
मुझे पापा के पास भेज दीजिए’—थाने पहुंची बच्ची की गुहार से पिघले पुलिसकर्मी
बिहार के बांका में एक 11 वर्षीय बच्ची की दर्दभरी पुकार ने टाउन थाना परिसर का माहौल भावुक कर दिया। मां की कथित मारपीट से परेशान बच्ची रोते हुए पुलिस के पास पहुंची और खुद को सुरक्षित रखने की गुहार लगाई। बच्ची की मासूम अपील—“इंस्पेक्टर साहब, मुझे बचा लीजिए… मुझे पापा के पास भेज दो”—सुनकर वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी संवेदनशील हो उठे।

जानकारी के मुताबिक कशिश (काल्पनिक नाम) अपनी मां राधा देवी के साथ शहर के आनंद कॉलोनी में किराये के मकान में रहती है। उसके पिता संदीप कुमार मूल रूप से अमरपुर प्रखंड के सलेमपुर गांव के रहने वाले हैं और फिलहाल दिल्ली में मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। पारिवारिक परिस्थितियों के बीच बच्ची की स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी, जिसका चरम उस समय सामने आया जब वह खुद थाना पहुंच गई।
बताया जाता है कि सोमवार को पहली बार बच्ची अपनी मां के साथ टाउन थाना पहुंची थी। उस समय पुलिस ने इसे पारिवारिक विवाद मानते हुए दोनों को समझाने-बुझाने की कोशिश की और मामला शांत कराकर बच्ची को मां के साथ घर भेज दिया। लेकिन कुछ ही देर बाद बच्ची फिर से अकेले रोती-बिलखती थाना पहुंच गई। इस बार उसने पुलिस से साफ शब्दों में कहा कि वह घर वापस नहीं जाना चाहती क्योंकि मां उसे अक्सर पीटती है।
पुलिस के सामने बच्ची ने जो बातें बताईं, वे काफी चिंताजनक थीं। उसने कहा कि वह पढ़ना चाहती है, लेकिन घर का माहौल ऐसा है कि वह मानसिक रूप से परेशान हो चुकी है। उसने अधिकारियों से गुहार लगाई कि उसे उसके पिता के पास भेज दिया जाए ताकि वह सुरक्षित रह सके और पढ़ाई जारी रख सके। बच्ची की यह बात सुनकर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया।
थाना पुलिस ने तुरंत बच्ची की मां राधा देवी को बुलाकर पूछताछ की। मां ने अपनी सफाई में बताया कि वह दो बच्चों के साथ अकेले रह रही है और आर्थिक तंगी के कारण काफी तनाव में रहती है। उसके मुताबिक पति से पर्याप्त आर्थिक सहयोग नहीं मिलता, जिसके कारण बच्चों की परवरिश और घर चलाना उसके लिए मुश्किल हो गया है। उसने यह भी स्वीकार किया कि कभी-कभी गुस्से में बच्ची को डांट-फटकार और मार पड़ जाती है।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी सामने आई कि राधा देवी संदीप कुमार की दूसरी पत्नी बताई जाती हैं, जिससे पारिवारिक समीकरण और जटिल हो गए हैं। हालांकि पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
पूछताछ के दौरान बच्ची ने एक और संवेदनशील बात पुलिस को बताई। उसने कहा कि उसकी मां अक्सर किसी अन्य व्यक्ति से मोबाइल पर बात करती है और जब उसने यह बात अपने पिता को बताई तो घर में विवाद और बढ़ गया। इस आरोप पर मां ने मोबाइल पर बातचीत करने की बात तो मानी, लेकिन किसी गलत संबंध से इनकार किया। इस बिंदु ने मामले को और नाजुक बना दिया है।
मामले की गंभीरता और बच्ची की मानसिक स्थिति को देखते हुए पुलिस ने तुरंत चाइल्ड लाइन को सूचित किया। चाइल्ड लाइन की टीम को पूरे घटनाक्रम से अवगत करा दिया गया है और अब संयुक्त रूप से बच्ची के हित में आगे की कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सबसे पहले बच्चे की सुरक्षा और भविष्य को प्राथमिकता दी जाती है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक बच्ची की काउंसलिंग कराने की भी तैयारी की जा रही है ताकि उसकी मानसिक स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सके। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या उसे अस्थायी रूप से पिता या किसी सुरक्षित अभिभावक के पास भेजा जा सकता है। यदि जरूरत पड़ी तो बाल संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधान भी लागू किए जा सकते हैं।
थाना परिसर में मौजूद लोगों ने बताया कि बच्ची काफी डरी हुई थी और बार-बार यही कह रही थी कि वह घर नहीं जाना चाहती। उसकी आंखों में आंसू और आवाज में डर साफ झलक रहा था। इस घटना ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक दबाव, पारिवारिक कलह और अभिभावकों के बीच तनाव का सीधा असर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। ऐसे मामलों में केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं बल्कि काउंसलिंग और पारिवारिक समाधान भी बेहद जरूरी होता है।
फिलहाल पुलिस और चाइल्ड लाइन संयुक्त रूप से मामले की निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बच्ची के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि बच्ची के साथ मारपीट की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि घरेलू विवादों का सबसे बड़ा असर अक्सर बच्चों पर पड़ता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन बच्ची के भविष्य और सुरक्षा को लेकर क्या अंतिम कदम उठाता है।
