
मेरठ हत्याकांड की सुनवाई: कोर्ट में सवालों के जवाब देने के बाद जेल लौटे मुस्कान और साहिल, चेहरे पर दिखा बढ़ता तनाव
मेरठ में हुए चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड की सुनवाई जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले से जुड़े आरोपितों पर मानसिक दबाव भी साफ नजर आने लगा है। हाल ही में जब इस मामले के मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को अदालत में पेश किया गया, तो उनके हाव-भाव ने यह संकेत दे दिया कि अब यह मामला उनके लिए और गंभीर होता जा रहा है। अदालत से वापस जेल लौटते समय दोनों के चेहरों पर चिंता और घबराहट के स्पष्ट भाव देखे गए।

मंगलवार दोपहर को कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों आरोपितों को अदालत में पेश किया गया। यह पेशी कई कारणों से चर्चा में रही। खासतौर पर इसलिए कि इस दौरान मुस्कान अपनी छह महीने की बच्ची को गोद में लेकर कोर्ट पहुंची। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक करने वाला था। एक ओर मां की ममता थी, तो दूसरी ओर उस पर लगे गंभीर आरोपों का बोझ—दोनों ही पहलू इस दृश्य में एक साथ दिखाई दे रहे थे।
अदालत में सुनवाई के दौरान जज द्वारा दोनों आरोपितों से कुल 32-32 सवाल पूछे गए। मुस्कान ने करीब 20 मिनट में इन सवालों के जवाब दिए, जबकि साहिल ने लगभग 16 मिनट में अपनी प्रतिक्रिया दी। दिलचस्प बात यह रही कि दोनों ने लगभग हर सवाल के जवाब में ‘नहीं’ कहा, यानी उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया। यह उनका बचाव का तरीका माना जा रहा है, जिससे वे खुद को निर्दोष साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।
करीब 20 मिनट चली इस प्रक्रिया के बाद दोनों को वापस जिला कारागार भेज दिया गया। जेल प्रशासन के अनुसार, कोर्ट से लौटते समय उनके चेहरे पर पहले की तुलना में ज्यादा तनाव नजर आया। वरिष्ठ जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि दोनों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही थीं। उन्होंने यह भी बताया कि मुस्कान ने जेल पहुंचने के बाद अदालत की आगे की प्रक्रिया को लेकर जानकारी हासिल करने की कोशिश की, जिससे यह साफ होता है कि वह अपने केस को लेकर गंभीर और चिंतित है।
साहिल की ओर से भी यह संकेत मिला है कि वह अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अदालत में कुछ गवाह पेश करेगा। उसने न्याय प्रणाली पर भरोसा जताते हुए कहा है कि यदि निचली अदालत से फैसला उसके खिलाफ आता है, तो वह उच्च न्यायालय में अपील करेगा। वहीं मुस्कान की स्थिति थोड़ी कमजोर नजर आ रही है, क्योंकि उसे अब तक अपने पक्ष में कोई गवाह नहीं मिला है।
मुस्कान के लिए एक और भावनात्मक पहलू यह है कि उसके परिवार ने घटना के बाद से उससे दूरी बना ली है। बताया जा रहा है कि उसका कोई भी परिजन अब तक उससे मिलने जेल नहीं आया है। यह स्थिति उसे मानसिक रूप से और अधिक कमजोर कर सकती है। एक तरफ गंभीर अपराध के आरोप, दूसरी तरफ परिवार का साथ न होना—ये दोनों बातें उसके लिए कठिन समय को और चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।
इस पूरे मामले की जड़ 3 मार्च 2025 की वह घटना है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। आरोप है कि मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल ने मिलकर सौरभ राजपूत की हत्या की थी। हत्या के बाद शव को चार टुकड़ों में काटकर ड्रम में सीमेंट के साथ भर दिया गया, ताकि अपराध को छिपाया जा सके। इस खौफनाक वारदात का खुलासा होने के बाद पुलिस ने 19 मार्च को दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
गिरफ्तारी के बाद से ही दोनों आरोपी जेल में बंद हैं। इसी दौरान मुस्कान ने एक बेटी को जन्म दिया, जो अब छह महीने की हो चुकी है। यह बच्ची फिलहाल अपनी मां के साथ जेल में रह रही है, जो इस पूरे मामले को और भी संवेदनशील बना देता है। अदालत में जब मुस्कान अपनी बेटी के साथ पहुंची, तो यह दृश्य हर किसी के लिए भावुक कर देने वाला था।
दूसरी ओर, मृतक सौरभ के परिवार में अब भी न्याय की उम्मीद और आक्रोश दोनों मौजूद हैं। सौरभ की मां रेणू देवी और उनके भाई राहुल उर्फ बबलू ने स्पष्ट कहा है कि वे इस मामले में आरोपितों को कड़ी सजा दिलाने के लिए हर संभव कानूनी प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि जिस तरह से इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया, वह किसी भी सूरत में माफ करने योग्य नहीं है। वे चाहते हैं कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा, यहां तक कि फांसी तक दी जाए।
इस केस में अब आगे की सुनवाई और गवाहों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। जहां साहिल अपने पक्ष में गवाह पेश करने की तैयारी कर रहा है, वहीं मुस्कान के पास अभी तक कोई ठोस समर्थन नहीं है। ऐसे में आने वाले समय में अदालत की कार्यवाही इस मामले की दिशा तय करेगी।
फिलहाल, कोर्ट में पेशी के बाद दोनों आरोपितों के चेहरे पर दिखी चिंता इस बात का संकेत है कि अब यह मामला अपने निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है। कानून की प्रक्रिया धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है और हर सुनवाई के साथ यह स्पष्ट होता जा रहा है कि इस मामले का अंत एक बड़े फैसले के रूप में सामने आएगा।
अंततः, यह मामला केवल एक अपराध की कहानी नहीं है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अपराध के बाद कानून का पहिया कैसे चलता है और न्याय पाने के लिए कितनी लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। अब सबकी निगाहें अदालत के अगले कदम पर टिकी हैं, जो इस चर्चित हत्याकांड में न्याय की दिशा तय करेगा।



