
मेरठ हाईवे पर मिला पीटीआई का शव: स्कूल संचालक पर हमले के आरोपी ने निगला जहर, जेब से मिला ढाई पन्नों का पत्र; कई एंगल पर जांच
खतौली के चर्चित स्कूल संचालक हमले प्रकरण में नामजद पीटीआई आशीष चौधरी की मौत ने पूरे मामले को नया और पेचीदा मोड़ दे दिया है। ताजपुर गांव निवासी आशीष, जो हाल के महीनों में खतौली के सैनीनगर में रह रहा था, सोमवार को मेरठ के दौराला क्षेत्र में संदिग्ध हालात में अचेत मिला। अस्पताल पहुंचाए जाने के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी। पुलिस को उसकी जेब से ढाई पन्नों का हस्तलिखित पत्र मिला है, जिसकी सामग्री की बारीकी से जांच की जा रही है।

हाईवे किनारे खड़ी कार, खेत में अचेत युवक
दिल्ली–दून हाईवे पर वलीदपुर कट के पास राहगीरों ने गन्ने के खेत में एक युवक को बेहोशी की हालत में पड़ा देखा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने एंबुलेंस बुलाकर उसे अस्पताल भेजा। चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच में जहरीले पदार्थ के सेवन की आशंका जताई। कुछ ही दूरी पर सरसों के खेत के पास उसकी ऑल्टो कार खड़ी मिली, जिससे संकेत मिलता है कि वह खुद वाहन चलाकर मौके तक पहुंचा था।
पहचान होने पर स्पष्ट हुआ कि मृतक वही आशीष चौधरी है, जिसका नाम खतौली स्थित लाल दयाल पब्लिक स्कूल के संचालक पर हुए हमले के मामले में सामने आया था। यह खबर फैलते ही दोनों जिलों में हलचल मच गई।
ढाई पन्नों का पत्र—क्लू या सवाल?
मृतक की जेब से मिला पत्र जांच का केंद्रीय बिंदु बन गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पत्र में निजी तनाव, कुछ व्यक्तियों के नाम और अपनी बेगुनाही से जुड़े दावे दर्ज हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर पत्र की सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है। हैंडराइटिंग मिलान, कागज और स्याही की जांच तथा डिजिटल साक्ष्यों के साथ क्रॉस-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जांच अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि पत्र किसी दबाव में तो नहीं लिखा गया। मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), चैट और हालिया लोकेशन डेटा खंगाले जा रहे हैं, ताकि घटना से पहले के घंटों की गतिविधियां स्पष्ट हो सकें।
हमले का मामला और कानूनी दबाव
कुछ समय पहले स्कूल संचालक राजवीर वर्मा पर हुए हमले ने इलाके में सनसनी फैला दी थी। जांच के दौरान आशीष चौधरी समेत कई लोगों के नाम सामने आए। मामले में अजीत और पंकज ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जबकि जानसठ निवासी रोबिन की गिरफ्तारी हुई थी। बाद में पुलिस ने तीन आरोपियों पर अमानत में खयानत की धारा भी बढ़ाई, जिनमें आशीष का नाम शामिल बताया गया।
करीबी लोगों का कहना है कि धाराएं बढ़ने और केस की प्रगति के बाद से आशीष मानसिक दबाव में था। वह भविष्य को लेकर चिंतित रहता था और अक्सर खुद को फंसा हुआ बताता था। हालांकि, पुलिस का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच जरूरी है।
प्रेम-प्रसंग की चर्चा, पर पुष्टि नहीं
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि घटना से ठीक पहले आशीष का किसी महिला से फोन पर विवाद हुआ था। कुछ लोगों का दावा है कि यह विवाद निजी संबंधों से जुड़ा था, जिसने उसे भावनात्मक रूप से विचलित कर दिया। लेकिन पुलिस ने इन अटकलों की पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि पत्र और डिजिटल साक्ष्य की जांच पूरी होने के बाद ही प्रेम-प्रसंग के कोण पर कोई स्पष्ट बयान दिया जाएगा।
पोस्टमार्टम, विसरा और फोरेंसिक
पोस्टमार्टम के बाद विसरा सुरक्षित रखा गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस प्रकार का जहरीला पदार्थ सेवन किया गया था। घटनास्थल से भी नमूने एकत्र किए गए हैं। कार की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है—क्या उसमें कोई संदिग्ध वस्तु, दवा की शीशी या अन्य साक्ष्य मौजूद थे? इन सवालों के जवाब रिपोर्ट आने के बाद मिलेंगे।
परिवार का पक्ष
आशीष के परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि वह ऐसा कदम नहीं उठा सकता था और उस पर कई तरह का मानसिक दबाव था। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि केस में नाम आने के बाद से वह सामाजिक तौर पर अलग-थलग पड़ गया था। गांव और मोहल्ले में शोक का माहौल है।
पुलिस का आधिकारिक रुख
मेरठ पुलिस ने कहा है कि प्रथम दृष्टया मामला जहरीले पदार्थ के सेवन से मौत का प्रतीत होता है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष फोरेंसिक रिपोर्ट और पत्र की जांच के बाद ही निकाला जाएगा। मुजफ्फरनगर पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर हमले के केस की फाइल और हालिया प्रगति की भी समीक्षा की जा रही है। यदि पत्र में किसी के खिलाफ आरोप दर्ज हैं, तो उन बिंदुओं पर भी पूछताछ की जाएगी।
कई अनुत्तरित प्रश्न
क्या यह कदम पूरी तरह व्यक्तिगत कारणों से उठाया गया?
क्या कानूनी दबाव और सामाजिक बदनामी ने भूमिका निभाई?
क्या पत्र में दर्ज आरोप किसी नई जांच की दिशा तय करेंगे?
इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं। इतना तय है कि एक आरोपी की मौत ने मूल हमले के केस को और जटिल बना दिया है। साक्ष्य-आधारित जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी। फिलहाल, दोनों जिलों की पुलिस हर एंगल—निजी संबंध, कानूनी दबाव और संभावित उकसावे—को ध्यान में रखकर पड़ताल कर रही है। जांच पूरी होने तक यह मामला चर्चा का केंद्र बना रहेगा।



