
हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, पशुओं को बचाने के लिए शुरू होगा मुफ्त वैक्सीनेशन अभियान
हरियाणा में पशुपालकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने 11 मई से एक विशेष टीकाकरण अभियान शुरू करने का फैसला लिया है, जिसके तहत प्रदेशभर में गायों और भैंसों को खतरनाक बीमारियों से बचाने के लिए मुफ्त टीके लगाए जाएंगे। यह अभियान लगातार एक महीने तक चलेगा।

पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि सरकार पशुओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। राज्य में खुरपका-मुंहपका और डिस्टमपर जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है, जिससे पशुपालकों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसी को देखते हुए विभाग ने राज्यव्यापी अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ बीमारी रोकना नहीं बल्कि डेयरी उद्योग को भी मजबूत करना है। पशु स्वस्थ रहेंगे तो दूध उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में भी सुधार होगा।
इस बार अभियान को पहले से ज्यादा सुविधाजनक बनाया गया है। विभाग की टीमें सीधे पशुपालकों के घर जाएंगी और वहीं पशुओं का टीकाकरण करेंगी। इससे किसानों को अपने पशुओं को अस्पताल तक ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
राज्य सरकार ने यह सेवा पूरी तरह मुफ्त रखने का फैसला लिया है ताकि छोटे और गरीब पशुपालकों को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी न हो। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।
पशुपालन विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया ने बताया कि चार महीने से अधिक उम्र के सभी पशुओं को टीका लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश का पहला ऐसा राज्य बन चुका है जहां दो अलग-अलग बीमारियों के लिए एक संयुक्त वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस नई तकनीक से पशुओं को बार-बार इंजेक्शन लगवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही विभाग के कर्मचारियों को भी अभियान चलाने में आसानी होगी।
विभाग के महानिदेशक डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। टीकों को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड चेन सिस्टम मजबूत किया गया है। इसके अलावा आइस लाइन रेफ्रिजरेटर भी लगाए गए हैं ताकि वैक्सीन की गुणवत्ता बनी रहे।
उन्होंने कहा कि पशुपालकों को इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। समय पर टीकाकरण कराने से पशुओं की जान बचाई जा सकती है और बीमारी फैलने का खतरा काफी कम हो जाता है।
खुरपका-मुंहपका बीमारी को पशुओं के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। इस बीमारी के कारण पशु खाना-पीना बंद कर देते हैं और दूध उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है। कई बार पशु इतने कमजोर हो जाते हैं कि उनका इलाज मुश्किल हो जाता है।
सरकार का दावा है कि इस अभियान से राज्य के डेयरी सेक्टर को नई मजबूती मिलेगी। पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और पशुधन की सेहत बेहतर होगी।
अधिकारियों ने बताया कि यदि किसी पशुपालक को अभियान से जुड़ी जानकारी चाहिए तो वह अपने नजदीकी पशु अस्पताल में संपर्क कर सकता है।



