
सेक्टर-38 फायरिंग कांड: ऑडियो क्लिप से पुलिस–ड्रग्स नेटवर्क पर सवाल
चंडीगढ़ के सेक्टर-38 में पुलिस पर फायरिंग की घटना से जुड़े मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस केस में आरोपी दीपक के मोबाइल फोन से मिली एक ऑडियो रिकॉर्डिंग ने पुलिस और ड्रग्स तस्करों के बीच कथित सांठगांठ की आशंका को और गहरा कर दिया है। रिकॉर्डिंग में ड्रग्स तस्कर बाला की बहू की आवाज होने का दावा किया जा रहा है, जिसने पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, दीपक के फोन से बरामद यह ऑडियो क्लिप व्हाट्सएप के जरिए भेजी गई थी। इसमें एक महिला यह कहती हुई सुनाई देती है कि “दीपक, तेरा फोन आ गया है, फोन ले जा।” हालांकि इस बातचीत में किसी पुलिसकर्मी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन जांच अधिकारियों का मानना है कि यह रिकॉर्डिंग पुलिस और ड्रग्स नेटवर्क के बीच संपर्क की कड़ी को दर्शाती है। इसी आधार पर विभाग के भीतर उच्च स्तर पर हलचल शुरू हुई।
बताया जा रहा है कि इस रिकॉर्डिंग के सामने आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने सिपाही प्रदीप और सिपाही सुरेंद्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद दोनों पुलिसकर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इस कार्रवाई ने कई सवाल भी खड़े कर दिए, क्योंकि जिस महिला की आवाज रिकॉर्डिंग में बताई जा रही है, यानी ड्रग्स तस्कर बाला की बहू, उसके खिलाफ अब तक कोई सीधी कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि जांच एजेंसियों के मुताबिक वह न केवल बाला के परिवार का हिस्सा है, बल्कि आरोपी दीपक के संपर्क में भी थी।
सूत्रों का यह भी कहना है कि फायरिंग की घटना से एक दिन पहले दीपक ड्रग्स लेने के लिए बाला के ठिकाने पर पहुंचा था। उस समय बाला जेल में बंद था और वहां उसका बेटा मौजूद था। दीपक ने क्रैक बॉल (ड्रग्स) की मांग की, लेकिन बाला के जेल में होने के कारण उसे नशा नहीं मिल सका। दीपक ने कथित तौर पर कहा था कि किसी भी तरह से इंतजाम कर दिया जाए और वह दोबारा आएगा। अगले दिन जब वह फिर से ड्रग्स लेने पहुंचा, उसी दौरान सेक्टर-38 में फायरिंग की घटना हुई।
इस मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब जिला क्राइम सेल में पूछताछ के बाद दीपक की डिस्क्लोजर रिपोर्ट तैयार की गई। इस रिपोर्ट के आधार पर सेक्टर-39 थाने में एफआईआर दर्ज की गई। रिपोर्ट में सिपाही प्रदीप का नाम दर्ज था, लेकिन सिपाही सुरेंद्र का नाम उसमें शामिल नहीं किया गया। दीपक ने बयान में बताया था कि प्रदीप के साथ एक और पुलिसकर्मी मौजूद था, जिसका नाम वह नहीं जानता था। इसके अलावा उसने एक तीसरे पुलिसकर्मी का भी जिक्र किया, जो ट्रैक सूट पहने हुए था।
दीपक के अनुसार, एक घटना के दौरान दो पुलिसकर्मी वर्दी में गाड़ी में बैठे थे, जबकि तीसरा सादे कपड़ों में था। यह खुलासा जांच को और पेचीदा बना रहा है, क्योंकि अब तक पुलिस उस तीसरे पुलिसकर्मी की पहचान नहीं कर पाई है। यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर मौके पर कितने पुलिसकर्मी थे और किस भूमिका में थे।
पूछताछ में दीपक ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप भी लगाए। उसने दावा किया कि फायरिंग की घटना से पहले सिपाही प्रदीप ने उसे दो बार पकड़कर छोड़ा था। पहली बार उससे 35 हजार रुपये नकद, क्रैक बॉल और मोबाइल फोन छीन लिया गया था। दूसरी बार उससे सोने की चेन ले ली गई थी। दोनों ही मौकों पर उसे बिना किसी कानूनी कार्रवाई के छोड़ दिया गया। दीपक का यह भी कहना है कि बाद में ड्रग्स तस्कर बाला के दबाव में उसका मोबाइल फोन वापस दिलवाया गया था।
इन आरोपों के बाद पुलिस ने प्रदीप और सुरेंद्र को हिरासत में लेकर तीन दिन के रिमांड पर पूछताछ की। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद दोनों को जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया।
वहीं, अदालत में पेशी के दौरान दोनों पुलिसकर्मियों ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि वे दीपक को पहले से नहीं जानते थे और फायरिंग की घटना से पहले कभी उससे मुलाकात नहीं हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे दीपक को पकड़ने की कोशिश न करते तो फायरिंग में उनकी जान भी जा सकती थी। उनका दावा है कि दीपक एक वांटेड अपराधी था और उसी के बयान के आधार पर उन्हें फंसाया गया है।
प्रदीप और सुरेंद्र का यह भी कहना है कि अगर उनके खिलाफ आरोप थे, तो पहले विभागीय जांच होनी चाहिए थी। जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जा सकती थी, लेकिन सीधे एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लेना जल्दबाजी है।
फिलहाल सेक्टर-38 फायरिंग मामला पुलिस, ड्रग्स तस्करों और अपराधियों के बीच कथित गठजोड़ की ओर इशारा कर रहा है। ऑडियो रिकॉर्डिंग, दीपक के बयान और पुलिसकर्मियों के इनकार के बीच सच्चाई क्या है, यह आने वाली जांच से ही साफ हो पाएगा। इस केस पर अब पूरे शहर की नजर टिकी हुई है कि आगे और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और कानून किस दिशा में आगे बढ़ता है।


