
ग्लोबल निवेशकों की पहली पसंद बना भारत: तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी, मजबूत सेक्टर और सुधारों से खुलते नए अवसर
दुनिया की बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच भारत ने खुद को एक भरोसेमंद और आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित कर लिया है। जहां एक ओर कई बड़े वैश्विक बाजार अस्थिरता, महंगाई और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रहे हैं, वहीं भारत लगातार अपनी आर्थिक मजबूती और विकास दर के दम पर निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। हालिया सर्वेक्षणों में यह साफ दिखाई देता है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत अब निवेश के लिए सबसे पसंदीदा देशों में शामिल हो चुका है।

एक प्रमुख वैश्विक कंसल्टिंग सर्वे के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 50 से अधिक संस्थागत निवेशकों में से लगभग एक-तिहाई ने भारत को अपना पहला निवेश विकल्प माना है। इतना ही नहीं, तीन-चौथाई से ज्यादा निवेशकों ने भारत को अपने शीर्ष तीन पसंदीदा बाजारों में शामिल किया है। यह रुझान बताता है कि भारत केवल एक उभरता हुआ बाजार नहीं रहा, बल्कि अब वह निवेश के लिहाज से एक स्थिर और दीर्घकालिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
भारत की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में कुल निवेश में उसकी हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है। कुछ वर्षों पहले तक जहां यह हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 21 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। यह उछाल उस समय आया है जब अन्य कई देशों में निवेश की गति धीमी पड़ी है। इस तुलना में भारत ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए निवेशकों का विश्वास जीता है।
निजी इक्विटी और वेंचर कैपिटल के क्षेत्र में भी भारत ने जबरदस्त प्रगति की है। 2016 से 2020 के बीच के मुकाबले 2021 से 2025 की अवधि में इन निवेशों में करीब 1.6 गुना की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुल निवेश का आंकड़ा 207 अरब डॉलर तक पहुंच जाना इस बात का संकेत है कि भारत में स्टार्टअप संस्कृति और नवाचार आधारित उद्योगों को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है।
अगर निवेश के प्रमुख क्षेत्रों पर नजर डालें, तो टेक्नोलॉजी सेक्टर सबसे आगे दिखाई देता है। डिजिटल इंडिया और तेजी से बढ़ते इंटरनेट उपयोग ने इस क्षेत्र को अत्यधिक आकर्षक बना दिया है। कुल निवेश का लगभग 29 प्रतिशत हिस्सा टेक्नोलॉजी कंपनियों में लगाया गया है। इसके बाद वित्तीय सेवाओं का क्षेत्र आता है, जिसमें लगभग 15 प्रतिशत निवेश हुआ है। वहीं आईटी सेवाएं भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं और इसमें 13 प्रतिशत निवेश दर्ज किया गया है।
इन सेक्टरों की मजबूती का मुख्य कारण भारत की बड़ी और युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उपभोक्ता मांग में लगातार वृद्धि है। यही कारण है कि वैश्विक निवेशक भारत में दीर्घकालिक अवसर देख रहे हैं।
एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह देखने को मिला है कि भारत में निवेश का बड़ा हिस्सा अब निजी बाजारों में जा रहा है। कुल निवेश का लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स में लगाया जा रहा है। इसका मतलब है कि निवेशक अब शुरुआती और विकास के चरण में मौजूद कंपनियों पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं। यह ट्रेंड भारत के उद्यमशीलता माहौल को और मजबूत करता है।
यूरोपीय निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भी भारत की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल निवेश का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा यूरोप से आ रहा है। इससे यह साफ होता है कि भारत अब केवल एशियाई निवेशकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पश्चिमी देशों के लिए भी एक प्रमुख निवेश केंद्र बन चुका है।
आने वाले समय को लेकर भी निवेशकों का रुख सकारात्मक बना हुआ है। आधे से अधिक निवेशकों ने संकेत दिया है कि वे भारत में अपने निवेश को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। इसके विपरीत, बहुत ही कम निवेशक ऐसे हैं जो निवेश घटाने की सोच रहे हैं। यह स्थिति भारत की आर्थिक स्थिरता और नीतिगत दिशा पर विश्वास को दर्शाती है।
हालांकि, इन सकारात्मक पहलुओं के बीच कुछ चुनौतियां भी हैं, जो भारत की निवेश यात्रा को प्रभावित कर सकती हैं। सबसे बड़ी चुनौती मुद्रा जोखिम की है। विदेशी निवेशकों के लिए रुपये की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव एक चिंता का विषय रहता है। इसके अलावा, कर प्रणाली की जटिलता भी कई बार निवेश के फैसलों को प्रभावित करती है।
व्यापार करने में आने वाली प्रक्रियात्मक कठिनाइयां, अनुबंधों को लागू करने में देरी और कुछ क्षेत्रों में निवेश का अत्यधिक केंद्रित होना भी निवेशकों के लिए परेशानी का कारण बनता है। इन मुद्दों के कारण कई बार निवेश का प्रवाह धीमा पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत इन चुनौतियों पर प्रभावी तरीके से काम करता है, तो वह वैश्विक निवेश के क्षेत्र में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। पूंजी बाजार में सुधार, नियमों को सरल बनाना और पारदर्शिता बढ़ाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होंगे।
सरकार द्वारा किए जा रहे आर्थिक सुधार और योजनाएं भी इस प्रक्रिया को गति दे रही हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, डिजिटलीकरण और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के प्रयास भारत को एक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बना रहे हैं। इसके अलावा, स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां भी निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं।
कुल मिलाकर, भारत आज उस मुकाम पर पहुंच चुका है जहां वह वैश्विक निवेश मानचित्र पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रहा है। निवेशकों का भरोसा, मजबूत आर्थिक आधार और भविष्य की संभावनाएं इसे एक आकर्षक गंतव्य बनाती हैं। अगर चुनौतियों का समाधान समय पर किया जाता है, तो भारत आने वाले वर्षों में न केवल एशिया-प्रशांत, बल्कि पूरी दुनिया में निवेश का केंद्र बन सकता है।
