
बंद कमरे में सन्नाटा, बाहर फैलती बदबू… मेडिकल छात्र की मौत ने खोले कई राज, विरोध-प्रदर्शन एंगल से भी जांच तेज
पश्चिम बंगाल के नादिया जिले से सामने आई एक दर्दनाक और रहस्यमयी घटना ने मेडिकल शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है। यहां स्थित कल्याणी जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज के छात्रावास में अंतिम वर्ष के छात्र पुलक हलदर का शव उसके कमरे से बरामद हुआ। चौंकाने वाली बात यह रही कि छात्र की मौत के कई दिन बाद तक किसी को इसका अंदाजा नहीं हुआ, और जब सच्चाई सामने आई तो पूरा परिसर स्तब्ध रह गया।

पुलक हलदर दक्षिण 24 परगना जिले के मोगरहाट का रहने वाला था और मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के अंतिम चरण में था। परिवार और गांव वालों को उससे काफी उम्मीदें थीं। लेकिन 20 फरवरी के बाद से वह अचानक लापता हो गया। हॉस्टल में रहने वाले साथियों ने उसे आखिरी बार कैंटीन की ओर जाते देखा था। इसके बाद वह न क्लास में दिखा, न दोस्तों से मिला और न ही फोन पर संपर्क में आया।
शुरुआत में किसी ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। मेडिकल कॉलेजों में छात्रों का अपने कमरे में पढ़ाई के लिए कई दिनों तक बंद रहना आम बात मानी जाती है। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, उसके कमरे से निकलने वाली दुर्गंध ने सबको परेशान करना शुरू कर दिया। गलियारे से गुजरते छात्रों ने पहले सोचा कि शायद कोई खाना खराब हो गया होगा या पाइपलाइन में समस्या होगी, लेकिन बदबू बढ़ती गई।
आखिरकार गुरुवार को हॉस्टल प्रशासन को सूचना दी गई। वार्डन और कर्मचारियों ने दरवाजा खटखटाया, आवाज दी, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। स्थिति संदिग्ध लगने पर पुलिस को बुलाया गया। पुलिस टीम पहुंची और दरवाजा तोड़ा गया। जैसे ही दरवाजा खुला, अंदर का दृश्य देखकर मौजूद लोग दहल उठे — कमरे में पुलक का शव पड़ा था, जो कई दिनों से सड़ चुका था।
पुलिस ने तुरंत कमरे को सील कर दिया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में किसी स्पष्ट संघर्ष के निशान नहीं मिले, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस ने अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज कर लिया है और हर एंगल से जांच शुरू कर दी गई है।
इस बीच, घटना से जुड़े कई सवाल और चर्चाएं सामने आ रही हैं। कुछ छात्रों का दावा है कि हाल के दिनों में पुलक मानसिक रूप से परेशान दिख रहा था। वह पढ़ाई के दबाव और व्यक्तिगत समस्याओं से जूझ रहा था। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि हालिया छात्र आंदोलनों के दौरान उसे कथित तौर पर साथियों द्वारा परेशान किया गया था।
इन चर्चाओं का संबंध कोलकाता के चर्चित आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से जुड़े दुष्कर्म और हत्या मामले के बाद हुए छात्र प्रदर्शनों से जोड़ा जा रहा है। हालांकि पुलिस ने साफ कहा है कि फिलहाल इस कनेक्शन की पुष्टि नहीं हुई है और जांच पूरी होने से पहले कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
कॉलेज प्रशासन के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक सोमज्योति बनर्जी ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि छात्र कई दिनों से दरवाजा नहीं खोल रहा। जब प्रतिक्रिया नहीं मिली तो पुलिस को बुलाया गया और दरवाजा तोड़ने पर शव बरामद हुआ। उन्होंने कहा कि संस्थान पूरी तरह जांच में सहयोग कर रहा है।
छात्रावास में रहने वाले अन्य छात्रों के अनुसार, पुलक स्वभाव से शांत था और ज्यादा घुलता-मिलता नहीं था। वह अधिकतर समय अपने कमरे में पढ़ाई करता था। कुछ छात्रों ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों से वह कम ही बाहर निकलता था और तनाव में दिखता था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि हालात इतने गंभीर हो सकते हैं।
घटना के बाद कॉलेज परिसर में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या तनावपूर्ण स्थिति को रोका जा सके। छात्र संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि किसी प्रकार का उत्पीड़न, मानसिक दबाव या लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
यह घटना सिर्फ एक छात्र की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि मेडिकल शिक्षा प्रणाली में बढ़ते मानसिक दबाव की ओर भी इशारा करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल छात्रों पर पढ़ाई, परीक्षा, प्रतियोगिता और भविष्य की चिंता का दबाव बहुत ज्यादा होता है। यदि समय पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता और काउंसलिंग उपलब्ध न हो, तो हालात खतरनाक रूप ले सकते हैं।
स्थानीय लोगों का भी कहना है कि हॉस्टल प्रबंधन को नियमित निगरानी करनी चाहिए थी। अगर छात्र कई दिनों तक कमरे से बाहर नहीं निकला, तो इसकी जानकारी पहले ही मिल जानी चाहिए थी। इससे यह सवाल उठता है कि क्या हॉस्टल प्रशासन की सतर्कता में कमी थी।
फिलहाल पुलिस छात्र के मोबाइल फोन, लैपटॉप, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही है। परिवार से भी पूछताछ की जा रही है, ताकि यह समझा जा सके कि छात्र किन परिस्थितियों से गुजर रहा था। पुलिस का कहना है कि आत्महत्या, हत्या और प्राकृतिक मौत — सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।
इस घटना ने मेडिकल छात्रों के बीच भय और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। कई छात्रों ने मांग की है कि हॉस्टलों में नियमित वेलनेस चेक, काउंसलिंग सुविधा और निगरानी प्रणाली को मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि अगर समय रहते किसी ने दरवाजा खटखटाया होता, तो शायद आज स्थिति अलग होती।
एक होनहार छात्र का इस तरह अकेले कमरे में दम तोड़ देना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की त्रासदी है। अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच पर टिकी है, जो इस रहस्यमयी मौत के पीछे की सच्चाई उजागर करेगी।
