
कद्दू और ब्राउनी का सुराग नहीं, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की जांच पर उठाए गंभीर सवाल
नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से दो कुत्तों—कद्दू और ब्राउनी—के रहस्यमयी तरीके से गायब होने का मामला अब और पेचीदा होता जा रहा है। इस घटना को करीब डेढ़ महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक न तो कुत्तों का कोई ठिकाना पता चल पाया है और न ही यह स्पष्ट हो सका है कि वे जीवित हैं या नहीं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और जांच में लापरवाही को लेकर सख्त नाराजगी जाहिर की है।

अदालत ने कहा कि इतने समय के बावजूद पुलिस यह तक पता नहीं लगा सकी कि दोनों कुत्तों के साथ क्या हुआ। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रणव जोशी ने इस मामले में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट को अधूरी और असंतोषजनक बताते हुए पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस तरह की ढीली जांच किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है, खासकर तब जब मामला एक संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र से जुड़ा हो।
कोर्ट ने संयुक्त पुलिस आयुक्त (ट्रांसपोर्ट रेंज) को निर्देश दिए हैं कि इस पूरे मामले की दोबारा व्यापक और गहराई से जांच की जाए। साथ ही, अगली सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की गई है, जिससे यह साफ है कि अदालत इस केस को लेकर बेहद गंभीर है और जल्द से जल्द सच्चाई सामने लाना चाहती है।
जांच के दौरान पुलिस ने जो रिपोर्ट अदालत में पेश की, उसमें बताया गया कि टर्मिनल-3 के सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति एक कुत्ते को बहलाकर अपने साथ ले जाता हुआ दिखाई दिया। इस व्यक्ति का संबंध जेके कांट्रैक्टर्स नामक संस्था से बताया गया है। हालांकि, यह जानकारी मिलने के बावजूद पुलिस अब तक यह नहीं पता लगा सकी है कि उस व्यक्ति ने कुत्तों को कहां ले जाकर रखा या उनके साथ क्या हुआ।
अदालत ने यह भी पाया कि टर्मिनल-1 और टर्मिनल-3 पर हुई घटनाओं को जोड़कर जांच करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे, लेकिन पुलिस ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। दोनों टर्मिनलों के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने और उनका सही तरीके से विश्लेषण करने में भी भारी लापरवाही बरती गई। कोर्ट का मानना है कि यदि इन दोनों घटनाओं को एक साथ जोड़कर देखा जाता, तो जांच में अब तक कोई महत्वपूर्ण सुराग मिल सकता था।
एक और गंभीर पहलू यह सामने आया कि जांच अधिकारी ने संदिग्धों या संबंधित एजेंसियों से कड़ाई से पूछताछ करने के बजाय शिकायतकर्ताओं को ही उलझाने का प्रयास किया। उन्हें छह पन्नों का एक लंबा प्रश्नपत्र दिया गया, जिसमें उनसे उनके और कुत्तों के संबंध को लेकर सवाल पूछे गए। अदालत ने इस रवैये को न केवल गैर-पेशेवर बताया, बल्कि यह भी कहा कि इससे जांच की दिशा भटक गई।
इसके अलावा, पुलिस द्वारा जिन अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की गई, उनके नाम तक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किए गए। कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर लापरवाही करार दिया और कहा कि इस तरह की जांच से सच्चाई तक पहुंच पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस ने इस पूरे मामले को वह गंभीरता नहीं दी, जिसकी इस तरह के मामले में अपेक्षा की जाती है।
इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने भी इस मामले को और उलझा दिया है। इस वीडियो में टर्मिनल-1 पर एक कुत्ते के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता हुआ दिखाया गया है। अदालत का मानना है कि यह घटना और टर्मिनल-3 से कुत्ते के गायब होने की घटना आपस में जुड़ी हो सकती हैं। ऐसे में दोनों घटनाओं की संयुक्त जांच बेहद जरूरी थी, लेकिन पुलिस ने इस दिशा में भी अपेक्षित कदम नहीं उठाए।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर पशुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर कमी है। एयरपोर्ट जैसे अत्यधिक सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में इस तरह की घटना होना और फिर उसका कोई ठोस निष्कर्ष न निकल पाना, कई स्तरों पर चिंता का विषय है।
अब अदालत के सख्त रुख के बाद उम्मीद की जा रही है कि जांच में तेजी आएगी और कद्दू व ब्राउनी के बारे में सच्चाई सामने आएगी। यह मामला सिर्फ दो कुत्तों के गायब होने का नहीं है, बल्कि यह सिस्टम की जवाबदेही, संवेदनशीलता और कार्यकुशलता की भी परीक्षा है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस नए सिरे से जांच में क्या प्रगति करती है और क्या वह अदालत के निर्देशों का सही तरीके से पालन कर पाती है या नहीं। फिलहाल, कद्दू और ब्राउनी की तलाश जारी है और उनके सुरक्षित मिलने की उम्मीद अब भी कायम है।



