उत्तर प्रदेश

सहारनपुर में परिवार पर भूचाल, पांच की मौत का रहस्य

सहारनपुर जिले के सरसावा थाना क्षेत्र में एक ऐसा हादसा हुआ जिसने इलाके के लोगों को हिलाकर रख दिया। कौशिक विहार कॉलोनी में अशोक राठी (40) नामक व्यक्ति ने अपने परिवार के चार सदस्यों और खुद की जान ले ली। मृतकों में उनकी मां विद्यावती (70), पत्नी अंजीता (37), बड़े बेटे कार्तिक (16) और छोटे बेटे देव (13) शामिल हैं।

घटना की जानकारी तब सामने आई जब अशोक के भांजे ने उन्हें फोन किया। कई बार फोन करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। घबराकर वह घर पहुंचा। घर अंदर से बंद था। पहले सीढ़ियों के रास्ते पहली मंजिल पर गया, फिर रसोई की खिड़की तोड़कर झांका। अंदर का नजारा देखकर वह दहल गया। बिस्तर पर परिवार के पांचों सदस्य लहूलुहान पड़े थे।

सूचना मिलते ही डीआईजी, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और शवों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेजा गया। जेल चुंगी स्थित मोर्चरी पर पांच एंबुलेंस एक साथ पहुंचीं। पोस्टमार्टम में जुटी डॉक्टरों की टीम देर रात तक काम करती रही। मोर्चरी पर मौजूद हर शख्स इस भयावह दृश्य को देखकर स्तब्ध रह गया।

अशोक राठी अपने सहकर्मियों और रिश्तेदारों के बीच शांत, सरल और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे। वह अपने परिवार के प्रति बेहद समर्पित थे और बच्चों की हर छोटी-बड़ी जिद पूरी करते थे। इस घटना ने सभी के लिए विश्वास करना मुश्किल कर दिया कि ऐसा व्यक्ति अपने परिवार को क्यों नष्ट कर सकता है।

पुलिस की प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि अशोक ने पहले परिवार को खाने में नशीली गोलियां दीं, ताकि वे विरोध न कर सकें। इसके बाद रात करीब 1 बजे, जब सभी नींद में थे, उन्होंने चारों के माथे पर गोली मारी और अंत में खुद को दो गोलियां मार लीं। घटनास्थल से तीन पिस्टल भी बरामद हुई हैं।

स्थानीय पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अशोक पिछले कुछ समय से गहरे अवसाद (डिप्रेशन) में थे और उनका इलाज चल रहा था। परिजनों और परिचितों ने बताया कि हाल के महीनों में उनकी मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ रही थी, लेकिन किसी ने यह अंदेशा नहीं लगाया था कि वे इतना बड़ा कदम उठाएंगे।

इस दर्दनाक सामूहिक हत्याकांड ने न केवल कॉलोनी बल्कि पूरे शहर को झकझोर दिया। पड़ोसी और स्थानीय लोग सदमे में हैं। प्रशासन ने मोर्चरी के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी और पोस्टमार्टम के बाद शवों का अंतिम संस्कार कराया गया।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि घटना से पहले अशोक ने किसी से मदद लेने की कोशिश की या नहीं। फोरेंसिक टीम ने घर में मौजूद सभी साक्ष्यों को सुरक्षित कर लिया है। प्रारंभिक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि परिवार के भीतर किसी प्रकार का स्पष्ट विवाद या तनाव नहीं था।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना ने मानसिक स्वास्थ्य और अवसाद के महत्व को उजागर कर दिया है। अक्सर लोग अपने मानसिक संघर्ष को छुपाते हैं, जिससे छोटी समस्याएं भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती हैं। समाज और परिवार को इस दिशा में जागरूक होने की जरूरत है।

अशोक का परिवार स्थानीय समुदाय में जाना-पहचाना था। अंजीता, उनकी पत्नी, बच्चों और घर के लिए समर्पित थीं। दोनों बेटे, कार्तिक और देव, पढ़ाई और खेलकूद में सक्रिय थे। विद्यावती, परिवार की सबसे बुजुर्ग सदस्य, घर और पोते-पोतियों की देखभाल में लगी रहती थीं।

स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी घटनाएं समाज में डर और असुरक्षा पैदा करती हैं, इसलिए सतर्कता जरूरी है।

घटना ने मानसिक स्वास्थ्य, अवसाद और तनाव के प्रभाव की गंभीर चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते अवसाद की पहचान और इलाज किया जाए तो इस तरह की त्रासदी को रोका जा सकता है।

इस हादसे ने यह भी दिखा दिया कि कभी-कभी खुशहाल दिखने वाले परिवार के अंदर भी अंधेरे रहस्य छुपे हो सकते हैं। इस दर्दनाक कहानी ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया और लोगों के दिलों में डर और शोक दोनों छोड़ गया।

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on X-twitter Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Back to top button