
करनाल के किसानों की मिसाल: खेत में पराली मिलाकर बढ़ाई मिट्टी की उर्वरता, सुपर सीडर से प्रदूषण पर भी लगी रोक
हरियाणा के करनाल जिले के किसानों ने पराली प्रबंधन को लेकर एक नई और सराहनीय पहल की है। इस बार किसानों ने पराली जलाने के बजाय उसे खेत में ही मिलाकर न केवल अपनी जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ाई है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम कदम उठाया है।

सरकार की ओर से कृषि यंत्रों पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलने के बाद किसानों को पराली प्रबंधन में काफी सहूलियत मिली है। इसका असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। सुपर सीडर और एसएमएस जैसी आधुनिक मशीनों की मदद से किसान धान की कटाई के बाद पराली को खेत में ही मिला रहे हैं।
🌾 पराली से राहत, मिट्टी में आई जान
करनाल के ताखाना गांव के किसान बक्शी लाल बताते हैं कि पहले धान की कटाई के बाद पराली संभालना किसानों के लिए बड़ी परेशानी हुआ करती थी। मजबूरी में किसान पराली जलाते थे, जिससे नुकसान भी होता था। लेकिन अब सुपर सीडर और एसएमएस मशीनों के जरिए पराली को खेत में मिलाना आसान हो गया है।
उन्होंने कहा कि इससे मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और खेतों की उर्वरता पहले से कहीं बेहतर हुई है। अब फसलों की पैदावार भी अच्छी होने लगी है।
🚜 सरकारी सब्सिडी बनी सहारा
किसानों का कहना है कि पहले पराली जलाने के लिए उन्हें दोषी ठहराया जाता था, जबकि उनके पास कोई विकल्प नहीं था। अब सरकार द्वारा कृषि यंत्रों पर दी जा रही सब्सिडी से हालात पूरी तरह बदल गए हैं। किसान न केवल पराली को खेत में दबा रहे हैं, बल्कि बेलर मशीन से गांठ बनाकर अतिरिक्त आमदनी भी कर रहे हैं।
🌍 पर्यावरण बचाने की अपील
किसान बक्शी लाल ने अन्य किसानों से अपील करते हुए कहा कि पराली में आग लगाने से पर्यावरण को भारी नुकसान होता है। इससे खेतों के लाभकारी जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि एसएमएस और सुपर सीडर मशीनों का उपयोग कर किसान अपनी जमीन को और भी उपजाऊ बना सकते हैं।
किसानों का मानना है कि अगर यही तरीका अपनाया जाए तो प्रदूषण भी कम होगा और खेती भी ज्यादा लाभकारी बनेगी।

