
वीआईपी मोबाइल नंबर का लालच पड़ा भारी: 4.79 लाख की साइबर ठगी, सहारनपुर से आरोपी गिरफ्तार
हरियाणा के Hansi में एक व्यक्ति के साथ वीआईपी मोबाइल नंबर दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ऑनलाइन ठग किस तरह नई-नई तरकीबों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। मामले में सक्रियता दिखाते हुए Hansi Cyber Police ने आरोपी को उत्तर प्रदेश के Saharanpur से गिरफ्तार कर लिया है।

पीड़ित व्यक्ति, जिसकी पहचान मंगल के रूप में हुई है, ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 16 फरवरी 2025 को उसके पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आया था। कॉल करने वाले ने खुद को एक मोबाइल सिम विक्रेता बताया और कहा कि वह Reliance Jio का एक खास वीआईपी नंबर उपलब्ध करवा सकता है। उसने यह भी दावा किया कि यह नंबर बेहद आकर्षक और सीमित संख्या में ही उपलब्ध है, इसलिए जल्द निर्णय लेना जरूरी है।
शुरुआत में पीड़ित को यह प्रस्ताव थोड़ा असामान्य लगा, लेकिन आरोपी ने बातों-बातों में उसे विश्वास में ले लिया। उसने खुद को अधिकृत एजेंट बताते हुए भरोसा दिलाया कि पूरी प्रक्रिया वैध है और नंबर जल्द ही सक्रिय कर दिया जाएगा। लगातार संपर्क में रहकर उसने पीड़ित का भरोसा जीत लिया और फिर उसे आगे की प्रक्रिया के लिए तैयार कर लिया।
आरोपी ने व्हाट्सएप के जरिए पीड़ित को एक पोर्टिंग कोड भेजा और साथ ही भुगतान के लिए एक क्यूआर कोड भी साझा किया। उसने समझाया कि यह प्रक्रिया मोबाइल नंबर को एक्टिवेट करने के लिए जरूरी है। पीड़ित ने बिना किसी संदेह के उसकी बातों पर भरोसा कर लिया और दिए गए क्यूआर कोड के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करने शुरू कर दिए।
यह भुगतान एक बार में नहीं, बल्कि अलग-अलग किस्तों में किया गया। हर बार आरोपी कोई न कोई नया कारण बताकर अतिरिक्त पैसे मांगता रहा—कभी प्रोसेसिंग फीस, कभी सिक्योरिटी चार्ज, तो कभी एक्टिवेशन शुल्क के नाम पर। इस तरह धीरे-धीरे पीड़ित से कुल 4 लाख 79 हजार 670 रुपये की बड़ी रकम ठग ली गई।
जब काफी समय बीत जाने के बाद भी न तो कोई वीआईपी नंबर मिला और न ही आरोपी ने कोई स्पष्ट जवाब दिया, तब पीड़ित को शक हुआ। उसने आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन या तो कॉल नहीं उठाया गया या फिर बहाने बनाए गए। अंततः उसे एहसास हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुका है।
इसके बाद पीड़ित ने तुरंत Hansi Cyber Police में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और साइबर तकनीकों की मदद से आरोपी का पता लगाने का प्रयास किया। कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल ट्रेल की जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले।
इन सुरागों के आधार पर पुलिस टीम आरोपी तक पहुंचने में सफल रही। उसकी लोकेशन Saharanpur में ट्रेस की गई, जहां छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी की पहचान कशिश गिरधर के रूप में हुई है, जो दिल्ली के दलीप विहार इलाके का निवासी है।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि वह अकेले काम नहीं कर रहा था, बल्कि एक संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है। पुलिस अब यह जानने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं और उन्होंने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी को अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि उससे और गहन पूछताछ की जा सके। इस दौरान ठगी की गई रकम की रिकवरी और अन्य आरोपियों की पहचान पर भी काम किया जाएगा।
गौरतलब है कि इस मामले में एक अन्य आरोपी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, जिससे यह साफ हो गया है कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है।
इस घटना के बाद पुलिस ने आम जनता से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल या ऑफर पर तुरंत भरोसा न करें, खासकर जब वह पैसे से जुड़ा हो। वीआईपी नंबर, लॉटरी, इनाम या किसी विशेष सुविधा के नाम पर मांगे जाने वाले पैसे अक्सर ठगी का हिस्सा होते हैं।
साइबर एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। लोगों को चाहिए कि वे किसी भी लिंक, क्यूआर कोड या बैंक डिटेल्स को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें।
यह घटना न केवल एक व्यक्ति के साथ हुई ठगी को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे साइबर अपराधी आम लोगों की लालच और भरोसे का फायदा उठाकर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं।
फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस गिरोह के बाकी सदस्यों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

