शिक्षा और रोजगार पर यूपी सरकार का फोकस: आरटीई में 1.05 लाख बच्चों का दाखिला, शेष के लिए अंतिम मौका; होमगार्ड भर्ती परीक्षा की तैयारी तेज
उत्तर प्रदेश में इस समय दो बड़े मोर्चों—शिक्षा और रोजगार—पर सरकार और प्रशासन तेजी से काम कर रहे हैं। एक तरफ जहां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में शिक्षा का अवसर देने के लिए आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया जारी है, वहीं दूसरी ओर लाखों युवाओं के लिए होमगार्ड भर्ती परीक्षा की तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। दोनों ही पहलें राज्य के विकास और सामाजिक संतुलन के लिए बेहद अहम मानी जा रही हैं।

निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत इस वर्ष उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर दाखिले किए जा रहे हैं। इस सत्र में कुल 1.95 लाख सीटें निर्धारित की गई थीं, जिनमें से अब तक 1.05 लाख बच्चों का प्रवेश हो चुका है। हालांकि, अभी भी करीब 90 हजार सीटें खाली हैं, जिन्हें भरने के लिए सरकार ने एक सप्ताह का अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि वे इस अतिरिक्त समय का पूरा उपयोग करें और अभियान चलाकर अधिक से अधिक बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाएं। खासतौर पर उन परिवारों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, जो अब तक किसी कारणवश आवेदन या प्रवेश प्रक्रिया से दूर रह गए थे।
समग्र शिक्षा अभियान के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में लंबित दाखिलों को प्राथमिकता दें। इसके लिए रोजाना रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय को भेजनी होगी, जिससे यह पता चल सके कि किस जिले में कितनी प्रगति हो रही है।
इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों का सहारा लिया जा रहा है। सभी जिलों से गूगल शीट के जरिए डेटा साझा किया जा रहा है, जिससे राज्य स्तर पर निगरानी आसान हो गई है। इसके अलावा, जिन निजी स्कूलों द्वारा प्रवेश देने में देरी या इनकार किया जा रहा है, उनके खिलाफ नोटिस जारी करने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इस साल आरटीई के तहत आवेदन प्रक्रिया को तीन चरणों में पूरा किया गया, जिससे प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध रही। अप्रैल से पहले ही अधिकांश चयन प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी, जिससे दाखिले में तेजी आई। अब अंतिम चरण में प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए।
वहीं, रोजगार के क्षेत्र में भी प्रदेश सरकार सक्रिय नजर आ रही है। होमगार्ड स्वयंसेवकों के 41,424 पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा 25 से 27 अप्रैल के बीच आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में करीब 25 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल होंगे, जो इसे प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक बनाता है।
इस परीक्षा के सफल आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने व्यापक तैयारियां की हैं। बोर्ड के अध्यक्ष एसबी शिरडकर ने बताया कि परीक्षा से पहले सभी व्यवस्थाओं को परखने के लिए 23 अप्रैल को एक रिहर्सल किया जाएगा। इसमें प्रश्नपत्रों को कोषागार से परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया जाएगा।
इसके अलावा, 18 अप्रैल को यूपी-112 मुख्यालय में सभी नोडल अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें परीक्षा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस बैठक में अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी और कार्य विभाजन सुनिश्चित किया जाएगा।
परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। प्रदेश के 74 जिलों में 1053 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां तीन दिनों में छह पालियों में परीक्षा आयोजित होगी। केवल श्रावस्ती जिले को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
नकल और धोखाधड़ी को रोकने के लिए विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है। एसटीएफ और स्थानीय पुलिस को सॉल्वर गैंग और नकल माफिया पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी निगरानी रखी जा रही है, ताकि कोई भी अफवाह या गलत सूचना परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके।
इन दोनों पहलों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा और रोजगार को लेकर गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं। जहां एक ओर गरीब और जरूरतमंद बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर युवाओं को सरकारी नौकरी पाने का मौका दिया जा रहा है।
हालांकि, चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। आरटीई के तहत शेष बच्चों का दाखिला सुनिश्चित करना और इतनी बड़ी संख्या में आयोजित हो रही परीक्षा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासन के लिए आसान काम नहीं है। लेकिन यदि सभी विभाग मिलकर समन्वय के साथ काम करें, तो इन चुनौतियों को पार किया जा सकता है।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में उठाए गए ये कदम प्रदेश के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। अगर इन योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन होता है, तो इसका सीधा लाभ समाज के हर वर्ग को मिलेगा और राज्य के विकास को नई गति मिलेगी।
