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पश्चिमी विक्षोभ का असर: पहाड़ों पर बर्फबारी, मैदानी इलाकों में बारिश और ओलावृष्टि की संभावना, 20 मार्च तक बदला रहेगा मौसम

देश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। खासतौर पर उत्तर भारत के राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण मौसम का मिजाज बदल गया है। पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी हो रही है, जबकि मैदानी क्षेत्रों में बारिश, तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि देखने को मिल रही है। मौसम विभाग का कहना है कि 18 से 20 मार्च के बीच यह असर और अधिक स्पष्ट दिखाई देगा।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय हुआ नया पश्चिमी विक्षोभ पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम को प्रभावित कर रहा है। इसके कारण जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी हो रही है। वहीं पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बादल छाने के साथ हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी है।

बीते 24 घंटों के दौरान देश के कई हिस्सों में मौसम का बदला हुआ रूप देखने को मिला। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर राज्यों के कई स्थानों पर बारिश और ओलावृष्टि हुई। कुछ जगहों पर तेज हवाएं भी चलीं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई और लोगों को फिर से ठंड का अहसास होने लगा।

पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में भी मौसम का असर काफी ज्यादा देखने को मिला। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम और मेघालय के कई इलाकों में भारी बारिश दर्ज की गई। यहां कुछ स्थानों पर 7 से 20 सेंटीमीटर तक वर्षा हुई। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम में भी कई जगहों पर 7 से 11 सेंटीमीटर तक बारिश रिकॉर्ड की गई।

पश्चिम बंगाल के कोलकाता और मालदा जिलों में तेज हवाओं का भी असर देखा गया। यहां हवा की रफ्तार 50 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई, जिससे कई जगहों पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी के कारण कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित हुआ है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगातार बर्फ गिरने से सड़कें बंद हो गईं और यातायात बाधित हो गया। मनाली-लेह मार्ग पर भारी बर्फबारी के कारण करीब 1,500 वाहनों में सवार लगभग 10 हजार पर्यटक और स्थानीय लोग रास्ते में फंस गए थे।

हालांकि प्रशासन और राहत दलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इन सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सभी पर्यटकों और स्थानीय लोगों को रोहतांग टनल के रास्ते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। बताया जा रहा है कि रविवार रात इन लोगों को कड़ाके की ठंड के बीच अपनी गाड़ियों में ही रात बितानी पड़ी थी।

जम्मू-कश्मीर में भी भारी बर्फबारी के कारण कई लोग फंस गए थे। किश्तवाड़ जिले के सिंथन टॉप इलाके में रविवार रात अचानक हुई भारी बर्फबारी के चलते कई वाहन रास्ते में ही रुक गए। भारतीय सेना ने तुरंत राहत अभियान शुरू किया और करीब 235 लोगों तथा 38 वाहनों को सुरक्षित बाहर निकाला।

सेना की व्हाइट नाइट कोर के जवानों ने न केवल लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया बल्कि उन्हें गर्म भोजन, पीने का पानी और अस्थायी ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध कराई। इस राहत अभियान की स्थानीय लोगों ने काफी सराहना की।

इसी दौरान जम्मू-कश्मीर के डांगदुरु इलाके में भूस्खलन की घटना भी सामने आई है। इस हादसे के बाद एक व्यक्ति लापता हो गया है। राहत और बचाव दल लगातार उसकी तलाश कर रहे हैं, लेकिन सोमवार तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया था।

उत्तराखंड में भी मौसम के अचानक बदलने से ठंड एक बार फिर लौट आई है। राज्य के सीमांत जिलों में रविवार रात से ही मौसम में बदलाव देखने को मिला। ऊंचाई वाले इलाकों में जहां भारी हिमपात हुआ, वहीं निचले क्षेत्रों में तेज बारिश और गरज के साथ बादल छाए रहे।

मुनस्यारी क्षेत्र की पहाड़ियां जैसे खलिया टॉप, पंचाचूली, हंसलिंग, नाग्निधुरा और छिपलाकेदार पूरी तरह बर्फ की चादर से ढक गई हैं। बर्फबारी के बाद यहां का प्राकृतिक दृश्य बेहद सुंदर हो गया है, जिससे पर्यटक भी आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि स्थानीय लोगों को ठंड और सड़क बंद होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले दो से तीन दिनों तक उत्तर भारत के कई हिस्सों में मौसम अस्थिर बना रहेगा। इस दौरान गरज के साथ बारिश, तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना है। इसके कारण तापमान में हल्की गिरावट बनी रह सकती है।

मौसम विभाग ने खासतौर पर किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इस समय कई क्षेत्रों में गेहूं और अन्य रबी फसलें पकने की अवस्था में हैं। ऐसे में तेज हवाएं और ओलावृष्टि फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखें और जरूरत पड़ने पर फसलों की सुरक्षा के उपाय करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि 20 मार्च तक इस पश्चिमी विक्षोभ का असर बना रहेगा। इसके बाद मौसम धीरे-धीरे सामान्य हो सकता है और तापमान में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

कुल मिलाकर देश के कई हिस्सों में मौसम का यह बदलाव लोगों के लिए राहत और चुनौती दोनों लेकर आया है। जहां एक ओर बारिश और ठंडी हवाओं से गर्मी से थोड़ी राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर बर्फबारी और तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

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