
गोवा ट्रिप बना मातम—तेज रफ्तार थार की टक्कर में पिता की मौत
गोवा की सैर और बेटी का जन्मदिन मनाने गया एक खुशहाल परिवार पलभर में शोक में डूब गया। असगांव के हैप्पी बार जंक्शन पर हुए भीषण सड़क हादसे ने भोपाल निवासी भगतराम शर्मा के परिवार की खुशियां छीन लीं। तेज रफ्तार किराए की थार एसयूवी की टक्कर इतनी जोरदार थी कि 65 वर्षीय भगतराम शर्मा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिवार के कई सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि सड़क सुरक्षा और लापरवाही से ड्राइविंग पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना सोमवार, 23 फरवरी की शाम करीब पांच बजे की बताई जा रही है। भगतराम शर्मा अपनी पत्नी, बेटे, बेटी रुचिका, दामाद तुषार उनियाल और छोटी नातिन के साथ गोवा घूमने पहुंचे थे। परिवार 26 फरवरी को रुचिका का जन्मदिन खास अंदाज में मनाने की तैयारी कर रहा था। यह परिवार की पहली ऐसी ट्रिप थी जब सभी लोग भोपाल से बाहर जश्न मनाने निकले थे। लेकिन किसे पता था कि यह खुशी का सफर जिंदगी का सबसे दर्दनाक अनुभव बन जाएगा।
परिवार के अनुसार, वे लोग असगांव स्थित हैप्पी बार जंक्शन के पास पहुंचे थे, जहां सड़क काफी संकरी है। दामाद तुषार उनियाल ने बताया कि उन्होंने सावधानी बरतते हुए अपनी कार की रफ्तार धीमी कर ली थी और आगे बढ़ने से पहले यह देखने के लिए गाड़ी लगभग रोक दी थी कि सामने से कोई वाहन तो नहीं आ रहा। उसी दौरान अचानक सामने से तेज गति से आती थार एसयूवी ने उनकी हैचबैक कार को सीधी टक्कर मार दी।
प्रत्यक्षदर्शियों और परिवार के मुताबिक, थार की रफ्तार करीब 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जा रही है। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। कुछ सेकंड तक कार में बैठे लोगों को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। जब तक लोग संभलते, तब तक भगतराम शर्मा गंभीर रूप से घायल हो चुके थे।
हादसे के तुरंत बाद का दृश्य और भी दर्दनाक बताया जा रहा है। परिवार ने आरोप लगाया है कि 19 वर्षीय आरोपी चालक शौर्य गोयल ने तुरंत मदद करने के बजाय अपने पिता को फोन कर घटना के बारे में सामान्य लहजे में बात करना शुरू कर दिया। परिजनों का कहना है कि चालक के व्यवहार में न तो घबराहट दिखी और न ही किसी तरह का पछतावा।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि थार में मौजूद चार युवतियां गाड़ी से उतरकर मौके का जायजा लेने तक नहीं आईं। इससे पीड़ित परिवार को और ज्यादा ठेस पहुंची। उनका कहना है कि हादसे के बाद प्राथमिकता घायलों की मदद होनी चाहिए थी, लेकिन आरोपी पक्ष कथित तौर पर मामले को ‘सेटल’ करने की कोशिश में लगा था।
इसी बीच एक संयोग ने घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने में मदद की। तुषार उनियाल के अनुसार, उसी समय वहां से एक एंबुलेंस गुजर रही थी। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया और करीब 10 मिनट के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया गया। हालांकि, भगतराम शर्मा की चोटें इतनी गंभीर थीं कि डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि भगतराम शर्मा की मौत सर्वाइकल नेक फ्रैक्चर यानी गर्दन की हड्डी टूटने से हुई। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में भी गंभीर चोटें आई थीं, लेकिन गर्दन की हड्डी टूटना घातक साबित हुआ। परिवार की अन्य सदस्य भी इस हादसे में बुरी तरह घायल हुए हैं।
रुचिका की मां की हालत गंभीर बनी हुई है। उनकी पीठ की हड्डी टूट गई है और वे बिस्तर पर हैं। वहीं खुद रुचिका के कंधे और पेट में चोट आई है, जिसके कारण वह अपनी छोटी बेटी को गोद में उठाने तक की स्थिति में नहीं हैं। पूरे परिवार पर मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
सबसे मार्मिक पल तब सामने आया जब रुचिका ने अपने दर्द को शब्दों में बयां किया। उन्होंने कहा, “मैं कैसे भूलूं कि अपने जन्मदिन पर मैं अपने पिता की पार्थिव देह लेकर घर लौटी हूं?” उनकी आवाज में दर्द और गुस्सा साफ झलक रहा था। परिवार का कहना है कि अगर ऐसे लापरवाह चालकों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे भविष्य में भी किसी की जिंदगी खतरे में डाल सकते हैं।
तुषार उनियाल ने हादसे की भयावहता बताते हुए कहा कि टक्कर के बाद उनकी कार काफी दूर तक घिसटती हुई गई और एक खंभे से टकराकर रुकी। उनका मानना है कि अगर कार पलट जाती तो शायद पूरा परिवार ही खत्म हो सकता था। उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद की सराहना की, लेकिन अस्पताल में शुरुआती प्रतिक्रिया को धीमा बताया।
इस घटना के बाद इलाके में सड़क सुरक्षा को लेकर फिर बहस तेज हो गई है। तेज रफ्तार, युवा चालकों की लापरवाही और पर्यटन स्थलों पर किराए की गाड़ियों की निगरानी जैसे मुद्दे एक बार फिर चर्चा में हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है। आरोपी चालक से पूछताछ की जा रही है और वाहन की तकनीकी जांच भी की जा रही है।
यह हादसा सिर्फ एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं है, बल्कि सड़क पर बढ़ती लापरवाही की एक कड़वी तस्वीर भी पेश करता है। एक जन्मदिन की खुशी पलभर में मातम में बदल गई और एक परिवार हमेशा के लिए टूट गया। अब पीड़ित परिवार को सिर्फ न्याय का इंतजार है—ताकि भगतराम शर्मा की मौत यूं ही एक और आंकड़ा बनकर न रह जाए।
