
कोरबा में हैरान करने वाली वारदात, 40 साल पुराना लोहे का पुल रातोंरात हुआ गायब
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने आम लोगों के साथ-साथ प्रशासन को भी चौंका दिया है। जिले के ढोढ़ीपारा इलाके में हसदेव बायीं नहर पर बना करीब 40 साल पुराना लोहे का पुल एक ही रात में चोरी हो गया। यह पुल लगभग 70 फीट लंबा और करीब 10 टन वजनी था, जिसे रोजाना स्थानीय लोग पैदल आवागमन के लिए इस्तेमाल करते थे। सुबह जब लोग नहर पार करने पहुंचे, तो वहां पुल की जगह खाली नहर देखकर सभी हैरान रह गए।

इस पुल के गायब होने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी मच गई। लोगों को समझ ही नहीं आ रहा था कि इतना भारी-भरकम पुल आखिर चोरी कैसे हो सकता है। स्थानीय निवासियों के लिए यह पुल बेहद अहम था, क्योंकि इसके जरिए वे रोजमर्रा के कामों के लिए आवाजाही करते थे। पुल न होने से अब लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
घटना की जानकारी मिलते ही वार्ड नंबर 17 के पार्षद लक्ष्मण श्रीवास ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और मौके का मुआयना किया। कोरबा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने बताया कि जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस चोरी की वारदात को अंजाम देने में करीब 15 लोग शामिल थे। चोरों ने पूरी योजना के साथ इस घटना को अंजाम दिया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पहले इलाके की रेकी की और फिर रात के अंधेरे का फायदा उठाया। गैस कटर की मदद से पुल को टुकड़ों में काटा गया, ताकि उसे आसानी से ले जाया जा सके। इसके बाद कटे हुए लोहे को नहर के आसपास छिपा दिया गया और बाद में कबाड़ के रूप में बेचने की तैयारी की गई।
अब तक पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान इन आरोपियों ने पुल चोरी कर उसे कबाड़ में बेचने की बात कबूल की है। पुलिस के अनुसार इस गिरोह का मास्टरमाइंड मुकेश साहू और असलम खान है, जो फिलहाल फरार हैं। इनके अलावा करीब 10 अन्य आरोपी भी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जिनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
सीएसईबी पुलिस चौकी प्रभारी भीमसेन यादव ने बताया कि कार्रवाई के दौरान नहर में छिपाकर रखे गए करीब सात टन लोहे को बरामद कर लिया गया है। इसके साथ ही चोरी में इस्तेमाल किए गए वाहन भी जब्त किए गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बाकी बचा हुआ लोहा कहां बेचा गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा और चिंता दोनों देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि अगर सार्वजनिक संपत्ति इस तरह चोरी हो सकती है, तो सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है। ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने प्रशासन से जल्द पुल के निर्माण और इलाके में सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का भी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है और फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने का दावा कर रही है। 10 टन के पुल की चोरी की यह घटना पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।



