तपती धरती, बेहाल जनजीवन: अकोला में 44.2°C ने तोड़ा रिकॉर्ड, यूपी-पंजाब में लू का कहर; राहत की उम्मीद कब?
देश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है और अप्रैल के मध्य में ही तापमान ने ऐसे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं, जो आमतौर पर मई-जून में देखने को मिलते हैं। महाराष्ट्र का विदर्भ क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां अकोला ने 44.2 डिग्री सेल्सियस तापमान के साथ पूरे देश में सबसे गर्म शहर का स्थान हासिल कर लिया है। यह आंकड़ा न केवल लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है, बल्कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंताएं भी बढ़ा रहा है।

मौसम के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदर्भ के कई शहर आग उगलते नजर आ रहे हैं। अमरावती में 44 डिग्री, वर्धा में 43.9 डिग्री और नागपुर में 43.4 डिग्री तापमान दर्ज किया गया है। इन शहरों में दिन के समय बाहर निकलना किसी जोखिम से कम नहीं है। सड़कों पर सन्नाटा पसरा है और लोग घरों में ही रहने को मजबूर हैं।
महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में भी गर्मी ने अपना असर दिखाया है। सोलापुर, मालेगांव और बीड जैसे शहरों में तापमान 43 डिग्री के आसपास बना हुआ है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने कई एहतियाती कदम उठाए हैं। वर्धा जिले में स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है और लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने की सख्त सलाह दी जा रही है।
उत्तर भारत भी इस तपिश से अछूता नहीं है। प्रयागराज में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है, जो सामान्य से काफी अधिक है। वहीं बुंदेलखंड के झांसी में भी इस सीजन में पहली बार पारा 40 डिग्री के पार गया है। बांदा में 42.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया, जिससे यह प्रदेश के सबसे गर्म जिलों में शामिल हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार गर्मी जल्दी शुरू हो गई है और इसकी तीव्रता भी ज्यादा है। इसके पीछे एक बड़ा कारण ऊपरी वायुमंडल में सक्रिय एंटी-साइक्लोनिक सिस्टम है, जो गर्म हवाओं को एक ही क्षेत्र में रोके रखता है और तापमान को तेजी से बढ़ाता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि आने वाले 4-5 दिनों तक स्थिति और गंभीर हो सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार, विदर्भ के अकोला, अमरावती, वर्धा, यवतमाल, बुलढाणा और चंद्रपुर जिलों में हीटवेव का प्रभाव बना रहेगा। इन क्षेत्रों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें, विशेषकर दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें।
पंजाब में भी गर्मी धीरे-धीरे अपना असर दिखा रही है। यहां अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री तक पहुंच गया है, जो सामान्य से अधिक है। हालांकि, यहां के लोगों के लिए थोड़ी राहत की संभावना जताई गई है। पठानकोट, गुरदासपुर और अमृतसर समेत कई जिलों में 17 और 18 अप्रैल को तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश हो सकती है। इससे तापमान में थोड़ी गिरावट आने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने वाला है। शिमला सहित कई क्षेत्रों में आने वाले दिनों में बारिश और बर्फबारी के आसार हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 16 से 19 अप्रैल के बीच राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाएं चल सकती हैं। इससे वहां के तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी।
हालांकि, मैदानी इलाकों में फिलहाल राहत के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि 21 अप्रैल के बाद ही तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है। तब तक लोगों को गर्मी और लू का सामना करना पड़ेगा।
इस भीषण गर्मी का असर जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। बाजारों में भीड़ कम हो गई है, दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आती हैं और लोग जरूरी काम के लिए ही घर से बाहर निकल रहे हैं। स्कूलों में छुट्टियां देने या समय बदलने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी चेतावनी दी है कि इस समय लू लगने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे और पहले से बीमार लोग ज्यादा जोखिम में हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादा से ज्यादा पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना और धूप से बचाव करना बेहद जरूरी है।
अंततः, देशभर में बढ़ती गर्मी एक गंभीर संकेत है कि हमें पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को गंभीरता से लेना होगा। फिलहाल, सभी की नजरें 21 अप्रैल के बाद मिलने वाली संभावित राहत पर टिकी हैं, लेकिन तब तक सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा उपाय है।
