
यमुनानगर: ईंट भट्ठे पर पानी से भरे गड्ढे में गिरा पांच साल का मासूम साहिल, रातभर खोजबीन के बाद सुबह मिला शव
यमुनानगर के खारवन रोड पर स्थित ईंट भट्ठे पर शनिवार शाम पांच साल का मासूम साहिल खेलते-खेलते पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गया। बच्चा शाम से लापता था और उसके माता-पिता रातभर उसे तलाशते रहे। रविवार सुबह भट्ठे के पास गड्ढे में उसका शव मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।

मृतक साहिल के पिता शौकीन मूल रूप से सहारनपुर जिले के शाहजहांपुर, कलुवाला, जहानपुर बेहट के रहने वाले हैं। चार माह पहले रोजी-रोटी के लिए वह अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ यमुनानगर आए थे और खारवन रोड के पास ईंट भट्ठे पर काम कर रहे थे। शनिवार शाम लगभग चार बजे साहिल घर के बाहर खेल रहा था।
खेलते-खेलते साहिल भट्ठे की ओर चला गया और गिर गया, लेकिन परिजन को इसकी भनक नहीं लगी। शाम होते ही साहिल की तलाश शुरू की गई। आसपास के इलाकों, रास्तों और भट्ठे क्षेत्र में खोजबीन की गई। सोशल मीडिया के जरिए भी गुमशुदगी की सूचना फैलाई गई, लेकिन रातभर कोई सुराग नहीं मिला।
रविवार सुबह दोबारा तलाश के दौरान भट्ठे के पास पानी से भरे गड्ढे में साहिल का हाथ दिखाई दिया। तुरंत उसे बाहर निकाला गया और सिविल अस्पताल यमुनानगर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जांच में मौत का कारण डूबना बताया गया।
स्थानीय लोग बताते हैं कि ईंट भट्ठों के आसपास बने खुले पानी के गड्ढे लंबे समय से खतरा बने हुए हैं। न तो इन्हें ढका जाता है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए जाते हैं, जिससे ऐसे हादसे लगातार हो सकते हैं।
परिवार की त्रासदी:
साहिल की मौत ने परिवार को अधूरा छोड़ दिया। पिता शौकीन की चीख और मां का बेसुध होना इस घटना की भयानकता को दर्शाता है। चार माह पहले रोजी-रोटी की तलाश में आए इस परिवार के लिए साहिल उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा था। अब यह परिवार खोखला और टूट चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भट्ठों के आसपास सुरक्षा उपायों की कमी इस हादसे की बड़ी वजह रही। बच्चों और मजदूरों के लिए ऐसे गड्ढे जीवन-मौत का खतरा बन चुके हैं।
सदर थाना जगाधरी के जांच अधिकारी सतपाल ने बताया कि साहिल पतंग उड़ाते समय भट्ठे के गड्ढे में गिर गया था। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। प्रशासन और भट्ठा संचालकों से आग्रह है कि ऐसे खतरनाक गड्ढों को ढकने और चेतावनी बोर्ड लगाने की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकें।
साहिल की मौत केवल एक मासूम बच्चे की नहीं बल्कि चार माह पहले रोजी-रोटी की तलाश में आए इस परिवार की पूरी दुनिया को ले गई। यह घटना हमें ईंट भट्ठों और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा की जरूरत की याद दिलाती है।
