
कांवड़ यात्रा से लौटते समय दर्दनाक हादसा, बेटे की मौत, पिता गंभीर
दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे (एनएच-58) पर रविवार तड़के एक भीषण सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे पिता-पुत्र की बाइक रुहासा कट के पास अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। हादसा इतना भयावह था कि 22 वर्षीय युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका पिता गंभीर रूप से घायल हो गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बाइक चालक नशे की हालत में था और दोनों ने हेलमेट नहीं पहना था।

जानकारी के अनुसार, दिल्ली के जहांगीरपुरी निवासी 48 वर्षीय बबलू शनिवार सुबह अपने बेटे नितिन (22) के साथ कांवड़ यात्रा पर हरिद्वार गए थे। सावन माह के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंचते हैं और फिर अपने-अपने गंतव्य की ओर लौटते हैं। पिता-पुत्र भी इसी धार्मिक आस्था के तहत गंगाजल लेने गए थे। शनिवार को हरिद्वार पहुंचने के बाद उन्होंने पूजा-अर्चना की और देर रात वापस दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
रविवार तड़के करीब चार बजे, जब वे दौराला थाना क्षेत्र के रुहासा कट के पास पहुंचे, तभी उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाइक की रफ्तार काफी तेज थी। आशंका जताई जा रही है कि तेज गति और चालक की लापरवाही के कारण बाइक सीधे डिवाइडर से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों सड़क पर दूर जा गिरे। आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही दौराला पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने दोनों को तत्काल सड़क से हटाकर एंबुलेंस की मदद से अस्पताल भिजवाया। चिकित्सकों ने जांच के बाद नितिन को मृत घोषित कर दिया। बताया गया कि उसके सिर में गंभीर चोटें आई थीं, जो उसकी मौत का कारण बनीं। वहीं, बबलू को गंभीर हालत में मोदीपुरम स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि हादसे के समय बाइक चला रहा बबलू नशे की हालत में था। प्राथमिक जांच में शराब के सेवन की पुष्टि हुई है। साथ ही यह भी पाया गया कि न तो पिता और न ही पुत्र ने हेलमेट पहन रखा था। यदि दोनों ने हेलमेट पहना होता, तो संभव है कि हादसे की गंभीरता कुछ कम होती। विशेषज्ञों का कहना है कि हाईवे पर बिना हेलमेट और तेज रफ्तार में वाहन चलाना जानलेवा साबित हो सकता है।
हादसे की खबर मिलते ही मृतक युवक के परिजन दिल्ली से मौके पर पहुंचे। परिवार में कोहराम मच गया। नितिन घर का इकलौता बेटा बताया जा रहा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। शाम तक अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही थी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रुहासा कट के पास पहले भी कई सड़क हादसे हो चुके हैं। यहां सड़क का मोड़ और तेज रफ्तार वाहनों के कारण दुर्घटनाएं होती रहती हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि इस हादसे का मुख्य कारण चालक की लापरवाही और नशे की हालत में वाहन चलाना प्रतीत होता है।
कांवड़ यात्रा के दौरान हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़कों पर निकलते हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ लोग यातायात नियमों की अनदेखी कर देते हैं। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि धार्मिक यात्रा के दौरान भी यातायात नियमों का पालन अवश्य करें। नशे की हालत में वाहन न चलाएं और हेलमेट जैसे सुरक्षा उपकरणों का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर लोग कब तक लापरवाही बरतते रहेंगे। एक छोटी सी चूक या असावधानी जिंदगी भर का दर्द दे सकती है। नितिन की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जो यात्रा आस्था और श्रद्धा से शुरू हुई थी, वह एक त्रासदी में बदल गई।
फिलहाल पुलिस ने क्षतिग्रस्त बाइक को अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। अभी तक इस संबंध में कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह हादसा न केवल एक परिवार के लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी है। सड़क पर जरा सी लापरवाही, तेज रफ्तार और नशा—इनका मेल अक्सर जानलेवा साबित होता है। जरूरत है कि लोग स्वयं अपनी और अपने परिजनों की सुरक्षा के प्रति सजग रहें, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



