
*व्हाउट हाउस ने बदली 111 साल पुरानी परंपरा, अब ट्रंप जिस पत्रकार को चाहेंगे वही पूछ पाएगा सवाल!
*व्हाउट हाउस ने बदली 111 साल पुरानी परंपरा, अब ट्रंप जिस पत्रकार को चाहेंगे वही पूछ पाएगा सवाल!*
*व्हाउट हाउस ने बदली 111 साल पुरानी परंपरा, अब ट्रंप जिस पत्रकार को चाहेंगे वही पूछ पाएगा सवाल!*
यह बड़ा बदलाव क्यों किया गया है, इसके कारण का अभी नहीं पता, जानकारों की माने तो, व्हाइट हाउस ने हाल ही में प्रेस ब्रीफिंग की परंपरा में बड़ा बदलाव किया है, जिसके तहत अब प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट यह तय करेंगी कि कौन से पत्रकार राष्ट्रपति ट्रंप से सवाल पूछ सकते हैं। इससे पहले, यह जिम्मेदारी व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन (WHCA) के पास थी, जो पत्रकारों के चयन में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करती थी। लेकिन अब प्रशासन ने यह अधिकार अपने पास ले लिया है, जिससे मीडिया स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं।
इस बदलाव के तहत, व्हाइट हाउस ने प्रमुख समाचार एजेंसियों जैसे एपी, रॉयटर्स और ब्लूमबर्ग को प्रेस पूल से बाहर कर दिया है। इसके बजाय, प्रशासन ने छोटे और वैकल्पिक मीडिया आउटलेट्स को अधिक प्राथमिकता देना शुरू किया है। कैरोलिन लेविट ने इस नीति को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि यह आम जनता को अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान करेगा।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि यह कदम प्रेस स्वतंत्रता पर हमला है। एपी ने एक संघीय अदालत से अपील की है कि वह व्हाइट हाउस को आदेश दे कि वह पत्रकारों के चयन में पारदर्शिता बनाए रखे, जैसा कि पहले था।
इस बदलाव के बाद, पत्रकारों के लिए सवाल पूछने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी हो सकती है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है।
बदलाव के बाद मीडिया समाज की प्रतिक्रिया का अभी इंतजार है
