
ईरान में सत्ता के खिलाफ जनाक्रोश, हिंसक प्रदर्शनों में 116 की मौत; 2,600 से ज्यादा गिरफ्तार
ईरान में धार्मिक सत्ता के खिलाफ उठी विरोध की लहर थमने का नाम नहीं ले रही है। देशभर में जारी प्रदर्शन अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुके हैं और इस दौरान हुई हिंसा में अब तक कम से कम 116 लोगों की मौत हो चुकी है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं।

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, सुरक्षाबलों ने अब तक 2,600 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। एजेंसी का दावा है कि उसके द्वारा जारी किए गए आंकड़े पूर्व आंदोलनों के दौरान भी काफी हद तक सही साबित हुए हैं।
सत्ता का सख्त रवैया
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने विरोध प्रदर्शनों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। संकेत मिल रहे हैं कि सरकार आंदोलन को दबाने के लिए और सख्त कदम उठा सकती है। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार बढ़ा, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने पर विचार कर सकता है।
इस बीच, ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आज़ाद ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें “ईश्वर का दुश्मन” माना जा सकता है। ईरानी कानून में यह आरोप बेहद गंभीर है और इसके तहत फांसी तक की सजा संभव है।
आखिर क्यों भड़का जनाक्रोश?
प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को हुई, जब ईरान की मुद्रा रियाल ऐतिहासिक गिरावट के साथ एक डॉलर के मुकाबले लगभग 14 लाख तक पहुंच गई। इससे देश में महंगाई बेकाबू हो गई।
तेहरान के बाजारों में व्यापारियों ने बढ़ती कीमतों के विरोध में दुकानें बंद कर दीं। खाने के तेल, चिकन और अन्य जरूरी सामानों की कीमतें अचानक बढ़ गईं और कई वस्तुएं बाजार से गायब हो गईं।
महंगाई, बेरोजगारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से परेशान आम नागरिक सड़कों पर उतर आए। सरकार द्वारा सब्सिडी वाले डॉलर सिस्टम को खत्म करने के फैसले ने हालात और बिगाड़ दिए। धीरे-धीरे आंदोलन आर्थिक मांगों से आगे बढ़कर राजनीतिक बदलाव की मांग में तब्दील हो गया।
फिलहाल, विरोध प्रदर्शन ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं और देश में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
