
हरियाणा में हर चौथा बिजली उपभोक्ता बकाया देने में पीछे, ग्रामीण घरेलू कनेक्शन सबसे ज्यादा प्रभावित
चंडीगढ़: हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने के साथ ही बकाया राशि का संकट भी बढ़ता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 83.4 लाख बिजली कनेक्शन हैं, जिनमें से लगभग 22.5 लाख उपभोक्ताओं पर 7,742 करोड़ रुपये से अधिक का बिल बकाया है।

अक्टूबर 2025 तक डिफाल्टर उपभोक्ताओं में 15.98 लाख कनेक्शन चालू थे, जिन पर 3,874 करोड़ रुपये का बकाया है, जबकि 6.52 लाख काटे गए कनेक्शन पर लगभग 3,868 करोड़ रुपये की राशि लंबित है। इसका मतलब यह है कि कनेक्शन काटे जाने के बावजूद बकाया वसूली में बड़ी चुनौतियां हैं।
सबसे ज्यादा दबाव दक्षिण हरियाणा पर
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) पर सबसे अधिक बकाया है। यहां 12.95 लाख डिफाल्टर उपभोक्ताओं पर 4,817.81 करोड़ रुपये लंबित हैं। वहीं, उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) में 9.55 लाख डिफाल्टरों पर 2,924.32 करोड़ रुपये का बिल बकाया है।
ग्रामीण घरेलू उपभोक्ता शीर्ष डिफाल्टर
श्रेणीवार आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं पर सबसे ज्यादा बकाया है। 11.17 लाख ग्रामीण घरेलू कनेक्शनों पर 4,282.12 करोड़ रुपये बकाया है। इसके मुकाबले शहरी घरेलू उपभोक्ताओं पर 959.07 करोड़, औद्योगिक उपभोक्ताओं पर 1,087.78 करोड़ और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर 749.98 करोड़ रुपये लंबित हैं। कृषि उपभोक्ताओं पर 200.59 करोड़ और सरकारी विभागों के 23,672 कनेक्शनों पर 418.06 करोड़ रुपये अटके हैं।
बिजली निगमों की वित्तीय स्थिति पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी डिफाल्ट राशि से बिजली वितरण निगमों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। इसका असर बिजली ढांचे के सुधार, नए निवेश और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति पर पड़ सकता है। यदि बकाया वसूली के लिए ठोस नीति नहीं बनाई गई तो नुकसान अंततः ईमानदार उपभोक्ताओं पर बढ़ी हुई दरों के रूप में पड़ेगा।
नई दरों से पहले बकाया वसूली पर जोर
हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग 8 जनवरी को नई बिजली दरों पर जन सुनवाई कर रहा है। विशेषज्ञों और नागरिकों का कहना है कि दरें बढ़ाने से पहले बकाया राशि वसूली के लिए स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश होना जरूरी है, ताकि आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
सरकारी भवनों और संस्थानों में भी बकाया राशि की वसूली को लेकर सख्त कदम उठाए जाएंगे, और भुगतान में देरी होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

