पतंग के पीछे दौड़ते-दौड़ते तालाब में समा गया बचपन: गाजियाबाद में 7 साल के आतिफ की तलाश में पूरी रात चला रेस्क्यू ऑपरेशन
गाजियाबाद के लोनी इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। खेल-खेल में पतंग पकड़ने निकला सात साल का मासूम आतिफ अचानक लापता हो गया और बाद में पता चला कि वह तालाब में गिर गया है। घटना के बाद से ही परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं प्रशासनिक टीमें लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई हैं।

यह घटना अंकुर विहार थाना क्षेत्र के डाबर तालाब श्मशान घाट के पास रविवार शाम करीब पांच बजे की बताई जा रही है। उस समय आतिफ अपने मोहल्ले के बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान एक पतंग उड़ते हुए नीचे आई, जिसे पकड़ने के लिए आतिफ दौड़ पड़ा। बच्चों के अनुसार, वह पतंग के पीछे-पीछे तालाब के पास तक पहुंच गया और फिर अचानक नजरों से ओझल हो गया।
शुरुआत में किसी को अंदाजा नहीं था कि कोई बड़ा हादसा हो गया है। घर पर भी स्थिति सामान्य ही रही। आतिफ के पिता आरिफ, जो कि मूल रूप से देवबंद के निवासी हैं, उस दिन तबीयत खराब होने के कारण घर पर ही आराम कर रहे थे। उन्होंने शाम के समय आतिफ को दूध लाने के लिए भेजा था। आतिफ घर से निकला, लेकिन वापस नहीं लौटा।
परिवार को लगा कि वह रोज की तरह ट्यूशन चला गया होगा, क्योंकि उसका ट्यूशन का समय करीब छह बजे होता था। लेकिन जब देर रात तक वह घर नहीं पहुंचा, तो परिजनों को चिंता होने लगी। उन्होंने पहले ट्यूशन सेंटर जाकर जानकारी ली, जहां से पता चला कि आतिफ उस दिन पढ़ने नहीं आया था। इसके बाद परिवार के लोगों ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश शुरू कर दी।
तलाश के दौरान परिजनों ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। एक फुटेज में आतिफ को श्मशान घाट की तरफ जाते हुए देखा गया। इसके बाद शक और गहरा गया। जब परिजन वहां पहुंचे, तो आसपास के बच्चों ने बताया कि आतिफ पतंग के पीछे भागते हुए तालाब की तरफ गया था और फिर वापस नहीं आया।
इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही अंकुर विहार थाना पुलिस, अग्निशमन विभाग और नगर पालिका की टीम मौके पर पहुंच गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। तालाब में बच्चे की तलाश के लिए जेसीबी मशीन का सहारा लिया गया, ताकि पानी के अंदर कीचड़ और तल को खंगाला जा सके।
रेस्क्यू टीम ने पूरी रात अथक प्रयास किए। गोताखोरों की मदद से भी तलाश की गई, लेकिन रात करीब 1:30 बजे तक कोई सफलता नहीं मिली। अंधेरा बढ़ने और दृश्यता कम होने के कारण अभियान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। सोमवार सुबह करीब सात बजे फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया।
इस घटना के बाद इलाके में भारी भीड़ जुट गई। स्थानीय लोग भी बच्चे की सलामती की दुआ कर रहे हैं और प्रशासन से जल्द से जल्द उसे ढूंढने की मांग कर रहे हैं। परिवार के लोग बेहद सदमे में हैं। मां का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि पिता बार-बार यही कह रहे हैं कि काश उन्होंने बच्चे को बाहर न भेजा होता।
आतिफ एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखता है। उसके पिता आरिफ लोनी के नहर रोड पर स्थित एक फैक्टरी में काम करते हैं, जहां मूर्तियां बनाई जाती हैं। परिवार में उसकी मां खुशनुमा, छोटा भाई मोहम्मद कैफ और बहन परी हैं। आतिफ घर का सबसे बड़ा बेटा था और परिवार की उम्मीदों का केंद्र भी।
वह पास के एक सरकारी स्कूल में दूसरी कक्षा का छात्र था और पढ़ाई में अच्छा माना जाता था। पड़ोसियों के अनुसार, आतिफ बेहद चंचल और मिलनसार स्वभाव का था। उसे पतंग उड़ाने और खेलकूद का काफी शौक था। लेकिन उसी शौक ने उसे ऐसी जगह पहुंचा दिया, जहां से वह वापस नहीं आ सका।
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने खतरनाक तालाब के आसपास कोई सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं था। न तो वहां बाड़ लगी थी और न ही कोई चेतावनी बोर्ड, जिससे बच्चों को खतरे का अंदाजा हो सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह तालाब पहले भी कई बार हादसों का कारण बन चुका है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब इस घटना के बाद लोगों में गुस्सा भी देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के खुले जल स्रोत बच्चों के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। ऐसे स्थानों पर बैरिकेडिंग, निगरानी और चेतावनी संकेत अनिवार्य होने चाहिए। साथ ही, अभिभावकों को भी बच्चों को ऐसे स्थानों से दूर रहने की शिक्षा देनी चाहिए।
फिलहाल, पुलिस और रेस्क्यू टीम पूरी कोशिश में जुटी है कि जल्द से जल्द बच्चे का पता लगाया जा सके। हर गुजरते घंटे के साथ परिवार की बेचैनी बढ़ती जा रही है।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।



