
उन्नाव में दिल दहला देने वाला कदम, पिता ने बेटी संग ट्रेन के आगे लगाई छलांग
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक ऐसी दर्दनाक घटना सामने आई है जिसने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया है। गंगाघाट कोतवाली क्षेत्र में एक पिता ने अपनी 14 वर्षीय बेटी को सीने से लगाकर ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। मौके से मिले सुसाइड नोट में मृतक ने अपनी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस खौफनाक कदम के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया है। घटना के बाद इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।

यह दुखद घटना 23 फरवरी की रात करीब 8:45 बजे सहजनी क्रॉसिंग के पास हुई। मृतकों की पहचान 50 वर्षीय विकास गुप्ता और उनकी 14 साल की बेटी वेदिका के रूप में हुई है। रेलवे ट्रैक पर दोनों के क्षत-विक्षत शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
घटनास्थल से लगभग 100 मीटर दूर विकास की सफेद रंग की कार खड़ी मिली। पुलिस ने जब कार की तलाशी ली तो अंदर से विकास का मोबाइल फोन और पर्स बरामद हुआ। मोबाइल के पीछे चिपका एक छोटा सा सुसाइड नोट भी मिला, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। नोट में विकास ने अपनी मौत का जिम्मेदार अपनी दूसरी पत्नी को ठहराया है और लिखा है कि वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका है।
मृतक के भाई शिवम ओमर ने पुलिस को दिए बयान में कई चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, विकास की पहली पत्नी का कुछ समय पहले निधन हो गया था, जिसके बाद उसने डोली नाम की महिला से दूसरी शादी की। परिवार का दावा है कि दूसरी शादी के बाद से ही घर में लगातार विवाद और तनाव रहने लगा था।
परिजनों का आरोप है कि डोली का पिछले करीब दो महीनों से किसी दूसरे युवक के साथ संबंध था। परिवार का कहना है कि वह उस युवक के साथ दुबई जाने की तैयारी में थी। जब विकास को इस बारे में पता चला तो उसने इसका विरोध किया, जिसके बाद घर का माहौल और बिगड़ गया।
बताया जा रहा है कि 19 फरवरी को विवाद इतना बढ़ गया कि डोली ने अपने मायके वालों को बुला लिया। आरोप है कि इसके बाद विकास के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। इस हमले में उसके सिर पर गंभीर चोट आई थी। परिजन उसे इलाज के लिए कानपुर के हैलट अस्पताल लेकर गए, जहां उसका उपचार हुआ।
परिवार का कहना है कि इस घटना के बाद विकास मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगा था। आरोप है कि उसने 23 फरवरी को ही पुलिस को एक प्रार्थना पत्र देकर अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई थी और मारपीट की शिकायत की थी। परिजनों ने पुलिस पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो शायद यह हादसा टल सकता था।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाए और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद दोनों शव परिजनों को सौंप दिए गए, जिनका गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और इलाके में भी शोक की लहर है।
मृतक के भाई की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी पत्नी डोली समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और सुसाइड नोट की भी फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी, ताकि उसकी प्रमाणिकता सुनिश्चित की जा सके।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि घटना के समय की सटीक परिस्थितियां क्या थीं और क्या मृतक वास्तव में लंबे समय से मानसिक दबाव में था। साथ ही पत्नी और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है।
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है—क्या पारिवारिक कलह और कथित बेवफाई ने एक पिता को इतना तोड़ दिया कि उसने अपनी मासूम बेटी के साथ यह कदम उठा लिया? क्या समय पर हस्तक्षेप होता तो दो जिंदगियां बच सकती थीं? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि घरेलू विवाद और मानसिक तनाव किस हद तक लोगों को चरम कदम उठाने पर मजबूर कर सकते हैं।



