
घाटे से मुनाफे तक: एमसीडी बजट ने बदली दशकों पुरानी तस्वीर
पहली बार आय खर्च से ज्यादा, 1200 करोड़ रुपये बचाने का लक्ष्य
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है। वर्षों तक घाटे और कर्ज की मार झेलने के बाद अब एमसीडी ने पहली बार ऐसा बजट पेश किया है, जिसमें खर्च से अधिक आय का अनुमान लगाया गया है। स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा द्वारा प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट न केवल निगम की आर्थिक सेहत सुधारने का दावा करता है, बल्कि इसे आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

आंकड़ों से आगे की सोच वाला बजट
बजट पेश करते हुए सत्या शर्मा ने कहा कि यह दस्तावेज सिर्फ आय और व्यय के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई गई हैं। उनका कहना था कि अब एमसीडी को केवल सेवाएं देने वाली संस्था नहीं, बल्कि संसाधन जुटाने वाली सक्षम इकाई के रूप में काम करना होगा।
कितनी होगी कमाई, कितना होगा खर्च
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एमसीडी ने 17,044.06 करोड़ रुपये की कुल आय का अनुमान लगाया है। इसके मुकाबले 16,697.56 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना जताई गई है। इस तरह निगम के खाते में वर्ष के अंत तक अतिरिक्त राशि बचेगी।
यदि पिछले वर्ष की स्थिति पर नजर डालें, तो वित्तीय वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान में 15,679.72 करोड़ रुपये की आय और 16,305.18 करोड़ रुपये का व्यय दिखाया गया था। यानी तब भी निगम घाटे में था। ऐसे में मौजूदा बजट को एमसीडी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
बचत से घटेगा कर्ज, तेज होगा विकास
सत्या शर्मा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 1500 करोड़ रुपये की बचत दर्ज की गई थी। इस बचत को जोड़ने के बाद मौजूदा वित्तीय वर्ष में भी करीब 859 करोड़ रुपये शेष रहेंगे। इन सबको मिलाकर अगले वर्ष तक 1200 करोड़ रुपये से अधिक की कुल बचत होने की संभावना है।
इस राशि का इस्तेमाल सबसे पहले निगम के कर्ज को कम करने में किया जाएगा। साथ ही नई विकास परियोजनाओं को भी इसी बचत के सहारे आगे बढ़ाया जाएगा।
अब आय बढ़ाने पर फोकस
बजट का सबसे अहम संदेश यही है कि एमसीडी अब केवल खर्च पर लगाम लगाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अपनी आमदनी बढ़ाने के ठोस उपाय करेगी।
सबसे बड़ा जोर संपत्ति कर पर दिया गया है। निगम का लक्ष्य है कि जो संपत्तियां अब तक कर के दायरे में नहीं आई हैं, उन्हें इसमें शामिल किया जाए। सरकारी और निजी दोनों तरह की संपत्तियों से बकाया टैक्स वसूली के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। इससे वर्ष 2026-27 में 500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित करने का लक्ष्य तय किया गया है।
पार्किंग बनेगी कमाई का जरिया
दिल्ली के व्यस्त बाजारों और प्रमुख इलाकों में पार्किंग की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। एमसीडी अब इसे अवसर में बदलने की तैयारी कर रही है। बजट में घोषणा की गई है कि बड़े बाजारों के आसपास आधुनिक पार्किंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
जहां निगम के पास अपनी जमीन नहीं होगी, वहां दिल्ली सरकार या अन्य विभागों से जमीन लेकर पार्किंग बनाई जाएगी। इस पहल से 30 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी होने का अनुमान है।
विज्ञापन नीति में बदलाव
विज्ञापन से होने वाली आय बढ़ाने के लिए भी कई नए फैसले लिए गए हैं। यूनीपोल पर अब दोनों ओर कानूनी तरीके से विज्ञापन लगाने की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा साइकिल स्टैंड, सार्वजनिक शौचालय और निगम परिसरों पर विज्ञापन के लिए पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया लागू होगी।
इन सभी कदमों के जरिए एमसीडी को करीब 250 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है।
साफ हवा और हरियाली का रोडमैप
फायदे के बजट के साथ एमसीडी ने पर्यावरण सुधार को भी प्राथमिकता दी है। वायु प्रदूषण से निपटने के लिए विभिन्न विभागों को जोड़कर एक विशेष समन्वय समूह बनाया जाएगा। यह समूह सड़कों पर धूल नियंत्रण, निर्माण स्थलों की निगरानी, कचरा प्रबंधन और हरियाली बढ़ाने जैसे कार्यों की नियमित समीक्षा करेगा।
कूड़े के पहाड़ों से मिलेगी हरियाली
भलस्वा, गाजीपुर और ओखला की लैंडफिल साइटों को कूड़ा मुक्त करने के बाद वहां खाली हुई जमीन का उपयोग जनहित में किया जाएगा। इन स्थानों पर ग्रीन जोन, ऑर्गेनिक गार्डन और सामुदायिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
‘एक सड़क, एक दिन’ से बदलेगा शहर का चेहरा
शहर की सड़कों को दुरुस्त करने के लिए ‘एक सड़क, एक दिन’ योजना शुरू की जाएगी। इसके तहत हर जोन में रोज एक सड़क का संपूर्ण कायाकल्प होगा। मरम्मत, फुटपाथ सुधार, सफाई, लाइटिंग, पेड़ों की छंटाई और अतिक्रमण हटाने जैसे सभी काम एक ही दिन में पूरे किए जाएंगे।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर निवेश
एमसीडी स्कूलों में सुरक्षा और गुणवत्ता सुधारने के लिए सीसीटीवी, सुरक्षा गार्ड और स्मार्ट क्लासरूम की व्यवस्था करेगी। बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, योग और खेल गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
ग्रामीणों और कर्मचारियों के लिए राहत
ग्रामीण इलाकों में 200 वर्ग मीटर तक एक आवासीय प्लॉट को संपत्ति कर से मुक्त करने का फैसला लिया गया है। वहीं कर्मचारियों के लिए पदोन्नति, नियमितीकरण और समान वेतन व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है।
हर जोन में डॉग शेल्टर
लावारिश कुत्तों की देखभाल के लिए हर जोन में डॉग शेल्टर बनाए जाएंगे। बंध्याकरण, टीकाकरण और निगरानी के लिए अतिरिक्त केंद्र भी खोले जाएंगे।
निष्कर्ष
एमसीडी का यह बजट केवल आर्थिक लाभ का दावा नहीं करता, बल्कि प्रशासनिक सोच में बदलाव का संकेत देता है। यदि प्रस्तावित योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं, तो दिल्ली नगर निगम आने वाले वर्षों में आत्मनिर्भर, पर्यावरण-अनुकूल और नागरिक-केंद्रित संस्था के रूप में उभर सकता है।



