
संभल में वसूली कांड: कबाड़ी से रिश्वत लेने के आरोप में एसओजी टीम पर कार्रवाई, आठ पुलिसकर्मी निलंबित
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। कथित अवैध वसूली और दबाव बनाने के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की पूरी टीम को निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई में टीम प्रभारी सहित कुल आठ पुलिसकर्मी शामिल हैं।
जिला पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मियों को निलंबित कर दिया गया।

कबाड़ लेकर जा रहे पिता-पुत्र को रोका गया
घटना 2 फरवरी की रात की बताई जा रही है। मुरादाबाद जिले के बिलारी क्षेत्र के रहने वाले कबाड़ी जफरूद्दीन अपने बेटे के साथ बाइक से कबाड़ लेकर संभल की ओर जा रहे थे। बताया जाता है कि वे मोबाइल प्लेट से जुड़ी धातु का सामान लेकर संभल के लाडम सराय इलाके में व्यापारिक काम से जा रहे थे।
रास्ते में एसओजी टीम ने उन्हें रोक लिया और पूछताछ के नाम पर पुलिस चौकी चौधरी सराय ले गई। आरोप है कि वहां दोनों को काफी देर तक रोके रखा गया और बाद में छोड़ने के लिए पैसे की मांग की गई।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि स्थानीय बिचौलियों के हस्तक्षेप के बाद मामला निपटाया गया और लगभग 30 हजार रुपये लेकर उन्हें छोड़ा गया।
सामान रोकने और फिर पैसे मांगने का आरोप
घटना यहीं समाप्त नहीं हुई। शिकायत में कहा गया कि पुलिसकर्मियों ने मोबाइल प्लेट से निकली धातु अपने पास रोक ली। अगले दिन जब पिता-पुत्र ने टीम से संपर्क कर सामान वापस करने की बात कही, तो उन पर अतिरिक्त रकम देने का दबाव बनाया गया।
बताया गया कि धातु से भरे कट्टे को लौटाने के बदले 40 हजार रुपये मांगे गए, जबकि उस धातु की अनुमानित कीमत भी लगभग इतनी ही थी। इसके बाद पीड़ित ने उच्च अधिकारियों से शिकायत की, जिस पर पुलिस प्रशासन हरकत में आया।
जांच के बाद हुई कार्रवाई
शिकायत मिलने पर पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच कराई। प्रारंभिक जांच में ही आरोपों की पुष्टि हो गई, जिसके बाद टीम पर कार्रवाई तय मानी गई।
निलंबित किए गए कर्मियों में एसओजी प्रभारी उपनिरीक्षक मोहित चौधरी के अलावा हेड कांस्टेबल कुलवंत और अरशद तथा कांस्टेबल अजनबी, आयुष, विवेक, बृजेश और हिरेश शामिल हैं।
एसपी ने स्पष्ट किया कि विभाग में भ्रष्टाचार या अनुशासनहीनता के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस की छवि बनाए रखने के लिए कठोर निर्णय लेना जरूरी होता है।
नई टीम से सुधार की उम्मीद
घटना के बाद एसओजी की जिम्मेदारी नए प्रभारी बोबिंद्र शर्मा को सौंपी गई है। अधिकारियों का मानना है कि नई टीम से जांच कार्यों में पारदर्शिता और गति आएगी।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि एसओजी जैसी विशेष इकाइयों की भूमिका गंभीर अपराधों के खुलासे और अपराधियों की गिरफ्तारी में अहम होती है। ऐसे में यदि उन पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लगें, तो यह पूरे तंत्र की विश्वसनीयता को प्रभावित करता है।
पहले भी सवालों में रही टीम
जानकारी के अनुसार, निलंबित टीम का प्रदर्शन पहले भी चर्चा में रहा था। कई गंभीर मामलों में अपेक्षित सफलता न मिलने से इसकी कार्यशैली पर पहले ही सवाल उठते रहे थे।
जुनावई क्षेत्र में एक राजनीतिक कार्यकर्ता की हत्या के आरोपी को टीम पकड़ नहीं सकी थी और वह बाद में अदालत में आत्मसमर्पण कर गया। इसी तरह धनारी क्षेत्र के दोहरे हत्याकांड में भी आरोपी लंबे समय तक फरार रहा।
कैलादेवी क्षेत्र में एक सात वर्ष की बच्ची के लापता होने के मामले में भी टीम कोई ठोस सुराग नहीं जुटा सकी थी। इन घटनाओं ने पहले से ही टीम की दक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा रखा था, जबकि ताजा मामला भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा हुआ है।
विभाग की छवि सुधारने की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस विभाग के लिए ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी होती है। इससे जनता के बीच यह संदेश जाता है कि गलत आचरण करने वालों को संरक्षण नहीं मिलेगा।
प्रशासन का कहना है कि निलंबन केवल प्रारंभिक कार्रवाई है और विभागीय जांच आगे भी जारी रहेगी। यदि आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं, तो संबंधित कर्मियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
पारदर्शिता पर जोर
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून का पालन करवाने वाली एजेंसी को स्वयं भी कानून के दायरे में रहना होता है। ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाना जरूरी है ताकि विभाग में जवाबदेही बनी रहे।
संभल की यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि व्यापक प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी एक चेतावनी मानी जा रही है। यह दिखाता है कि शिकायतें यदि सही तरीके से उठाई जाएं तो कार्रवाई संभव है।



