
भारतीय सेना को मिला हाई-टेक ‘आंख और कान’: वी-बैट ड्रोन से 12 घंटे तक दुश्मन पर नजर, निर्माण होगा भारत में
भारतीय सेना की निगरानी और खुफिया क्षमता जल्द ही नई ऊंचाइयों पर पहुंचने वाली है। सेना ने अत्याधुनिक वी-बैट मानव रहित हवाई वाहन (UAV) को अपने बेड़े में शामिल करने के लिए अमेरिकी रक्षा कंपनी शील्ड एआई के साथ समझौता किया है। खास बात यह है कि इस ड्रोन का निर्माण भारत में किया जाएगा, जिससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूती मिलेगी।

वी-बैट ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी रनवे-रहित उड़ान क्षमता है। यह ड्रोन बिना किसी हवाई पट्टी या विशेष ढांचे के सीधे ऊपर उड़ान भर सकता है और उसी तरह सुरक्षित लैंडिंग भी कर सकता है। एक बार हवा में पहुंचने के बाद यह करीब 12 घंटे तक लगातार निगरानी करने में सक्षम है। कठिन मौसम और दुर्गम इलाकों में भी इसका प्रदर्शन प्रभावी बताया गया है।
समझौते के तहत भारतीय सेना को वी-बैट ड्रोन के साथ हाइवमाइंड ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर का लाइसेंस भी दिया जाएगा। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रणाली ड्रोन को स्वतः निर्णय लेने, वातावरण का आकलन करने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम बनाती है। खास बात यह है कि संचार या जीपीएस सिग्नल बाधित होने की स्थिति में भी वी-बैट अपने मिशन को पूरा कर सकता है।
इस ड्रोन का उपयोग मुख्य रूप से खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी और टोही अभियानों में किया जाएगा। लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में इसकी तैनाती से घुसपैठ, आतंकी गतिविधियों और तस्करी जैसी चुनौतियों पर नजर रखना आसान होगा।
वी-बैट ड्रोन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी उपयोगिता साबित की है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के दौरान इस ड्रोन ने दुश्मन के कई ठिकानों की पहचान में अहम भूमिका निभाई थी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि वी-बैट और एआई आधारित स्वायत्त तकनीक भारतीय सेना को आधुनिक युद्ध के लिए और अधिक सक्षम बनाएगी।
कुल मिलाकर, यह समझौता न केवल सेना की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
