बिहार के किशनगंज में उसके परिजनों से संपर्क किया गया।
दर्दनाक कहानी सुनकर पुलिस भी सिहर उठी
लड़का गहरे सदमे में था और काफी समय तक अपनी आपबीती बता ही नहीं पाया। सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में उसने पलवल या नूंह पुलिस को पूरी घटना नहीं बताई। रोहतक के एक स्थानीय अखबार में उसकी हालत को लेकर खबर छपने के बाद ही बहादुरगढ़ में पुलिस हरकत में आई।
बिना लीड शुरू हुई 5 महीने की जांच
इसके बाद आरोपी की तलाश शुरू हुई। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के करीब 500 गांवों में छानबीन की गई। पांच महीने तक चली इस तलाश में पुलिस ने 10,000 किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय किया। आखिरकार, बिना किसी ठोस सुराग के भी पुलिस ने आरोपी तक पहुंचकर पीड़ित किशोर को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ी कामयाबी हासिल की।

