
हरियाणा में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, ESMA लागू होने के बाद भी नहीं झुके डॉक्टर; अस्पतालों में मरीज बेहाल
हरियाणा में सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल लगातार गंभीर होती जा रही है। अपनी लंबित मांगों को लेकर डॉक्टर कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं। सरकार की ओर से ESMA लागू करने और ‘नो वर्क, नो पे’ का आदेश जारी किए जाने के बावजूद डॉक्टरों ने बुधवार (10 दिसंबर) से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है।

हड़ताल का सीधा असर सरकारी अस्पतालों में देखने को मिल रहा है। ओपीडी से लेकर दवा काउंटर तक मरीजों की लंबी कतारें लग गई हैं। इलाज और दवाइयों के लिए लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल, डॉक्टरों ने सोमवार (8 दिसंबर) से हड़ताल की चेतावनी दी थी और कहा था कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे। सरकार की सख्ती के बावजूद डॉक्टर अपने फैसले पर अड़े हुए हैं।
🩺 एसोसिएशन अध्यक्ष का बयान
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राजेश ख्यालिया ने कहा कि सरकार ने भले ही ESMA लागू कर दिया हो, लेकिन डॉक्टर अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने बताया कि सरकार ने पिछले वर्ष डॉक्टरों की पदोन्नति के लिए Assured Career Progression (ACP) लागू करने का लिखित आश्वासन दिया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ।
🧾 भर्ती पर उठे सवाल
डॉ. ख्यालिया ने कहा कि सरकार द्वारा 200 एसएमओ पदों पर भर्ती की योजना बनाई गई है, जिनमें से 160 पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। यह पहले से कार्यरत डॉक्टरों के साथ अन्याय है, क्योंकि ये पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाने चाहिए थे।
🍽️ भूख हड़ताल भी शुरू
डॉक्टरों के आंदोलन ने और तेज़ी पकड़ ली है। स्वास्थ्य निदेशालय, पंचकूला में तीन डॉक्टरों ने भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगें स्वीकार नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।
🏥 600 पद खाली
एसोसिएशन के अनुसार, प्रदेश में करीब 600 मेडिकल ऑफिसर के पद खाली हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सरकार को कार्रवाई करने के बजाय इन पदों को भरने पर ध्यान देना चाहिए।
इस बीच स्वास्थ्य मंत्री ने दावा किया है कि डॉक्टरों की कुछ मांगें मान ली गई हैं और बाकी पर बातचीत जारी है, लेकिन सरकार के सख्त कदमों के बाद फिलहाल स्थिति और बिगड़ती नजर आ रही है।

