
सेना के जवान ने ही बुझा दिया सुहाग: लुधियाना आर्मी कैंप में पत्नी की गला दबाकर हत्या, दहेज बना मौत की वजह
पंजाब के लुधियाना से सामने आई यह वारदात न सिर्फ रिश्तों को शर्मसार करती है, बल्कि वर्दी की गरिमा पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। शेरपुर चौक स्थित आर्मी कैंप में तैनात एक सैनिक पर अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या करने का आरोप लगा है। चार साल पहले शादी के बंधन में बंधी 24 वर्षीय विवाहिता की मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।
मृतका की पहचान प्रिंयका के रूप में हुई है, जबकि आरोपी पति छोटन, पश्चिम बंगाल का रहने वाला है और भारतीय सेना में सिपाही के पद पर तैनात है। पुलिस ने मृतका के मायके पक्ष की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ दहेज हत्या और घरेलू हिंसा की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।
परिजनों का आरोप है कि शादी के कुछ ही महीनों बाद से आरोपी जवान ने दहेज को लेकर प्रताड़ना शुरू कर दी थी। छोटी-छोटी बातों पर मारपीट, मानसिक यातना और लगातार पैसों की मांग से प्रिंयका की जिंदगी नर्क बन गई थी। दंपती का एक छोटा बच्चा भी है, जो अब मां की ममता से हमेशा के लिए वंचित हो गया।
घटना की जानकारी 18 जनवरी को तब सामने आई, जब मृतका के परिजनों को अचानक बेटी की मौत की सूचना मिली। घबराए परिजन पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले से लुधियाना पहुंचे और बेटी की हालत देखकर उनके होश उड़ गए। इसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी।
बुधवार को सिविल अस्पताल की मोर्चरी में चार डॉक्टरों के विशेष बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम किया गया। जांच में मृतका के सिर में गंभीर अंदरूनी चोटें पाई गईं, जबकि गले पर स्पष्ट दबाव के निशान मिले हैं। डॉक्टरों को आशंका है कि कपड़े या किसी अन्य वस्तु से गला घोंटकर प्रिंयका की जान ली गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अंतिम निष्कर्ष आने के बाद मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी, लेकिन प्रारंभिक जांच में हत्या की आशंका काफी मजबूत नजर आ रही है। आरोपी जवान से लगातार पूछताछ की जा रही है और आर्मी कैंप से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह कड़वी सच्चाई उजागर कर दी है कि दहेज की आग आज भी घरों में बेटियों की जिंदगी निगल रही है, चाहे आरोपी किसी भी पद या वर्दी में क्यों न हो। कानून के हाथ लंबे हैं और पुलिस का कहना है कि दोषी पाए जाने पर आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी।
लुधियाना की यह घटना न सिर्फ एक परिवार की खुशियों का अंत है, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि दहेज और घरेलू हिंसा के खिलाफ अब चुप्पी तोड़ना जरूरी है।


