
*जैन संत उपेंद्र मुनि महाराज ने बताए जीवन विकास के सूत्र*
*गांव बिठमड़ा में आचार्य उपेंद्र मुनि जी महाराज के प्रवचन से गूंजा जैन स्थानक
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उकलाना, 18 मार्च।
गांव बिठमड़ा के जैन स्थानक में आज महान जैन संत आचार्य उपेंद्र मुनि जी महाराज का मंगलमय आगमन हुआ। इस शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने महाराज श्री के प्रवचनों का लाभ लिया।
महाराज उपेंद्र मुनि जी ने “जीवन विकास के सूत्र” विषय पर अपने प्रवचन में गहन विचार प्रकट किए। उन्होंने बताया कि जीवन में सफलता और आत्मिक उन्नति के लिए समझ (विवेक), जिम्मेदारी, दूरदृष्टि, गंभीरता, विश्वसनीयता, ईमानदारी और बहादुरी आवश्यक हैं।
जैन संत उपेंद्र मुनि जी ने कहा कि “समझदार वही है, जिसका विवेक जागृत है।” उन्होंने भगवान महावीर के आचारांग सूत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि सच्चे साधु का जीवन समाज को जागृत करने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि हमें अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए। अधिकारों की लड़ाई तो सभी करते हैं, लेकिन जिम्मेदारी निभाने वाले विरले होते हैं।दूरदृष्टा व्यक्ति ही अपने परिवार, समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाने में समर्थ होता है।
उन्होंने कहा कि बिना गंभीरता के कोई भी व्यक्ति समाज में अपनी पहचान नहीं बना सकता। समाज का आदर्श सदस्य वही होता है, जो विश्वासपात्र हो और अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान हो। उन्होंने कहा कि “सूरत या सीरत बुरी नहीं होती, बल्कि बुरी सोच होती है।” ईमानदार व्यक्ति दूसरों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
उन्होंने ऐतिहासिक महापुरुषों का उदाहरण देते हुए बताया कि धैर्य, साहस और जोश ही किसी व्यक्ति को सच्चा योद्धा बनाते हैं।
प्रवचन के अंत में कई लोगों ने तपस्या, उपवास और अन्य धार्मिक व्रतों को धारण करने का संकल्प लिया।
जैन समाज बिठमड़ा ने आचार्य श्री उपेंद्र मुनि जी महाराज के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि उनके प्रवचन से समूचे समाज को आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिला है।
फोटो कैप्शन: गांव बिठमड़ा के जैन स्थानक में प्रवचन करते जैन संत आचार्य उपेंद्र मुनि जी महाराज।
