
विधानसभा में RSS पर बयान से गरमाया माहौल
हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को उस समय सदन का माहौल अचानक गरमा गया, जब खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम और कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवार के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों और वेतन असमानता के मुद्दे पर शुरू हुई चर्चा जल्द ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जिक्र तक पहुंच गई, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच शब्दों का तेज आदान-प्रदान हुआ।

दरअसल, कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवार ने सदन में हरियाणा की एक यूनिवर्सिटी में नियुक्तियों को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) द्वारा बाहरी राज्यों के लोगों को हरियाणा के युवाओं की तुलना में अधिक वेतन दिया जा रहा है। पेटवार ने कहा कि इससे प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।
पेटवार ने अपने वक्तव्य के दौरान यह भी कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इसमें RSS से जुड़े लोगों की भूमिका होने की आशंका जताई। जैसे ही उन्होंने RSS का नाम लिया, सदन में हलचल तेज हो गई। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तुरंत आपत्ति जताई और माहौल गर्माने लगा।
खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने तुरंत खड़े होकर कांग्रेस विधायक के आरोपों का कड़ा खंडन किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि विश्वविद्यालय में नियुक्तियों से RSS का कोई लेना-देना नहीं है। मंत्री ने कहा, “RSS का इसमें क्या मतलब है? क्या RSS कुलपति नियुक्त करती है? यदि ऐसा कोई आरोप लगाया जा रहा है तो उसके ठोस प्रमाण सदन में पेश किए जाएं।”
मंत्री के इस तीखे जवाब के बाद सदन में कुछ देर के लिए शोर-शराबा बढ़ गया। विपक्ष के कुछ सदस्य पेटवार के समर्थन में बोलने लगे, जबकि सत्ता पक्ष के विधायक मंत्री के पक्ष में खड़े दिखे। अध्यक्ष को बीच-बीच में हस्तक्षेप कर व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश करनी पड़ी।
गौरव गौतम ने अपने जवाब में आगे कहा कि बिना सबूत के किसी संगठन का नाम लेना उचित नहीं है और इससे सदन की गरिमा प्रभावित होती है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कांग्रेस विधायक को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई ठोस साक्ष्य है तो वह सदन के पटल पर रखें, अन्यथा इस तरह के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद माने जाएंगे।
मंत्री की इस सख्त प्रतिक्रिया के बाद बहस और तीखी हो गई। जस्सी पेटवार ने शुरुआत में अपने आरोपों पर जोर दिया और कहा कि उनका मकसद केवल भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा के युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और वेतन में असमानता की जांच होनी चाहिए।
हालांकि, जैसे-जैसे बहस आगे बढ़ी और मंत्री बार-बार साक्ष्य पेश करने की बात कहते रहे, पेटवार का रुख कुछ नरम पड़ता दिखा। बढ़ते हंगामे और सत्ता पक्ष के लगातार विरोध के बीच आखिरकार उन्हें सदन में यह कहना पड़ा कि वह RSS का नाम नहीं ले रहे हैं, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधानसभा का माहौल कई बार गरमा गया। सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर बेवजह विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर सवालों से बचने की कोशिश करने का आरोप लगाया। अध्यक्ष ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की और चर्चा को मूल मुद्दे—यानी विश्वविद्यालयों में भर्ती और वेतन संरचना—पर केंद्रित रखने को कहा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हरियाणा में विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता का मुद्दा लंबे समय से संवेदनशील रहा है। ऐसे में बजट सत्र के दौरान इस विषय का उठना और उस पर तीखी बहस होना स्वाभाविक है। हालांकि, RSS का नाम आने से विवाद और ज्यादा राजनीतिक रंग लेता नजर आया।
विपक्ष का कहना है कि राज्य में नौकरियों और विश्वविद्यालय नियुक्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। वहीं सत्ता पक्ष का तर्क है कि बिना प्रमाण किसी संगठन या संस्था का नाम लेकर माहौल बिगाड़ना ठीक नहीं है और इससे अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं।
बहस के बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी, लेकिन इस मुद्दे ने पूरे दिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनाए रखा। कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने अपने-अपने स्तर पर बयानबाजी भी की। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर यदि विपक्ष भर्ती प्रक्रिया और वेतन असमानता के मुद्दे को लेकर और दस्तावेज सामने लाता है।
फिलहाल इतना तय है कि बजट सत्र के दौरान हुई यह तीखी बहस सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का संकेत दे रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार विश्वविद्यालय नियुक्तियों और वेतन संबंधी आरोपों पर कोई औपचारिक जांच या स्पष्टीकरण देती है या नहीं, और विपक्ष इस मुद्दे को आगे किस तरह उठाता है।

