
पंचकूला निगम चुनाव में बढ़ा तनाव, स्ट्रांग रूम का कैमरा बंद होने से उठा विवाद
पंचकूला नगर निगम चुनाव के बीच सोमवार को एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पूरे चुनावी माहौल को विवादों में ला खड़ा किया। सेक्टर-14 स्थित स्टेट गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज में बनाए गए स्ट्रांग रूम का सीसीटीवी कैमरा करीब 1 घंटा 50 मिनट तक बंद रहने की खबर जैसे ही सामने आई, राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों में हड़कंप मच गया। इस स्ट्रांग रूम में चुनाव में इस्तेमाल की गई ईवीएम मशीनें सुरक्षित रखी गई हैं, जिसके चलते मामला और भी संवेदनशील हो गया।

जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार सुबह की है जब स्ट्रांग रूम की निगरानी के लिए लगाए गए कैमरे अचानक बंद हो गए। करीब दो घंटे तक कैमरे के बंद रहने की बात सामने आते ही चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे। जैसे ही इस बात की जानकारी विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को मिली, वे तुरंत मौके पर पहुंच गए और प्रशासन के खिलाफ विरोध जताने लगे।
मौके पर पहुंचे प्रत्याशियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि जहां ईवीएम मशीनें रखी गई हैं, वहां सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। प्रत्याशियों ने कहा कि कैमरे का इतने लंबे समय तक बंद रहना बेहद चिंताजनक है और इससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
कांग्रेस की मेयर पद की उम्मीदवार सुधा भारद्वाज ने इस मामले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक तकनीकी खराबी नहीं हो सकती, बल्कि इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को प्रभावित करती हैं और मतदाताओं के विश्वास को कमजोर करती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं और निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी इस मुद्दे को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अगर कैमरे में कोई तकनीकी समस्या थी, तो इसकी सूचना तुरंत सभी प्रत्याशियों को दी जानी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिससे संदेह और बढ़ गया है। प्रत्याशियों ने मांग की कि कैमरा बंद होने के दौरान की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि उस समय स्ट्रांग रूम की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की गई।
घटना के बाद स्ट्रांग रूम के बाहर भारी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता इकट्ठा हो गए। माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण होता गया और नारेबाजी शुरू हो गई। स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में लेने की कोशिश की और प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का प्रयास किया।
इसी बीच पंचकूला के विधायक चंद्रमोहन भी घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने पूरे मामले का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि चुनाव की पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं हैं। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि मामले की सच्चाई जल्द से जल्द सामने लाई जाए, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।
इलेक्शन ऑब्जर्वर और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और प्रत्याशियों से बातचीत की। उन्होंने आश्वासन दिया कि कैमरा बंद होने की घटना की जांच की जाएगी और अगर किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो कार्रवाई जरूर की जाएगी। हालांकि, इस आश्वासन के बावजूद प्रत्याशी पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने अपनी मांगों को जारी रखा।
गौरतलब है कि पंचकूला नगर निगम चुनाव पहले से ही कई विवादों के चलते चर्चा में रहा है। इससे पहले मतदाता सूची को लेकर भी राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था। कुछ दलों ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और नामों की पुनरावृत्ति के आरोप लगाए थे। ऐसे में अब स्ट्रांग रूम के कैमरे का बंद होना एक नया विवाद बन गया है, जिसने चुनावी माहौल को और अधिक गर्मा दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव के दौरान इस तरह की घटनाएं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती हैं। लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो। यदि इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या संदेह की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसका सीधा असर जनता के भरोसे पर पड़ता है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से कैमरा बंद होने के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कैमरा तकनीकी खराबी के कारण बंद हुआ या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। हालांकि, अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही सच्चाई सामने लाई जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने पंचकूला नगर निगम चुनाव को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद क्या निष्कर्ष निकलते हैं और क्या इस घटना का चुनावी परिणामों पर कोई असर पड़ता है।
फिलहाल, कैमरा बंद होने की इस घटना ने चुनावी पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब मिलना बेहद जरूरी है।



