
बारिश ने बिगाड़ी व्यवस्था, मंडियों में भीगा गेहूं और बढ़ी किसानों की चिंता
हरियाणा के फरीदाबाद में मौसम की एक रात ने किसानों और आढ़तियों की कई दिनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। रविवार देर रात आई तेज आंधी और हल्की से मध्यम बारिश ने अनाज मंडियों में खुले में पड़े लाखों कट्टे गेहूं को भिगो दिया। पहले से ही धीमी सरकारी व्यवस्था और उठान की रफ्तार से परेशान किसान अब इस नए संकट से जूझ रहे हैं।

मंडियों का दृश्य सोमवार सुबह बेहद चिंताजनक था। जगह-जगह गेहूं के कट्टे खुले में पड़े नजर आए, जिनमें नमी साफ देखी जा सकती थी। कई स्थानों पर अनाज को ढकने के लिए पर्याप्त तिरपाल तक उपलब्ध नहीं थे। इससे यह साफ जाहिर होता है कि मौसम के अचानक बदलाव से निपटने के लिए कोई ठोस तैयारी नहीं थी।
दरअसल, फरीदाबाद की अनाज मंडियों में इस समय गेहूं की भारी आवक हो रही है। किसान अपनी फसल बेचने के लिए दूर-दूर से यहां पहुंच रहे हैं। लेकिन सरकारी खरीद और भंडारण की प्रक्रिया की धीमी गति के कारण गेहूं का उठान समय पर नहीं हो पा रहा है। नतीजतन, मंडियों में अनाज का ढेर लग गया है और उसे खुले में रखना मजबूरी बन गया है।
रविवार की रात जैसे ही मौसम ने करवट ली, तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी शुरू हो गई। यह बारिश रात भर रुक-रुक कर होती रही, जिससे खुले में रखा गेहूं भीग गया। सुबह जब किसान और आढ़ती मंडियों में पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि उनकी मेहनत पर पानी फिर चुका है।
किसानों के लिए यह स्थिति बेहद निराशाजनक है। एक ओर वे पहले ही फसल की कटाई, मजदूरी और ढुलाई में खर्च कर चुके हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें अभी तक अपनी उपज का भुगतान भी नहीं मिला है। ऐसे में फसल का खराब होना उनके लिए दोहरी मार जैसा है।
आढ़तियों का भी कहना है कि अगर उठान की प्रक्रिया समय पर पूरी हो जाती, तो इस नुकसान से बचा जा सकता था। उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हर साल बारिश के मौसम में ऐसी स्थिति बनती है, लेकिन इसके बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
स्थानीय आढ़ती सुनील मित्तल के अनुसार, अभी तक गेहूं में ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन अगर मौसम इसी तरह खराब रहा तो स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि तुरंत कदम उठाकर गेहूं को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है।
इस समस्या के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण है ट्रांसपोर्ट की कमी और ढुलाई की धीमी गति। ट्रक समय पर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं और जो हैं, वे भी पर्याप्त संख्या में नहीं हैं। इसके अलावा, एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) के गोदामों में भी अनाज खाली करने की प्रक्रिया काफी धीमी चल रही है। इससे मंडियों में अनाज का स्टॉक लगातार बढ़ता जा रहा है।
मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में मौसम खराब रहने की संभावना जताई है। आसमान में बादल छाए हुए हैं और तेज हवाएं चल रही हैं। ऐसे में अगर जल्द ही गेहूं को सुरक्षित स्थानों पर नहीं पहुंचाया गया, तो नुकसान और बढ़ सकता है।
किसानों ने सरकार से मांग की है कि इस समस्या का तुरंत समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि मंडियों में पक्के शेड बनाए जाएं, ताकि भविष्य में बारिश से अनाज को बचाया जा सके। इसके अलावा, उठान की प्रक्रिया को तेज किया जाए और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
किसानों ने यह भी मांग की है कि जिनकी फसल खराब हुई है, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई सरकार को करनी चाहिए, ताकि किसान आर्थिक रूप से कमजोर न हो जाएं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारी कृषि व्यवस्था इतनी कमजोर है कि हर साल मौसम की मार से किसानों को इसी तरह जूझना पड़ेगा। जब देश में कृषि को रीढ़ की हड्डी माना जाता है, तो उसकी सुरक्षा और प्रबंधन के लिए बेहतर व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।
प्रशासन के लिए यह समय सतर्कता और त्वरित कार्रवाई का है। अगर समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो किसानों का नुकसान और बढ़ सकता है। साथ ही, इससे सरकार की नीतियों और व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठ सकते हैं।
कुल मिलाकर, फरीदाबाद की मंडियों में भीगा गेहूं केवल एक स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे कृषि तंत्र की कमजोरियों को उजागर करता है। यह घटना एक चेतावनी है कि अगर समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो भविष्य में ऐसे हालात और भी गंभीर रूप ले सकते हैं।



