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Haryana News: पपीता की खेती कर किसान कर सकते हैं लाखों रूपए की कमाई

Haryana News: मुकेश बघेल, ब्यूरो चीफ, पलवल, 4 फरवरी : पपीता की खेती कर किसान लाखों रूपए की कमाई कर सकते है। पलवल जिले के गांव कटेसरा निवासी प्रगतिशील किसान सत्य नारायण एडवोकेट पपीता की वैज्ञानिक तरीके से खेती कर रहे है। सत्य नारायण एडवोकेट का कहना है कि किसानों को परम्परागत खेती को छोडक़र पपीता की खेती करनी चाहिए। पपीता की 1 एकड़ में खेती करने से पांच लाख रुपए तक की आय प्राप्त की जा सकती है।


प्रगतिशील किसान सत्य नारायण एडवोकेट ने कहा कि बागवानी विभाग द्वारा पपीता की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उन्होंने एक एकड़ में पपीता की ताइवानी रेड लेडी किस्म के पौधे लगाए हुए है। एक पौधा पंद्रह रुपए में आता है। पौधे की देखभाल करना आसान है। ड्रिप प्रणाली के माध्यम से सिंचाई की जाती है। एक साल में एक पौधे के ऊपर केवल पंद्रह रुपए का खर्च आता है जिसमें खाद और लेबर शामिल है। एक पौधे में 40 से 60 पपीते लगते है। एक एकड़ में एक हजार पौधे लगाए जाते है। पपीता जल्द तैयार होने वाली फसल है। इसका फायदा यह है कि एक बार लगाने के बाद में दो बार फल लगते है। अगर खेत में पपीता लगा है तब भी उसमें बागवानी की फसलें लगाई जा सकती है। ऐसा करने से किसानों को दोगुना आमदनी प्राप्त होती है। पपीता की खेती करना अन्य फसलों के मुकाबले आसान है। पपीता की खेती कर किसान अच्छा प्रॉफिट प्राप्त कर सकते है।


जिला बागवानी अधिकारी डॉ. अब्दुल रज्जाक ने बताया कि बागवानी विभाग द्वारा किसानों को पपीता की खेती करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बागवानी विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी गांवों में जाकर किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही स्कीमों के बारे में अवगत करा रहे है। उन्होंने बताया कि पपीता की खेती करने के लिए विभाग द्वारा अनुदान भी दिया जा रहा है। किसान पपीता की खेती कर कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते है। पपीते की खेती साल के किसी भी महीने में की जा सकती है, लेकिन फरवरी, मार्च, और अक्टूबर के महीने सबसे अच्छे माने जाते हैं। पपीते की खेती के लिए ज़रूरी है कि जमीन में जल निकासी अच्छी हो। पपीते की खेती के लिए जमीन की पीएच वैल्यू 3.5 से 7.5 के बीच होनी चाहिए। पपीते की खेती के लिए गहरी और उपजाऊ मिट्टी होनी चाहिए। पपीते की खेती के लिए जमीन में जलभराव नहीं होना चाहिए। पपीते की खेती के लिए बीज अच्छी क्वालिटी के होने चाहिए। पपीते की खेती के लिए जमीन को समतल करना चाहिए। पपीते की खेती के लिए नर्सरी में पौधे तैयार करने चाहिए। पपीते की खेती के लिए बीजों को क्यारियों, लकड़ी के बक्सों, मिट्टी के गमलों, या पॉलिथीन की थैलियों में बोना चाहिए। बीजों को बोने से पहले क्यारियों को फ़ॉर्मेलिहाइड के घोल से उपचारित करना चाहिए। पौधों को पद विगलन रोग से बचाने के लिए क्यारियों को फ़ॉर्मेलिहाइड के घोल से उपचारित करना चाहिए। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि सरकार द्वारा किसानों के हित में जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही है। किसानों को उनका भी लाभ उठाना चाहिए।

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