
बेअदबी कानून में देरी पर घिरी सरकार**
चंडीगढ़ में बेअदबी विरोधी विधेयक को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इस मुद्दे पर जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं और आस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की देरी गंभीर चिंता का विषय है।

चुग ने कहा कि सिख समुदाय के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब सर्वोच्च स्थान रखते हैं और उन्हें गुरु व भगवान के रूप में माना जाता है। ऐसे में उनकी बेअदबी का मामला बेहद संवेदनशील है और इसके खिलाफ सख्त से सख्त कानून होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा का मानना है कि बेअदबी के मामलों को हत्या के समान गंभीर अपराध माना जाना चाहिए और दोषियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर उन्हें उम्रकैद की सजा दी जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित विधेयक को केवल एक धर्म तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। तरुण चुग ने मांग की कि इसमें हिंदू धर्म की “प्राण प्रतिष्ठित” मूर्तियों को भी शामिल किया जाए, ताकि सभी धर्मों की आस्थाओं को समान रूप से संरक्षण मिल सके। उनका कहना था कि आस्था के मामलों में भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
चुग ने आरोप लगाया कि पंजाब में कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर बेअदबी की घटनाओं को अंजाम देकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों का मकसद राज्य में तनाव और अस्थिरता पैदा करना है, लेकिन सरकार को चाहिए कि वह सख्ती से कार्रवाई कर इन प्रयासों को विफल करे और शांति बनाए रखे।
सबसे अहम मुद्दा उठाते हुए उन्होंने पूछा कि आखिर आम आदमी पार्टी की सरकार को इस विधेयक को लाने में पूरे 49 महीने क्यों लग गए। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था और लोगों से वादा किया गया था कि सत्ता में आते ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। लेकिन इतने लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई न होना सरकार की नीयत और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है।
चुग ने कहा कि इस देरी से यह साफ जाहिर होता है कि सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया। उनका मानना है कि यदि समय पर कानून लाया जाता, तो कई घटनाओं को रोका जा सकता था और लोगों का भरोसा भी बना रहता। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि यह कदम केवल दबाव में आकर उठाया जा रहा है, न कि जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी उन्होंने पंजाब सरकार को घेरा। उनका कहना था कि हाल के दिनों में राज्य में कई ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें धार्मिक स्थलों और प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया गया है। यह स्थिति बताती है कि सरकार इन मामलों को संभालने में नाकाम रही है और राज्य की कानून-व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि पुलिस तंत्र भी सुरक्षित नहीं है। कई मामलों में पुलिस थानों और कर्मियों पर हमले हुए हैं, जो बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह हालात सरकार की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं और तुरंत सुधार की आवश्यकता है।
तरुण चुग ने दोहराया कि भाजपा सभी धर्मों और आस्थाओं का समान सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि कानून ऐसा होना चाहिए जो हर धर्म की भावनाओं की रक्षा करे और किसी के साथ भेदभाव न हो। उनका मानना है कि यदि कानून संतुलित और सख्त होगा, तो समाज में शांति और सौहार्द बना रहेगा।
अंत में उन्होंने आम आदमी पार्टी सरकार से मांग की कि प्रस्तावित विधेयक में तुरंत संशोधन कर “प्राण प्रतिष्ठित” हिंदू मूर्तियों को भी शामिल किया जाए। इससे सभी समुदायों को समान सुरक्षा मिलेगी और धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा मिलेगा।
यह मुद्दा अब पंजाब की राजनीति में एक बड़ा विषय बन चुका है। जहां विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं आम जनता भी इस पर स्पष्ट और ठोस कदम की उम्मीद कर रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है और क्या वह सभी पक्षों को संतुष्ट करने में सफल हो पाती है या नहीं।



