
सूरजकुंड मेले में लापरवाही का खामियाजा: झूला हादसे ने छीनी इंस्पेक्टर की जान, हरियाणा की साख पर सवाल
फरीदाबाद के ऐतिहासिक सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में शनिवार शाम हुआ झूला हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक बनकर सामने आया है। झूला ग्राउंड में लगा नाव आकार का ‘सुनामी झूला’ अचानक असंतुलित होकर टूट गया, जिससे उस पर सवार लोग नीचे गिर पड़े। हादसे में एक पुलिस इंस्पेक्टर की जान चली गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

ड्यूटी पर तैनात इंस्पेक्टर की गई जान
हादसे में शहीद हुए इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद उस वक्त मेले में सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे थे। उनकी मौत ने पुलिस महकमे के साथ-साथ पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।
सरकार का ऐलान: परिवार को स्थायी सहारा
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हादसे पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि शहीद इंस्पेक्टर के परिवार को सरकार अकेला नहीं छोड़ेगी। उन्होंने घोषणा की कि परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाएगी, ताकि भविष्य की चिंता कम हो सके। इसके साथ ही सभी घायलों को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक मदद देने का फैसला लिया गया है।
दुष्यंत चौटाला का तीखा हमला
पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने इस घटना को लेकर सरकार और पर्यटन विभाग पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सूरजकुंड मेला हरियाणा की पहचान है और यहां हुई लापरवाही ने प्रदेश की छवि को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बीते वर्षों में मेले को सांस्कृतिक मंच से ज्यादा कमाई का जरिया बना दिया गया है, जहां सुरक्षा मानकों से समझौता कर जोखिम भरे झूलों को अनुमति दी जाती है।
अंतरराष्ट्रीय आयोजन में सुरक्षा पर सवाल
सूरजकुंड मेला ऐसा मंच है, जहां 50 से अधिक देशों के सैकड़ों शिल्पकार और लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की सुरक्षा चूक सीधे तौर पर भारत और हरियाणा की साख पर असर डालती है।
झूलों की अनुमति नीति पर पुनर्विचार की मांग
दुष्यंत चौटाला ने मांग की कि मेले में एडवेंचर झूलों की अनुमति देने वाली नीति को समाप्त किया जाए। उनका कहना है कि इन झूलों के कारण न सिर्फ हादसों का खतरा बढ़ता है, बल्कि शिल्पकारों और कलाकारों की मेहनत भी हाशिए पर चली जाती है।
जांच के घेरे में पर्यटन विभाग
हादसे के बाद जांच शुरू हो चुकी है, लेकिन विपक्ष और जनता की मांग है कि जांच सिर्फ औपचारिक न रहे। जिम्मेदार अधिकारियों और झूला संचालक कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोहराई न जाए।
सबक लेने की जरूरत
यह हादसा एक कड़वी याद दिलाता है कि बड़े आयोजनों में सुरक्षा को नजरअंदाज करने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ती है। सूरजकुंड जैसी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना सरकार और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।



