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Karnal News: करनाल जिले की 28 जनवरी की बड़ी खबरें, पढ़िए एक क्लिक में

Karnal News: करनाल जिले की 28 जनवरी की बड़ी खबरें, पढ़िए एक क्लिक में

पीएम-विश्वकर्मा योजना से दस्तकारों के जीवन स्तर में होगा सुधार: उत्तम सिंह

करनाल, 28  जनवरी।   उपायुक्त उत्तम सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा श्रमिकों का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए पीएम-विश्वकर्मा योजना चलाई जा रही है ।  इस योजना में 18 हस्त व्यवसायों को शामिल किया गया है। इसलिए इस योजना में जिला के अधिक से अधिक नागरिकों को लाभ मिलें ताकि सरकार का अन्त्योदय का लक्ष्य पूरा हो सके।
उपायुक्त ने कहा कि योजना का मुख्य उद्देश्य दस्तकारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना है। योजना से गांवों और शहरों के उन कुशल कारीगरों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जो अपने हाथों से काम करके अपना जीवनयापन करते हैं। उन्होंने बताया कि पंजीकरण के बाद इन कारीगरों को जिला में स्थापित किए गए कौशल विकास केंद्रों में पांच दिन की ट्रेनिंग करवाई जाएगी और टूल किट खरीदने के लिए 15 हजार रुपए का अनुदान दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि योजना का गांव स्तर पर पूरा प्रचार किया जाए ताकि अधिक से  अधिक लोग इसका फायदा उठा कर अपने जीवन स्तर में बदलाव ला सके। उन्होंने बताया कि इस योजना में नाव बनाना, शस्त्रागार, लुहार, हथौड़ा व लोहे के औजार बनाना, ताला बनाना, सुनार, कुंभकार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी, सुथार, चटाई बनाना, गुडिया व खिलौने बनाना, बारबर, धोबी, दर्जी और मछली  पकड़ने के जाल बनाने का काम शामिल है। योजना में विभिन्न व्यवसायों से जुड़े दस्तकारों को प्रशिक्षण, टूल किट व बैंक लोन  की सुविधा प्रदान की जाती है। योजना में कारीगरों को पहले पीएम विश्वकर्मा.जीओवी.इन पोर्टल पर पंजीकरण करवाना होगा।
उन्होंने कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत, कारीगरों और शिल्पकारों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाण-पत्र और पहचान-पत्र के माध्यम से मान्यता प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत पांच प्रतिशत की रियायती ब्याज दर के साथ एक लाख रुपये (पहली किस्त) और दो लाख रुपये (दूसरी किस्त) तक ऋण सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के तहत कौशल उन्नयन, टूलकिट प्रोत्साहन, डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन और विपणन सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के लागू होने से श्रमिकों के बच्चों को मिलने वाली सहायता में भी वृद्धि हुई है। योजना का लाभ लेने के लिए कारीगरों को पोर्टल पर पंजीकरण करवाना जरूरी है।

पीएम-विश्वकर्मा योजना से श्रमिकों के बच्चों को इस प्रकार मिलता है लाभ।

उपायुक्त उत्तम सिंह ने कहा कि पीएम-विश्वकर्मा योजना के तहत श्रमिक की बेटी के लिए जो कॉलेज पढ़ती है, उसको इलेक्ट्रिक स्कूटी के लिए 50 हजार रूपए तथा श्रमिक को साइकिल खरीदने के लिए पांच हजार रुपए दिए जाएंगे। इसी प्रकार से महिला श्रमिक को सिलाई मशीन खरीदने के लिए 4500 रुपए, श्रमिक के स्कूल जाने वाले बच्चों को  9, 10 वीं तथा आईटीआई व डिप्लोमा के छात्र को 10 हजार रुपए दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि 11वीं व 12वीं  के छात्र को 12 हजार रुपए दिए जाएंगे। इसी प्रकार से बीए करने वाले विद्यार्थियों, पॉलिटेक्निक, डिप्लोमा, सीए, एएनएम, जीएनएम, अंडर ग्रेजुएट डिप्लोमा, पर छात्र को 15 हजार रुपए लाभ दिया जाएगा। फार्मेसी व इंजीनियरिंग डिग्री वाले छात्र को 20 हजार रूपए तथा एमबीबीएस, बीएएमएस व बीडीएस करने वाले छात्र-छात्रा को 21 हजार रुपए वार्षिक लाभ इस योजना के तहत दिया जाता है।  इस योजना के तहत, विश्वकर्मा भाई-बहनों को 3 लाख तक का बिना गारंटी ऋण की सुविधा, 15,000 तक की टूलकिट सहायता, कौशल विकास के लिए ट्रेनिंग के साथ ही प्रतिदिन 500 स्टाइपेंड, उत्पादों के लिए क्वालिटी सर्टिफिकेशन, ब्रांडिंग और मार्केटिंग सहायता सुनिश्चित कर उन्हें आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बना रही है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के माध्यम से केंद्र सरकार विश्वकर्मा भाई-बहनों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें विकास की मुख्य धारा से जोडऩे की दिशा में प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।

निराश्रित बच्चों के लिए पेंशन योजना, सरकार हर माह दे रही 1850 रुपये की वित्तीय सहायता :उपायुक्त

करनाल, 28 जनवरी।      उपायुक्त उत्तम सिंह ने बताया कि जिला में 21 वर्ष तक की आयु का बच्चा जो अपने माता-पिता की सहायता अथवा देखभाल से उनकी मृत्यु होने के कारण, अपने पिता के घर से पिछले 2 वर्ष की अवधि से अनुपस्थित होने के कारण अथवा माता-पिता के लम्बी सजा, जोकि एक वर्ष से कम न हो या मानसिक व शारीरिक अक्षमता के कारण वंचित हो जाते हैं और जिनके माता-पिता, अभिभावक की सभी साधनों से वार्षिक आय दो लाख से अधिक नहीं है। वह बच्चा हरियाणा सरकार के सामाजिक न्याय एवं सहकारिता विभाग द्वारा दी जा रही वित्तीय सहायता का लाभ पात्र है। उन्होंने बताया कि उपरोक्त विभाग द्वारा एक परिवार में दो बच्चों तक 1850 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा पेंशन प्रदान की जा रही है।
उन्होंने बताया कि उपरोक्त स्कीम का लाभ लेने के इच्छुक व्यक्ति के पास बेसहारा होने का प्रमाण पत्र, बच्चों के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र व आवेदक का 5 वर्ष या उससे अधिक की अवधि का हरियाणा राज्य में निवासी होने का दस्तावेज जैसे कि फोटोयुक्त वोटर कार्ड या राशन कार्ड आदि की स्वयं सत्यापित फोटो प्रति सहित परिवार पहचान पत्र होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि आवेदक के पास यदि उपरोक्त दस्तावेजों में से कोई दस्तावेज नहीं है, तो वह कोई अन्य प्रमाण पत्र सहित 5 वर्ष से हरियाणा में रिहायश का हलफनामा दे सकता है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चे के माता-पिता या अभिभावक किसी भी सरकार द्वारा पारिवारिक पेंशन प्राप्त कर रहा है, वो उपरोक्त स्कीम का लाभ नहीं ले पाएंगे। स्कीम का लाभ लेने के इच्छुक प्रार्थी अपने नजदीकी अंत्योदय सरल केंद्र, अटल सेवा केंद्र सहित सीएससी केंद्र पर आवेदन कर सकते हैं।

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति प्रोग्राम के तहत जिला समन्वय समिति की बैठक का आयोजन

करनाल, 28 जनवरी।   राष्ट्रीय कृमि मुक्ति प्रोग्राम को सफल बनाने के लिए मंगलवार को जिला समन्वय समिति की बैठक का आयोजन  अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय में किया गया। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त यश जालुका ने की । बैठक का मुख्य उद्देश्य 1-19 वर्ष के सभी बच्चों एवं 20 से 24 वर्ष के आयु की सभी महिलाओं जो गर्भवती न हो तथा स्तनपान न करवा रही हो  को कृमि मुक्त करना है।
इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ लोकवीर  ने बताया कि स्कूल हेल्थ कार्यक्रम के अंतर्गत, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति प्रोग्राम के तहत 11 फरवरी 2025 को जिले के 1-19 वर्ष के लगभग 4.9 लाख बच्चों को ए.एन.एम, आशा वर्कर एवं आंगनवाड़ी वर्कर के माध्यम से एल्बेंडाजोल की गोली घर-घर जाकर नि:शुल्क खिलाई जाएगी तथा जो बच्चे किसी कारणवश छूट जाएंगे उन्हें 18 फरवरी 2025 को  मोप अपरॉउड के दौरान एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि बच्चों में खून की कमी का एक मुख्य कारण कृमि (पेट के कीड़े) होते है, जिस कारण बच्चों के विकास में कमी आ जाती है, इसलिए अपने घरों व आस-पास के इलाके में साफ -सफाई का ध्यान रखें, खाने-पीने की चीजों को ढक कर रखे, फल व सब्जियों को उपयोग से पहले साफ  पानी से धोएं, साफ  पानी पीए, मिट्टी में खेलते व चलते समय जूते या चप्पल पहनें, खुले में शौच न करें, हमेशा शौचालय का प्रयोग करें एवं खाना खाने से पहले व शौच जाने के बाद हाथ साबुन से अवश्य साफ करें ताकि कृमि रोग से बचा जा सके। इसके अलावा इस प्रोग्राम के दौरान जिले में  20-24 वर्ष की विवाहित महिलाएं जो गर्भवती न हो, व स्तनपान न करवा रही हो, उन सभी को भी निशुल्क एल्बेंडाजोल की गोली घर-घर जाकर खिलाई जाएगी।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति प्रोग्राम के नोडल ऑफिसर डा. केशव वधवा  ने बताया कि यह प्रोग्राम पहले सभी स्कूल व आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से किया जाता था परन्तु कोरोना महामारी के चलते इस बार ए.एन.एम, आशा वर्कर व आंगनबाड़ी वर्कर की सहायता से घर-घर जाकर बच्चों को कृमि मुक्त करने हेतु गोली खिलाई जायेगी। उन्होंने कृमि संक्रमण के लक्षण व एल्बेंडाजोल की गोली खाने के फायदे भी बताए।
कृमि (पेट के कीड़े) संक्रमण के लक्षण
उन्होंने बताया कि गंभीर कृमि संक्रमण से कई लक्षण उत्पन्न हो सकते है जैसे पेट दर्द,जी मिचलाना, उल्टी, दस्त, कमजोरी, वजन कम होना, रोग प्रतिरोधक शक्ति का कम होना और पढ़ाई में ध्यान न लगना। बच्चें में कीड़े की मात्रा जितनी अधिक होगी, संक्रमण के लक्षण उतने अधिक होंगे, बच्चों में खून की कमी (अनीमिया) तथा बच्चों के विकास में बाधा आना इसके मुख्य लक्षण हैं।
एल्बेंडाजोल की गोली खाने के फायदे
एल्बेंडाजोल की गोली खाने से स्वास्थ्य और पोषण में सुधार होता है, रोग प्रतिरोधक शक्ति में वृद्धि होती है, अनीमिया पर नियंत्रण, सीखने की क्षमता और कक्षा में उपस्थिति में सुधार तथा समुदाय में कृमि संक्रमण की व्यापकता में कमी आती है।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त यश जालुका ने बताया कि एल्बेंडाजोल की गोली पूर्णतय सुरक्षित व प्रभावशाली है। उन्होंने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस अभियान में पूरा सहयोग देकर इसको कामयाब बनाए तथा आमजन से अपील की कि 11 फरवरी से 18 फरवरी 2021 के बीच में ए.एन.एम, आशा वर्कर व आंगनबाड़ी वर्कर द्वारा दी जाने वाली एल्बेंडाजोल की गोली को अपने बच्चों को अवश्य खिलाएं ताकि भारत की भावी पीढ़ी को तंदुरुस्त बनाया जा सके।
इस अवसर पर उप सिविल सर्जन डॉ0 कैलाश,, डॉ0 सिम्मी, चिकित्सा अधिकारी डॉ0 केशव वधवा, जिला किशोर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ0 लवीश,  जिला आशा कोर्डिनटर संजीव ने भाग लिया।

करनाल, 28 जनवरी।    उप- अधीक्षक जेल  चरण सिंह ने बताया कि जिला जेल में  सरसों का तेल  निकलवाने के उपरांत बनी  खल  का ऑक्शन  जिला जेल कार्यालय में 3 फरवरी 2025 को  प्रात: 11:00 बजे  करवाया जाएगा ।  जिसकी कुल मात्रा 488 किवंटल 64 किलो है। इच्छुक बोलीदाता अपना आवेदन जिला जेल कार्यालय में जमा करवा कर ऑक्शन में भाग ले सकता है
उप- अधीक्षक जेल  चरण सिंह ने बताया कि स्वीकृत ठेकेदार को ऑफलाईन ऑक्शन हेतु सिक्योरिटी  के रूप में राशि 10 हजार  रुपये  तीन फरवरी 2025 को जमा करवानी होगी। उन्होंने बताया कि सफल बोलीदाता को खल एक  सप्ताह के अन्दर अन्दर उठानी होगी। बारदाना एवं लेबर स्वीकृत बोलीदाता का स्वयं का होगा। स्वीकृत बोलीदाता को खल उठाने के लिए अपने वाहन का प्रयोग करना होगा। उन्होंने बताया कि इस कार्य में उत्पन्न किसी प्रकार के झगडे या व्यवधान का निपटारा उप-अधीक्षक जेल द्वारा होगा।
उन्होंने बताया कि  खल का मूल्य दिनांक तीन  फरवरी 2025 मार्किट  रेट के हिसाब से प्रति क्विंटल प्लस पांच प्रतिशत जी.एस.टी. रहेगा। यदि स्वीकृत ठेकेदार उपरोक्त शर्तों की उल्लंघना करता है। तो उसकी धरोहर राशि जब्त करके उसकी बोली को समाप्त कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि बोलीदाता जेल के अंदर किसी भी बन्दी से किसी प्रकार का लेनदेन या व्यवहार नहीं करेगा और न ही किसी प्रकार का ऐसा कार्य करेगा जो जेल नियमों के विरुद्ध हो । ऐसा करने पर उसे नियमों के अनुसार दंडित किया जा सकता है
अन्य शर्ते मौके पर सुना दी जायेगी।

रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस का कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान: प्रोफेसर बी.आर. कांबोज

नीलोखेड़ी 28 जनवरी,              चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत विस्तार शिक्षा संस्थान नीलोखेड़ी में कृषि विकास में रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस की भूमिका विषय पर चल रहे चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज उद्घाटन हुआ। उद्घाटन सत्र में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफेसर बी. आर. कांबोज ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।   प्रोफेसर बी. आर. कांबोज ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि रिमोट सेंसिंग और जीआईएस से मिलने वाले डेटा से किसानों को फसल उपज का अनुमान लगाने और बेहतर फसल उगाने में मदद मिलती है। इसके साथ-साथ रिमोट सेंसिंग की मदद से बड़े क्षेत्र में बीमारियों और कीटों की जानकारी भी किसान प्राप्त कर सकते हैं जिससे संभावित संक्रमित क्षेत्रों का पता लगाया जा सकता है। इन तकनीकों के माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता का भी पता लगाया जा सकता है और निर्धारित किया जा सकता है किस क्षेत्र में कौन सी फसल उगाई जा सकती है। जीआईएस के  माध्यम से जल संसाधनों के मानचित्र और विश्लेषण में मदद मिलती है और सिंचाई तकनीकों में सुधार किया जा सकता है। पशुओं के स्वास्थ्य निगरानी में भी ये तकनीक लाभकारी हैं। उन्होंने कहा कि विस्तार अधिकारियों को इन तकनीकों को अपनाकर किसानों की आय बढ़ाने में योगदान करना चाहिए। उन्होंने विस्तार अधिकारियों से इन तकनीकों का प्रयोग करने का आह्वान किया।   विस्तार शिक्षा निदेशक डा. बलवान सिंह मंडल ने मुख्यातिथि का विस्तार शिक्षा संस्थान पहुंचने पर स्वागत किया। उन्होंने बताया कि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफेसर बी. आर. कांबोज के नेतृत्व में विस्तार शिक्षा संस्थान नीलोखेड़ी उत्तर भारत के राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी, महिला एवं बाल विकास इत्यादि विभागों के विस्तार अधिकारियों को प्रशिक्षण देने का काम कर रहा है।   इस दौरान विस्तार शिक्षा संस्थान नीलोखेड़ी के क्षेत्रीय निदेशक डा. संजय कुमार ने वाइस चांसलर प्रोफेसर बी. आर. कांबोज का धन्यवाद किया। उन्होंने मुख्य अतिथि को संस्थान की कार्यप्रणाली के बारे में अवगत भी करवाया। डॉ. कुमार ने विस्तार शिक्षा निदेशक डा. बलवान  सिंह मंडल एवं प्रतिभागियों का संस्थान पहुंचने पर स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।  प्रशिक्षण संयोजक डॉ. सत्यकाम मलिक ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश एंव जम्मू-कश्मीर, बिहार एवं झारखंड के विस्तार अधिकारियों ने हिस्सा लिया है। इस दौरान डा. जसविंद्र कौर ने मंच संचालन किया। कार्यक्रम के दौरान डा. भरत सिंह घनघस, डॉ. अनिल कुमार रोहिला एवं डा. अजय कुमार सहित संस्थान के सभी कर्मचारी एवं प्रतिभागी मौजूद रहे।
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